Thursday, September 18, 2008

मारिया के लिए ‘भगवान का घर’ है हरिद्वार


देहरादून। आज से लगभग 28 वर्ष पहले मात्र कुछ दिनों के लिए भारत आई जर्मन लेखिका मारिया विर्थ ने कभी नहीं सोचा होगा कि वे शायद हमेशा के लिए यहीं की होकर रह जाएंगी। भारत में रुकने की उनकी इच्छा के पीछे हरिद्वार एक बड़ा कारण बना। सन 2006 में जर्मन भाषा में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘वॉन गुरुस, बॉलीवुड एंड हेलिजेन कुएहेन’ के जल्द आ रहे अंग्रेजी अनुवाद में उत्तराखंड राज्य और हरिद्वार की आध्यात्मिक खूबियों का बखान किया गया है। सन 1974 में अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान यहां की गर्मी, भिखारियों, भारी भीड़ और ऐसी ही अन्य बातों के चलते मारिया ने मन ही मन सोचा कि अब वे कभी यहां वापस नहीं आएंगी लेकिन सन 1980 में जर्मनी से ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा के दौरान उनके एक मित्र ने उनसे यहां ठहरने को कहा।मनोविज्ञान की पढ़ाई पूरी कर चुकी मारिया यह सोचकर ऑस्ट्रेलिया जा रही थीं ताकि वे देख सकें कि क्या वहां उनके रहने और काम करने लायक परिस्थितियां हैं। उस बात को 28 बरस बीत गए और मारिया आज भी यहीं हैं और वे हरिद्वार को ईश्वर का घर मानती हैं।सन1980 में जिस समय वे हरिद्वार आईं, उन्हें लगा कि यहां कोई बड़ा उत्सव हो रहा है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यहां अर्धकुंभ मेला लगा हुआ है। कमरे खाली न होने की वजह से उन्हें एक पर्यटक बंगले की छत पर रात बितानी पड़ी। मेले की भीड़भाड़ में उनकी मुलाकात दो गुरुओं से हुई जिनके माध्यम से मारिया ने एक दूसरे ही भारत का साक्षात्कार किया। वे गुरु थे- आनंदमयी मां और देवरहा बाबा।मारिया कहती हैं कि, “मैंने उनकी आंखों में देखा और मुझे लगा कि उनकी आंखों के अंदर असीम शांति है। शायद यह प्रेम था जो मैं उनके प्रति महसूस कर रही थी”। उसके बाद मारिया का परिचय भारत की प्राचीन समृद्ध विरासत और इसके ज्ञान से हुआ। वे नई पुरानी आध्यात्मिक किताबों में डूब गईं। इसके बाद उनके जीवन में परिवर्तन आना शुरू हुआ और वे एक एक कर अनेक गुरुओं के संपर्क में आईं।मारिया कहती हैं कि, “हर एक के पास मुझे कुछ देने को था। रामन्ना महर्षि ने मुझे कश्मीर के शैव मत के बारे में बताया जो सारी बातें समझने में सहायक हुआ”। मारिया कहती हैं कि, “यहां आकर मुझे पता चला कि भारत का प्राचीन दर्शन कितना समृद्ध है। मैंने जाना कि सभी मनुष्य एक ही महासागर में अलग-अलग धाराओं के समान हैं और अंतत: इनको इसी सागर में विलीन हो जाना है। इसलिए धारा के अंत अथवा व्यक्ति की मृत्यु से कोई खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सागर ही स्थायी है”।मारिया ने लगातार सात वर्षों तक भारत भ्रमण किया है और विभिन्न गुरुओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें कभी नहीं लगा कि वे अपने घर में नहीं हैं। इसके बाद ही उनके मन में खयाल आया कि वे भारत के आध्यात्मिक पहलू को ध्यान में रखकर एक किताब लिखें। वे भारत का वह रूप उजागर करना चाहती थीं जिससे पश्चिम के लोग अनभिज्ञ थे। मारिया मानती हैं कि भारतीयों के पास प्राचीन दर्शन और ज्ञान का अद्भुत खजाना है और भगवान के प्रति आस्था उनमें स्वाभाविक है। मारिया, जर्मन और भारतीय पत्रिकाओं के लिए लिखती हैं।उनका पहला आलेख वर्ष 1981 में प्रकाशित हुआ था जो ‘अद्वैत वेदांत’ पर आधारित था। मारिया कहती हैं कि वे लेखन को लेखकीय गंभीरता से नहीं लेतीं और अपने मनोभावों को कागज पर उतारती जाती हैं। उनकी इच्छा रहती है कि उनका लिखा हुआ लोगों के मन को छुए। इसलिए वे एकदम साधारण भाषा में गहरी से गहरी बात कहने में यकीन करती हैं।यह पूछे जाने पर कि अपनी हालिया जर्मनी यात्रा के दौरान उन्होंने भारत के बारे में क्या कहा, वे खिलखिला उठती हैं और कहती हैं कि, “मैंने सिर्फ अच्छी बातें ही कहीं हैं। जैसे मैंने कहा कि भारत में और विशेषकर हरिद्वार में कोई ऐसी बात नहीं देखी जिसकी बुराई की जा सके। यही बात मुझे यहां रहने के लिए प्रेरित करती है। भारत आकर ही मैंने यह जाना कि एक देश के लिए प्रेम के मायने क्या हैं”संभार हिन्दी न्यूज़

