Saturday, September 6, 2008

शरीर में 111 छर्रे लेकर ही जीना होगा


हाथ-पैर में घुसी एक फांस दर्द से छटपटा देती है लेकिन पुलिस विभाग में एक शख्स ऐसे हैं जिनके शरीर में 111 र्छे हैं। बीस साल पहले हुई एक मुठभेड़ में उन्होंने बदमाशों से न केवल जमकर मुकाबला किया बल्कि उनके छक्के छुड़ा दिए।
इसी दौरान बदमाशों द्वारा मारी गई गोली से 160 से ज्यादा र्छे उनके शरीर में अंदर तक घुस गए। कुछ तो निकाल लिए गए लेकिन 111 र्छे अब भी हैं। हाल ही में मिली रिपोर्ट में डॉक्टर्स ने अब र्छे निकलने की उम्मीद छोड़ दी है। उक्त शख्स का नाम जल्द ही गिनीज बुक और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में जुड़ने जा रहा है।
ये हैं टीआई हरजीतसिंह सूदन। लंबे समय से पुलिस सेवा में रहे श्री सूदन अब तक सात से ज्यादा शहरों में रह चुके हैं और फिलहाल इंदौर में हैं। घटना 31 मई 1989 की है जब वे थाना भावगढ़ (मंदसौर) में पदस्थ थे। ग्रामीण वेणीराम पिता रूपराम बलाई ने पुलिस सहायता केंद्र (दलौदा) पर सूचना दी थी कि ग्राम एलची के पास हथियारबंद चार बदमाशों ने उसे लूट लिया और कपड़े उतारकर कुएं में उतार दिया।
इसके बाद एक अन्य ग्रामीण भी पुलिस के पास पहुंचा। उसे भी उन्हीं बदमाशों ने इस तरीके से ही लूटा था। सूचना मिलने के बाद श्री सूदन ने बल के साथ भानगढ़ के पास बदमाशों की घेराबंदी की, तो बदमाश जंगल की ओर भागे। इस पर उन्होंने एक ग्रामीण रायसिंह बागरी को साथ लिया और बदमाशों का पीछा कर समर्पण के लिए कहा लेकिन उन्होंने हमला कर दिया।
श्री सूदन के पास सर्विस रिवाल्वर नहीं थी इसलिए उन्होंने पत्थर फेंके। इस बीच एक बदमाश ने 12 बोर की बंदूक से उन्हें गोली मार दी। गोली के ढेरों र्छे उनके बायीं भुजा, पेट, कमर, सीने में लगे। बदमाश बंदूक में दूसरा कारतूस भर रहा था तभी श्री सूदन ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर श्री सूदन ने ग्रामीणों के साथ एक दल अन्य साथियों की धरपकड़ के लिए भेजा।
उधर, श्री सूदन को जिला अस्पताल मंदसौर ले जाया जहां प्राथमिक चिकित्सा में उनके शरीर से 20 र्छे निकाले गए। फिर एमवाय अस्पताल रैफर किया। वहां भी 20 से ज्यादा र्छे निकाले गए। इसके बाद अब तक के हुए इलाज में लगभग इतने ही र्छे निकाले जा चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बाकी र्छे निकालने के लिए सीएचएल अपोलो अस्पताल में इलाज कराया।
25 जुलाई 2008 को मिली एक्सरे रिपोर्ट के मामले में डॉ. मनीष लोढ़ा (रेडियोलॉजिस्ट) ने बताया उनके शरीर में अभी भी 111 र्छे हैं जो स्पष्ट दिखते हैं। ये र्छे भुजा, पेट, कमर, रीढ़ की हड्डी में इतने अंदर हैं कि यदि उन्हें ऑपरेशन कर निकालने का प्रयास किया तो शरीर की मांसपेशियां और नसों को नुकसान होगा। इसके साथ ही गंभीर परेशानियां भी होंगी जिससे चलना-फिरना दूभर हो जाएगा। इसके चलते डॉक्टर्स रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं। इन छर्रो के कारण उन्हें लगातार पीड़ा होती है लेकिन वे दर्द निवारक दवा लेते हैं।
तीन बदमाशों को पकड़ थालान्बे समय से पुलिस सेवा में रहे टीआई श्री सूदन इसे अपनी उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि मुठभेड़ और घेराबंदी में तीन कुख्यात बदमाश राधेश्याम, गणपत व हाकम पकड़े गए। इनसे दो बंदूकें, गुप्ती व फरसा बरामद हुए।
कोर्ट ने इन्हें सात-सात साल का कठोर कारावास सुनाया। उनके इस अदम्य साहस के लिए वे राजपूत समाज, सिक्ख समाज, प्रेस क्लब, लायंस क्लब, ऑल इंडिया कौमी एकता कमेटी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। शरीर से 111 र्छे निकलने की उम्मीद छोड़ चुके श्री सूदन ने हाल ही में विश्व रिकॉर्ड के लिए गिनीज बुक और लिम्का बुक में प्रविष्ठि भेजी है। उन्हें वहां से जवाब आने का इंतजार है।संभार भास्कर

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