Tuesday, September 9, 2008

बिजली बगैर देश का विकास नहीं : सोनिया


बीकानेर : संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन की चैयरपर्सन एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी ने यहां से 40 किलोमीटर दूर स्थित बरसिंगसर में लिग्नाइट खान एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र का बटन दबाकर लोकार्पण-शिलान्यास किया। विशाल समूह की मौजूदगी में मंच पर केन्द्रीय कोयला मंत्री सन्तोष बागड़ोदिया, केन्द्रीय खान मंत्री शीशराम ओला, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता हेमाराम चौधरी, राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी मुकुल वासनिक, हरियाणा के वित्तमंत्री वीरेन्द्र सिंह, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सी. पी. जोशी, पूर्व अध्यक्ष डा. बी. डी. कल्ला, पूर्व सांसद व जिला प्रमुख रामेश्वर डूडी, कोयला विभाग के सचिव हरिश्चन्द्र गुप्ता व नेवली लिग्नाइट कॉरपोरेशन के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रसन्न कुमार भी मौजूद थे। श्रीमती गांधी ने बिना पार्टी के बैनर-झण्डे के एक तरह से चुनावी सभा में रोजगार की गारंटी योजना, अक्लियत के भाइयों के लिए कार्य और लोकसभा व विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसी लोक लुभावनी बातों से उपस्थित जनता को कांग्रेस की ओर रिझाने का अच्छा प्रचार किया। उन्होंने अपने 9 मिनट के संक्षिप्त भाषण में औपचारिकताओं को छोड़ते हुए सीधे-सीधे परमाणु करार से लेकर बच्चों के दोपहर के भोजन के सभी कार्य गिना दिए। उन्होंने प्रदेश में चल रहे नरेगा कार्य का जिक्र किए बगैर 100 दिन की रोजगार गारंटी देने की बात केन्द्र सरकार की बताई। श्रीमती गांधी ने परमाणु करार पर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की पीठ थपथपाते हुए यह भी कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा की पूर्ति अब आसानी से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के बगैर देश का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि बिजली के अभाव में काफी काम बंद हो जाते हैं। आज जिस कार्य की शुरुआत हुई है वास्तव में यह कार्य बहुत पहले हो जाना था। वे बोलीं कि हमारी कोशिश है कि बिजली योजनाओं का तीव्रगति से विस्तार हो। बरसिंगसर लिग्नाइट थर्मल प्रोजेक्ट के माध्यम से पश्चिमी राजस्थान की बिजली की कमी दूर होगी, औद्योगिक घरानों का लाभ मिलेगा। वहीं हजारों लोग रोजगार पा सकेंगे। यूपीए चैयरपर्सन ने कहा कि भारत निर्माण के तहत केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सेहत, पानी, शिक्षा का विस्तार किया वहीं सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता लाने के लिए सूचना का अधिकार कानून प्रभावी किया। किसानों को अन्नदाता परिभाषित करते हुए कांग्रेस अध्यक्षा ने कहा कि उनकी तकलीफों के मद्देनजर 65 हजार करोड़ का ऋण माफ कर 4 करोड़ किसानों को लाभ दिया गया। श्रीमती गांधी ने अपने भाषण की अंतिम पंक्तियों में सटीक भाषा में कहा कि हमारा काम ही हमारी पहचान है। सरकारों की असली परीक्षा काम के रुप में ही होती है। इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों के साथ कार्य करने की जरुरत है। इस मौके कोयला रायमंत्री सन्तोष बागडाेदिया ने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी का सपना पूरा हो रहा है, 8 वर्षों तक निजी कम्पनी के हाथों में रहने के बाद यूपीए सरकार ने इसे अपने हाथ में ले जो योजना बनाई उसके तहत 250 मेगावाट दिसम्बर व मार्च-2008 तक मिलने लगेगी। उन्होंने बताया कि 60 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन यहां बनेगी वहीं एक हजार मेगावाट यूनिट बनाने की योजना है। 8 हजार करोड़ की लागत की इस प्रोजेक्ट में 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। क्षेत्र में 1 लाख पौधारोपण होने की जानकारी के साथ उन्होंने बताया कि व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना से यहां के अधिकाधिक लोगों को प्रशिक्षण के साथ रोजगार मिल सकेगा। कोयला रायमंत्री ने श्रीमती गांधी के पद त्याग के बखान के साथ यह भी बताया कि बरसिंगसर में उत्पादित बिजली की खपत सिर्फ राजस्थान में ही होगी। केन्द्रीय खान राय मंत्री शीशराम ओला ने कहा कि राय के पिछडे ऌलाके के लिए अति महत्वाकांक्षी कार्य की शुरुआत आज हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केन्द्र की यूपीए सरकार की उपलब्धियों का बखान किया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. बी. डी. कल्ला व जिला प्रमुख डूडी, अश्क अली टॉक ने भी सोनिया गांधी के आगमन से पूर्व विचार रखे थे।संभार चोटी कशी

Saturday, September 6, 2008

पुरुषों को सेक्स चाहिए, महिलाओं को सहारा


पुरुष और महिलाएं भले ही हमकदम हो गए हों, लेकिन दोनों का मूल स्वभाव आज भी अलग-अलग है। हर काम करने का दोनों का अंदाज़ एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा होता हैः पुरुषों को स्वभाव से आक्रामक, प्रतियोगिता में विश्वास रखने वाला और अपनी बातों को छिपाने में माहिर माना जाता है। दोस्तों से बातचीत में पुरुष अपने सारे राज़ भले ही खोल दें, लेकिन किसी अजनबी से गुफ्तगू में पूरी सावधानी बरतते हैं। कारण, उनकी किसी बात से विरोधी फायदा न उठा सकें। पुरुष आमतौर पर अपने कामकाज़ में किसी तरह की दखलंदाज़ी बर्दाश्त नहीं करते। आपको यह जानकर हैरत होगी कि बड़े से बड़ा नुकसान होने और बहुत ज़्यादा खुशी दोनों ही हालत में पुरुष सेक्स की ज़रूरत शिद्दत से महसूस करते हैं। वे इसे बड़ा स्ट्रेस रिलीवर भी मानते हैं। वहीं, महिलाएं बॉयफ्रेंड या पति से झगड़ा होने पर चाहती हैं कि उनकी बात को पूरी तरह सुना जाए, लेकिन अगर कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से झगड़े के बाद उसे अपनी मज़बूत बांहों का सहारा देता है और दिल से उससे 'आई एम सॉरी' कह देता है, तो महिलाएं सब कुछ तुरंत भूल जाती हैं। कैलंडर जीन महिलाएं तारीखों का काफी हिसाब-किताब रखती हैं। उन्हें अपने पार्टनर या बॉयफ्रेंड के साथ-साथ दोस्तों, परिचितों और फैमिली मेंबर्स के जन्मदिन और सालगिरह की तारीखें याद रहती हैं, जबकि पुरुष कभी-कभी अपनी गर्लफ्रेंड या पत्नी का भी जन्मदिन भूल जाते हैं। मल्टीटास्किंग महिलाएं एक समय पर कई काम कर सकती हैं। वे फोन पर बात करते-करते टीवी देख सकती हैं। डिनर तैयार करते समय बच्चों की निगरानी कर सकती हैं, लेकिन पुरुष एक समय में एक ही काम करने में विश्वास रखते हैं। संकेतों की पहचान पुरुषों के मुकाबले महिलाएं संकेत पहचानने में ज़्यादा माहिर होती हैं, लेकिन वे दिल के मामले में अपनी बात किसी पर जल्दी ज़ाहिर नहीं करतीं। महिलाएं अपने पार्टनर की आंखों, बातों और उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस से उसकी चाहत का अंदाज़ा बखूबी लगा लेती हैं, लेकिन किसी से कुछ कहतीं नहीं। जबकि पुरुष 'शी लव्स मी, शी लव्स मी नॉट' की भूलभुलैया में भटकते रहते हैं। आपसी समझ कहा जाता है कि एक महिला ही दूसरी महिला को अच्छी तरह समझ सकती है। पुरुष महिलाओं को समझने का लाख दावा करें, लेकिन हकीकत में वे ज़िंदगीभर अपोज़िट सेक्स का नेचर समझने में उलझे ही रहते हैं। तुरंत मांग पुरुष किसी भी चीज़ की ज़रूरत होने पर बड़ी आसानी से उसकी डिमांड कर देते हैं, पर महिलाएं अपनी पसंद की चीज़ की तरफ पहले केवल इशारा ही करती हैं। इसे न समझने पर वह अपनी डिमांड शब्दों से ज़ाहिर करती हैं। बच्चों के करीब महिलाएं आमतौर पर अपने बच्चों की तमाम ज़रूरतों के प्रति सजग रहती हैं। उनकी पढ़ाई, बेस्ट फ्रेंड्स, फेवरिट फूड, सीक्रेट फियर, उनकी आशाओं और सपनों से वे पूरी तरह वाकिफ होती हैं, जबकि पुरुषों का ज़्यादातर समय बाहर बीतता है, इसलिए वे अपने बच्चों को उतनी अच्छी तरह नहीं जान पाते। टीवी सर्फिन्ग महिलाएं टीवी देखते समय एक ही चैनल पर ज़्यादा समय तक टिक सकती हैं। किस चैनल पर उनका पसंदीदा प्रोग्राम कब आएगा, यह उन्हें अच्छी तरह पता होता है, वहीं पुरुष एक समय में छह या सात चैनल देखते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि कुछ समय पहले वे किस चैनल पर कौन-सा प्रोग्राम देख रहे थे? नींद का माहौल महिलाओं को सोने के लिए पूरी शांति की ज़रूरत होती है। हो सकता है कि एक बल्ब जलता रहने पर वह चैन से न सो पाएं, जबकि पुरुष शोर में भी 'घोड़े बेचकर' सो सकते हैं। चाहे कुत्ते भौंक रहे हों, तेज़ आवाज़ में गाना बज रहा हो या बच्चे ऊधम मचा रहे हों, अगर उन्हें सोना है, तो फिर कोई भी चीज़ उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। संभार वार्ता

क्यों होता है कैंसर, खुल गया राज़



इंसानों में होने वाले दो सबसे खतरनाक- दिमाग और पैन्क्रियास के कैंसर के पीछे छिपे जिनेटिक कारणों को खोज लिया गया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दर्जनों ऐसे टूटे, गुमशुदा और ओवर एक्टिव जीन खोजे हैं जो ब्रेन और पैन्क्रियास(अग्नाशय) के ऐसे ट्यूमरों को जन्म देते हैं जो आगे चल कर कैंसर बन जाते हैं। इस खोज से इनके बेहतर इलाज की संभावना बढ़ी है। इंसानों में पाए जाने वाले कैंसर उम्मीद से कहीं ज्यादा जटिल होते हैं। इनका इलाज गुरिल्ला युद्ध की तरह है, जहां हर ट्यूमर में दर्जनों उत्परिवर्तित(म्यूटेशन) जीन होते हैं। जॉन हॉपकिंस इंस्टिट्यूट के प्रफेसर केनेथ किंजलर का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर इन म्यूटेशनों से निपटना आसान होता है। लेकिन अगर एक साथ इनका सामना करना पड़े तो, कामयाब होने के लिए एकदम नई स्ट्रैटिजी अपनानी होगी। सबसे बेहतर तो यही होगा कि इन ट्यूमरों के पनपने के शुरुआती दौर में ही इनका इलाज़ शुरू कर दिया जाए। अपनी स्टडी में शोधकर्ताओं ने दो ग्रुप बनाकर ब्रेन और पैन्क्रियास ट्यूमर सेल्स के डीएनए को डी-कोड किया। इन्हें लगभग 40 रोगियों से लिया गया था। रिसर्चरों की एक टीम ने 24 पैन्क्रिएटिक और 22 ब्रेन ट्यूमर से निकाले गए 20 हजार से भी ज्यादा डीएनए का विश्लेषण किया। दूसरे समूह ने सिर्फ ब्रेन कैंसर पर ही फोकस किया और 91 ट्यूमरों से 623 जीन्स का विश्लेषण किया। पहले ग्रुप ने कैंसर के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं में एक दर्जन से ज्यादा केमिकल फैक्टर खोजे। उन्होंने 83 जीन बदलाव देखे जो पैन्क्रियास के कैंसर को बढ़ावा देते हैं। दूसरी टीम ने ऐसे जीन खोज निकाले जिन्हें कैंसर के मामले में पहले नजरअंदाज किया जाता था। बहुत से जीन तो ऐसे थे जिनके बारे में पता ही नहीं था कि इनसे कैंसर हो सकता है। रिसर्चर डॉ. डेविड वीलर का कहना था, अभी तक हमें कैंसर की वजहें इतने बड़े स्तर पर नहीं दिखाई दी थीं। इस नई खोज से हमें इलाज के कई नए विचार आए हैं। संभार भास्कर

ब्रिस्टल पालिन


अमेरिका में वाइस प्रेज़िडंट पोस्ट की उम्मीदवार सारा पालिन की 17 साल की बेटी ब्रिस्टल पालिन के बिन ब्याहे प्रेगनंट होने की ख़बर से शुरू में हम चौंके थे। लेकिन, इतिहास पर नज़र डालें तो हम यह पाएंगे कि बड़े नेताओं की बेटियां स्कैंडल्स की वजह से पहले भी सुर्खियों में रही हैं। फिर चाहे बात अमेरिका के पूर्व प्रेज़िडंट रोनाल्ड रीगन की बेटी पैटी डेविस की हो या अमेरिकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी की बेटी मेरी चेनी की। अब इसका दोष चाहे पावरफुल लीडर्स की अपने काम में मशरूफियत के मत्थे मढ़ें, लेकिन लीडअमेरिका के प्रेज़िडंट जॉर्ज बुश की बेटी जेना बुश अपने पिता के 8 साल के कार्यकाल के दौरान कई बार कम उम्र में शराब पीने की वजह से खब़रों में रहीं। जॉर्ज बुश को जेना की वजह से काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। र्स अपने बच्चों को ज़्यादा समय नहीं दे पाते हैं, जिसके चलते उनके बच्चों का स्कैंडल्स में आना कतई आश्चर्यजनक नहीं लगता। अमेरिका के पूर्व प्रेज़िडंट रोनाल्ड रीगन की बेटी पैटी डेविस ने 1994 में प्लेबॉय के जुलाई अंक के कवर पर न्यूड पोज़ देकर तहलका मचा दिया था। रोनाल्ड रीगन का परिवार अमेरिका में काफी कंजर्वेटिव माना जाता है। लेकिन डेविस की प्लेबॉय इमिज ने उनके परिवार की छवि को काफी धक्का पहुंचाया था। 2004 में केन्स फिल्म फेस्टिवल में जब अमेरिका के सिनेटर जॉन केरी की बेटी अलेक्जेंड्रा केरी ने एंट्री मारी तो अच्छे-अच्छों के होश उड़ गए। केरी ने उस समय बिल्कुल आर-पार देखी जा सकने वाली ड्रेस पहनी थी। अमेरिका के वाइस प्रेज़िडंट डिक चेनी की बेटी मेरी चेनी ने जब इस बात का ऐलान किया कि वह समलैंगिक हैं, तो यह ख़बर अमेरिका सहित पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी। हालांकि, डिक चेनी के परिवार ने इस पूरे बवाल पर यह कहते हुए पानी डालने की कोशिश की कि वह लेस्बियन रिश्तों को ग़लत नहीं मानते। संभार टाईम्स

ऐसे निखरेगा रूप मिनटों में


अगर अचानक ही पार्टी या डिनर का इनवाइट आ जाए और आपके पास तैयार होने का समय ही न हो, तो इन बातों को आजमाएं। इस तरह आपको गॉर्जियस दिखने में बस कुछ मिनट ही लगेंगे: फेस ऑफ पार्टी में जाने से पहले आपके पास इतनी फुर्सत नहीं होती कि आप फेशियल करवा सकें, तो घबराइये नहीं। ऐसे में आप फेस मॉस्क ट्राई करें। आप सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह फेस वॉश से धोएं और उसके बाद फेस मॉस्क लगाएं। बाजार में कई वैरायटी में फेस मॉस्क उपलब्ध हैं, जिसमें आप ऑरेंज पील, नीम मॉस्क या मुलतानी मिट्टी वगैरह ट्राई कर सकती हैं। जब यह सूख जाए, तो आप स्क्रब और मॉइश्चराइजर को पानी की कुछ बूंदे के साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें और चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से गोलाई में मसाज करें। पांच मिनट मसाज करने के बाद अपना चेहरा साफ पानी से धो लें। अपने होंठों पर लिप-ग्लॉस लगाएं। अगर आपकी ऑयली स्किन है, तो टांसलूसेंट पाउडर अपने फेस पर लगाएं। अब आप पार्टी में जाने के लिए तैयार हैं। लहराते काले बाल अगर आपके ऑयली बाल हैं, तो उन्हें रोज वॉश करें। पार्टी में जाने से पहले अपने बाल को अच्छे से शैंपू करें। आप चाहें, तो बाल धोने से पहले थोड़ी मसाज कर लें। अगर आपके बाल बहुत ज्यादा ऑयली हैं, तो बालों पर टेल्कम पाउडर डालें। यह आपके बालों से सारा ऑयल सोख लेगा। इसके बाद भी अगर बालों की ऑयलीनेस खत्म नहीं होती, तो आप हेयर सीरम का इस्तेमाल करें। अगर उस वक्त आपके पास सीरम नहीं है, तो वेजिटेबिल ऑयल में कुछ बूंदे पानी की डालें और उसे बालों पर लगाएं। अगर इसके बाद भी आपकी बात नहीं बनती है, अपने बालों को बांध कर उस पर सुंदर-सा क्लिप या ग्लिटर ब्रोच लगा लें। सेक्सी आंखें आंखों के सही मेकअप से लुक को काफी हद तक बदल जाता है। अगर आपको तनाव है या आप रात को देर तक जगी हैं, तो वह आपकी आंखों से साफ झलकता है। आंखों की थकान को दूर करने के लिए आंखों पर बर्फ रखें। अगर आपकी आंखों के आसपास डार्क सर्कल्स हैं, तो ब्लैक आईलाइनर की जगह ब्राउन आईलाइनर लगाएं। आईलैशेज पर हल्का-सा ऑयल लगाएं। इससे वह सॉफ्ट और शेप में आ जाएंगी। अगर आप डार्क सर्कल्स छिपाने के लिए कंसीलर लगा रही हैं, तो उसे आंख और नाक के आसपास अच्छी तरह मिक्स कर लें। स्किन को टचअप आप पार्टी में हाल्टर टॉप या हैंगिंग टॉप पहन रही हैं, तो उसके लिए जरूरी है कि आपकी स्किन भी शाइन करें। अच्छी ड्रेस होने के बावजूद रूखे हाथ व पैर आपकी खूबसूरती को बदरंग बना सकते हैं। ड्राई स्किन से निजात पाने के लिए पानी में रॉक सॉल्ट डालकर नहाएं। हाथों, पैरों और बैक की स्क्रबिंग करें। शाइनिंग पाउडर और मॉइश्चराइजर को मिला कर हाथों व पैरों पर लगा लें। आप चाहें, तो थोड़ा फाउंडेशन भी मिला सकती हैं। अगर आप डीपनेक पहन रही हैं, तो कॉलर बोन्स और क्लीवेज़ को टचअप देना न भूलें। स्टाइलिश नेल्स आप ने अपने फेस, बाल, आंखों को तो संवार लिया, लेकिन कंपलीट लुक के लिए नेल्स को अनदेखा न करें। आप ने हाथ-पैरों को अच्छी तरह साफ किया है, लेकिन नाखूनों को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। इसके लिए पानी में नीबू के रस और नमक डालकर नाखूनों को धोएं। अगर आपके पास टाइम नहीं है, तो अपने नेल्स पर डार्क शेड्स का नेल पेंट लगाएं। इस मौसम में ब्लैक, पर्पल और वाइन कलर परफेक्ट रहेंगे। मेकअप किट अपने बैग में मेकअप किट कैरी करना न भूलें। गोल्ड डस्ट अपने बैग में रखें। इसे आप गालों, पलकों, कॉलर बोन्स, क्लीवेज आदि पर लगा सकती हैं। आप चाहें, तो मॉइश्चराइजर के साथ गोल्ड डस्ट मिलाकर हाथों व पैरों पर भी लगा सकती हैं। ट्रांसलूसेंट पाउडर भी अपनी मेकअप किट में रखें। अगर आपकी ऑयली स्किन है, तो इसे फाउंडेशन में मिलाकर लगाएं। इसके अलावा, मॉइश्चराइजर भी बैग में कैरी करें। संभार भास्कर

महानगरों को जकड़ रहा है ध्वनि प्रदूषण



दिल्ली में रहने वाली आईटी प्रफेशनल प्रीति चोपड़ा ने कभी गांव का रहन-सहन नहीं देखा था। वह एक बार गांव में रहकर देखना चाहती थीं। अपनी इस हसरत को पूरा करने के लिए पिछले दिनों उन्होंने प्लैन बनाया और अपनी दोस्त अनीता के पूर्वी उत्तर प्रदेश स्थित गांव चली गईं। ट्रेन से उतरने तक तो सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन जैसे ही वह गांव पहुंचीं, उन्हें लगा मानो यहां के लोग बहुत तेज बोलते हैं या उन्हें खुद कुछ ज्यादा सुनाई देने लगा है। अनीता ने यह बात प्रीति को बताई लेकिन उन्होंने इसे वहम कहकर बात टाल दी। हालांकि प्रीति को इस पर यकीन नहीं हुआ। एक हफ्ते बाद जब वह दिल्ली पहुंचीं तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि अब उन्हें कम सुनाई दे रहा है। इसके बाद प्रीति ईएनटी स्पेशलिस्ट के पास गईं और उन्हें अपनी समस्या बताई। ईएनटी स्पैशलिस्ट ने उन्हें बताया कि दरअसल महानगरों में ध्वनि प्रदूषण हमारी जीवनशैली में शामिल हो गया है। हम दिनभर शोरगुल के बीच रहते हैं और यह अब हमारी आदत में शुमार हो गया है। ऐसे में जब हम किसी ऐसी जगह जाते हैं, जहां ध्वनि प्रदूषण कम होता है तो हमें कुछ अलग-सा महसूस होने लगता है। इसके बाद प्रीति को यह बात समझ में आई कि गांववाले तेज नहीं बोल रहे थे, बल्कि गांव में वे सही तरीके से सुन पा रही थीं। दरअसल, इस तरह की समस्या की शिकार अकेली प्रीति नहीं हैं, बल्कि उनके जैसे हजारों लोग हैं, जो दिल्ली जैसे शहरों में रहते हैं। यहां लगभग हर जगह ध्वनि की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। केंदीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक , औद्योगिक क्षेत्र के लिए दिन में 75 और रात में 70 डेसिबल ध्वनि सीमा तय की गई है। कमर्शल इलाकों के लिए यह सीमा दिन में 65 और रात में 55 डेसिबल, जबकि रेजिडेंशल क्षेत्र के लिए दिन में 55, रात में 45 डेसिबल और साइलेंस ज़ोन के लिए दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल ध्वनि सीमा तय की गई है। जबकि सीपीसीबी की एक स्टडी के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर के सभी इलाकों में ध्वनि निर्धारित सीमा से काफी ऊपर 80 डेसिबल पाई गई। यह तीव्रता लोगों के दिलोदिमाग और जीवनशैली पर असर डाल रही है। यहां हर उम्र के लोगों को सुनने, बात करने और नींद न आने की परेशानी महसूस होती है। बहरापन और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं आज आम होती जा रही हैं। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 20 साल तक की उम्र के 34 फीसदी लोगों में ये समस्याएं देखी जा रही हैं। 20 से 40 उम्र वर्ग के 49 फीसदी, 40 से 60 साल के 57 और 60 से ज्यादा उम्र के लगभग 75 फीसदी लोग इस परेशानी को झेल रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली जैसे शहरों में ध्वनि प्रदूषण का सबसे बड़ा स्त्रोत ट्रैफिक है। इसके अलावा म्यूजिक सिस्टम, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, अवन, एग्ज़ॉस्ट फैन, सीलिंग फैन, वॉशिंग मशीन, कंप्यूटर जैसी घरेलू इस्तेमाल की अन्य चीजें भी प्रदूषण बढ़ा रही हैं। सीपीसीबी की स्टडी में शामिल लोगों से इस बात का सुझाव मांगा गया था कि आखिर इस ध्वनि प्रदूषण से किस तरह मुक्ति मिल सकती है। ज्यादातर लोगों ने कहा, इसके दुष्परिणाम के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। सरकारी मशीनरी नियमों के पालन में सख्ती बरते। जरूरत पड़ने पर एनजीओ की मदद ली जाए। साथ ही, पुलिस और सिविक अथॉरिटी को और अधिक सशक्त बनाया जाए। राममनोहर लोहिया अस्पताल के सीनियर ईएनटी स्पैशलिस्ट डॉ. जे. एम. हंस कहते हैं कि एक आम आदमी के सुनने की सहनशक्ति 55 से 60 डेसिबल होती है। आमतौर पर 5 डेसिबल की ध्वनि को धीमी, 25 डेसिबल को साधारण और 60 से अधिक डेसिबल की ध्वनि को तेज शोर यानी प्रदूषण कहा जाता है। इतने ज्यादा शोर में लंबे समय तक रहने पर कान ही नहीं, बल्कि पूरा नर्वस सिस्टम डिस्टर्ब हो जाता है। इसके कारण बेचैनी, तनाव, अनिदा, सिरदर्द, थकान, तनाव, कार्यक्षमता में कमी, बहरापन, कान के आंतरिक भाग में दिक्कत, दिल की धड़कन बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। साथ ही, हाई और लो ब्लडप्रैशर, चिड़चिड़ापन, गैस्ट्रिक, अल्सर, न्यूरो से जुड़ी समस्याएं, याददाश्त कमजोर होने, गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ने, कान में तेज दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। रॉकलैंड अस्पताल के ईएनटी स्पैशलिस्ट डॉ. ए. के. वर्मा कहते हैं कि ध्वनि प्रदूषण के कारण दिल्ली जैसे शहरों में कान से संबंधित समस्या आम हो गई है और ईएनटी ओपीडी में आने वाले ज्यादातर लोगों को सुनने संबंधी दिक्कतें होती हैं। जी. बी. पंत अस्पताल के न्यूरॉलजिस्ट डॉ. देबाशीष चौधरी कहते हैं कि ध्वनि प्रदूषण से नर्वस सिस्टम डिस्टर्ब होने और सही ढंग से नींद न आने के कारण मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके शिकार बड़े ही नहीं, स्कूली बच्चे भी हैं। वह कहते हैं कि हाल में आई एक स्टडी के मुताबिक, दिल्ली के 15 फीसदी टीनएजर्स 11 बजे के बाद बिस्तर पर जाते हैं और करीब 1 बजे तक सो पाते हैं। 10 फीसदी स्कूली बच्चों को गहरी नींद नहीं मिलती। उनकी नींद बार-बार टूट जाती है और इस वजह से उठने पर ताजा महसूस नहीं कर पाते। दिनभर सिरदर्द, शरीर में भारीपन और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं रहती हैं। लंबे समय तक ये दिक्कतें होने पर तनाव, याददाश्त में कमी जैसी परेशानियां सामने आने लगती हैं। इससे बच्चे पढ़ाई से दूर भागने लगते हैं। डॉ. चौधरी कहते हैं कि ध्वनि प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिसे दूर करके कई बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। मगर इसके लिए सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं है। इसके परिणामों के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। साथ-साथ नियमों को सख्ती से लागू करने और हर नागरिक को अपना फर्ज समझकर नियमों का पालन करने की जरूरत है। वह कहते हैं कि छोटे-छोटे टिप्स भी इसमें कारगर भूमिका निभा सकते हैं। जैसे गाड़ियों के मेंटीनेंस के लिए समय-समय पर सर्विसिंग कराएं। बेवजह हॉर्न बजाने से बचें, तेज आवाज में टीवी, रेडियो, लाउडस्पीकर न चलाएं, घरेलू उपकरणों को मेंटेन रखें ताकि उनसे अतिरिक्त शोरगुल न हो। बच्चों को शुरू से ही इन सब चीजों का महत्व समझाएं। इससे समस्या काफी हद तक कंट्रोल हो सकती हैसंभार टुडे

समुद्र और सूरज लाएंगे रेत पर हरियाली



समुद्र तट के नजदीक स्थित रेगिस्तानी इलाकों में ऐसे ग्रीन हाउस बनाए जाएंगे, जो समुद्री पानी का इस्तेमाल न सिर्फ गर्मी कम करने बल्कि पौधों की सिंचाई के लिए भी करेंगे। समुद्री पानी को काम लायक बनाने के लिए सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह से रेगिस्तान में हरियाली लाने की तैयारी कर रहा है सहारा फॉरेस्ट प्रोजेक्ट। इसके जरिए न सिर्फ खाद्यान्न उपजाया जा सकेगा, बल्कि क्लीन एनर्जी और ताजा पानी भी मिल सकेगा। कैसा करेगा ग्रीन हाउस काम रेगिस्तान में बहुत बड़े साइज के ग्रीन हाउस बनाए जाएंगे। इनमें कॉन्सनट्रेटेड सोलर पावर ( सीएसपी) का इस्तेमाल किया जाएगा। सीएसपी में सोलर एनर्जी बनाने के लिए शीशों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे सूर्य की किरणें एक ही दिशा में फोकस हो जाती हैं और हीट पैदा कर बिजली बनाई जाती है। सहारा प्रोजेक्ट का दावा है कि इस तरह के ग्रीन हाउस इन्स्टॉलेशन से पूरे रेगिस्तान में हरियाली लाई जा सकती है। क्यों नहीं पनपते रेगिस्तान में पौधे रेतीली इलाकों में पौधों के न पनपने की दो वजह हैं- बहुत ज्यादा तापमान और पानी के साथ-साथ पोषक पदार्थों की मिट्टी में कमी। अभी तक ग्रीन हाउस में इस कमी को बाहर से पूरा किया जाता था, लेकिन इस ग्रीन हाउस में सारी जरूरतें खुद से पूरी की जाएंगी। ये कोशिश होगी शुष्क माहौल को आर्द्र और ठंडा बनाने की। पौधों को बढ़ने के लिए रोशनी की जरूरत होती है। लेकिन रेगिस्तान में रोशनी के साथ-साथ हीट इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि पौधों का विकास ही रुक जाता है। एक खास तापमान के बाद पत्तियों में बने बारीक छेद ( स्टोमेटा) से से पानी का निकलना इतना ज्यादा हो जाता है कि विकास के लिए जरूरी फोटो सिंथेसिस की क्रिया ही रुक जाती है। पौधे फोटोसिंथेसिस के जरिए अपने लिए आहार तैयार करते हैं, जो उनके विकास के लिए जरूरी है। गर्मी का इस्तेमाल जीवन के लिए ग्रीन हाउस में सोलर एनर्जी से बनी हीट का इस्तेमाल समुद्री पानी को भाप में तब्दील करने वाली मशीन सी वॉटर इवेपोरेटर को चलाने में किया जाएगा। इस दौरान भाप के संपर्क में ठंडी हुई हवा को ग्रीन हाउस के अंदर पंप कर दिया जाएगा। इससे हाउस का तापमान 15 डिग्री तक कम हो जाता है। ग्रीन हाउस के दूसरे छोर पर भाप को संघनित कर लिया जाता है। संघनन किसी भी द्रव को गैस से लिक्विड फॉर्म में बदलने को कहते हैं। इस तरह से मिले पानी का इस्तेमाल पौधों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। बाकी पानी का इस्तेमाल सोलर एनर्जी के लिए यूज किए जाने वाले शीशों की धुलाई में होगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा सतह मुहैया रहे। इस तरह से ग्रीन हाउस के अंदर कम तापमान और खूब सारी नमी भरा माहौल तैयार किया जाता है। इतना ही नहीं इस तकनीक से पैदा होने वाला ताजा पानी पौधों की जरूरत से पांच गुना ज्यादा होता है। इसलिए सीएसपी शीशों को साफ करने के अलावा कुछ पानी हाउस के बाहर भी रिलीज़ किया जा सकता है। इससे लोकल माइक्रो क्लाइमेट तैयार करने में मदद मिलेगी और आस-पास के पौधों को भी पनपने के लिए सही परिस्थितियां मिलेंगी। सहारा प्रोजेक्ट की कीमत भी सीएसपी और समुद्री ग्रीन हाउस की सस्ती तकनीक के कारण ज्यादा नहीं होगी। डिजाइनरों के मुताबिक 20 हेक्टेयर का ग्रीन हाउस बनाने में लगभग 8 करोड़ डॉलर की लागत आएग

गर्लफ्रेंड बनाने में बाजी मारते हैं बैड बॉयज


अच्छे कहे जाने वाले लड़कों का एक आम रोना रहा है कि लड़कियां उन्हें भाव नहीं देतीं और बुरे लड़कों के 'चंगुल' में फंस जाती हैं। अब वैज्ञानिक रिसर्च में भी यह बात साबित हो गई है कि एंटी-सोशल पर्सनैलिटी वाले पुरुष जिंदगी में और कुछ हासिल करें या न करें, लड़कियों को आकर्षित करने के मामले में वे बाजी मार लेते हैं। न्यू साइंटिस्ट मैगजीन के मुताबिक अमेरिकी रिसर्चरों ने 57 देशों में करीब 35 हजार लोगों पर कराए गए सर्वे में नतीजा निकाला कि आक्रामक, कठोर ह्रदय, चालाक और मतलबी स्वभाव के लोगों की सेक्स लाइफ बेहतर होती है। स्टडी के नतीजों को हाल ही में जापान के क्योटो शहर में आयोजित 'ह्यूमन बिहैवियर एंड इवॉल्यूशन सोसायटी' मीटिंग में पेश किया गया। न्यू मेक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर और स्टडी टीम के अगुआ पीटर जॉनसन के मुताबिक बिंदास जिंदगी जीने वाले इन लोगों के चरित्र की नुमाइंदगी कुछ हद तक जेम्स बॉन्ड जैसा कैरक्टर करता है। ऐसे लोग जो समझौते करने में यकीन नहीं रखते और न ही अंतर्मुखी होते हैं। नए-नए काम करना उनकी फितरत होती है, जिनमें लोगों को मारना और नई औरतें हासिल करना भी शामिल है। ऐसे लोग शॉर्ट टर्म रिश्तों में यकीन रखते हैं। ये दूसरों की बीवियों या प्रेमिकाओं पर नजर रखते हैं और उनसे थोड़े समय के लिए संबंध बनाने की कोशिश करते हैं। स्टडी की खास बात यह है कि यह सिर्फ पुरुषों पर लागू होती है। यानी इसी कैरक्टर की महिलाएं, सेक्स लाइफ के मामले में कामयाबी हासिल नहीं कर पातीं। स्टडी में यह भी कहा गया कि अच्छे चरित्र के लड़कों को निराश होने की जरूरत नहीं। पिछली कई स्ट्डीज में यह बात साबित हो चुकी है कि लड़कियां थोड़े वक्त या किसी खास मकसद के लिए भले ही किसी को चुन लें, लेकिन जिंदगी में सेटल उन्हीं पुरुषों के साथ होना चाहती हैं, जो अच्छे कैरक्टर के हों और उनका ख्याल रख सकें।
संभार भास्कर

शरीर में 111 छर्रे लेकर ही जीना होगा


हाथ-पैर में घुसी एक फांस दर्द से छटपटा देती है लेकिन पुलिस विभाग में एक शख्स ऐसे हैं जिनके शरीर में 111 र्छे हैं। बीस साल पहले हुई एक मुठभेड़ में उन्होंने बदमाशों से न केवल जमकर मुकाबला किया बल्कि उनके छक्के छुड़ा दिए।
इसी दौरान बदमाशों द्वारा मारी गई गोली से 160 से ज्यादा र्छे उनके शरीर में अंदर तक घुस गए। कुछ तो निकाल लिए गए लेकिन 111 र्छे अब भी हैं। हाल ही में मिली रिपोर्ट में डॉक्टर्स ने अब र्छे निकलने की उम्मीद छोड़ दी है। उक्त शख्स का नाम जल्द ही गिनीज बुक और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में जुड़ने जा रहा है।
ये हैं टीआई हरजीतसिंह सूदन। लंबे समय से पुलिस सेवा में रहे श्री सूदन अब तक सात से ज्यादा शहरों में रह चुके हैं और फिलहाल इंदौर में हैं। घटना 31 मई 1989 की है जब वे थाना भावगढ़ (मंदसौर) में पदस्थ थे। ग्रामीण वेणीराम पिता रूपराम बलाई ने पुलिस सहायता केंद्र (दलौदा) पर सूचना दी थी कि ग्राम एलची के पास हथियारबंद चार बदमाशों ने उसे लूट लिया और कपड़े उतारकर कुएं में उतार दिया।
इसके बाद एक अन्य ग्रामीण भी पुलिस के पास पहुंचा। उसे भी उन्हीं बदमाशों ने इस तरीके से ही लूटा था। सूचना मिलने के बाद श्री सूदन ने बल के साथ भानगढ़ के पास बदमाशों की घेराबंदी की, तो बदमाश जंगल की ओर भागे। इस पर उन्होंने एक ग्रामीण रायसिंह बागरी को साथ लिया और बदमाशों का पीछा कर समर्पण के लिए कहा लेकिन उन्होंने हमला कर दिया।
श्री सूदन के पास सर्विस रिवाल्वर नहीं थी इसलिए उन्होंने पत्थर फेंके। इस बीच एक बदमाश ने 12 बोर की बंदूक से उन्हें गोली मार दी। गोली के ढेरों र्छे उनके बायीं भुजा, पेट, कमर, सीने में लगे। बदमाश बंदूक में दूसरा कारतूस भर रहा था तभी श्री सूदन ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर श्री सूदन ने ग्रामीणों के साथ एक दल अन्य साथियों की धरपकड़ के लिए भेजा।
उधर, श्री सूदन को जिला अस्पताल मंदसौर ले जाया जहां प्राथमिक चिकित्सा में उनके शरीर से 20 र्छे निकाले गए। फिर एमवाय अस्पताल रैफर किया। वहां भी 20 से ज्यादा र्छे निकाले गए। इसके बाद अब तक के हुए इलाज में लगभग इतने ही र्छे निकाले जा चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बाकी र्छे निकालने के लिए सीएचएल अपोलो अस्पताल में इलाज कराया।
25 जुलाई 2008 को मिली एक्सरे रिपोर्ट के मामले में डॉ. मनीष लोढ़ा (रेडियोलॉजिस्ट) ने बताया उनके शरीर में अभी भी 111 र्छे हैं जो स्पष्ट दिखते हैं। ये र्छे भुजा, पेट, कमर, रीढ़ की हड्डी में इतने अंदर हैं कि यदि उन्हें ऑपरेशन कर निकालने का प्रयास किया तो शरीर की मांसपेशियां और नसों को नुकसान होगा। इसके साथ ही गंभीर परेशानियां भी होंगी जिससे चलना-फिरना दूभर हो जाएगा। इसके चलते डॉक्टर्स रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं। इन छर्रो के कारण उन्हें लगातार पीड़ा होती है लेकिन वे दर्द निवारक दवा लेते हैं।
तीन बदमाशों को पकड़ थालान्बे समय से पुलिस सेवा में रहे टीआई श्री सूदन इसे अपनी उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि मुठभेड़ और घेराबंदी में तीन कुख्यात बदमाश राधेश्याम, गणपत व हाकम पकड़े गए। इनसे दो बंदूकें, गुप्ती व फरसा बरामद हुए।
कोर्ट ने इन्हें सात-सात साल का कठोर कारावास सुनाया। उनके इस अदम्य साहस के लिए वे राजपूत समाज, सिक्ख समाज, प्रेस क्लब, लायंस क्लब, ऑल इंडिया कौमी एकता कमेटी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। शरीर से 111 र्छे निकलने की उम्मीद छोड़ चुके श्री सूदन ने हाल ही में विश्व रिकॉर्ड के लिए गिनीज बुक और लिम्का बुक में प्रविष्ठि भेजी है। उन्हें वहां से जवाब आने का इंतजार है।संभार भास्कर

अब हाथ के इशारे से बदले जाएंगे टेलीविजन के चैनल


टीवी रिमोट को लेकर घरों में होने वाली लड़ाई आम बात है लेकिन अब वह दिन दूर नहीं जब लोग रिमोट को हाथ लगाए बिना टीवी के चैनल बदल सकेंगे।
कैम्ब्रिज की तोशिबा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिससे सिर्फ हाथ हिलाने से ही टीवी के चैनल बदले जा सकेंगे। गैस्चर रैकोगनिशन सिस्टम के तहत एक सॉफ्टवेयर टीवी में फिट कर दिया जाएगा और टीवी के साथ एक वैबकैम लगाया जाएगा।
यह वैबकैम हाथ के इशारों को समझकर टीवी कंट्रोल को भेजेगा जिससे टीवी के चैनल बदले जाएंगे। उदाहरण के तौर पर टीवी की ओर हाथ सीधा कर देने से टीवी का प्रसारण रुक जाएगा।
जैसे ही लोग टीवी वाले कमरे में पहुंचेंगे, वैसे ही यह सॉफ्टवेयर उन्हें पहचान कर उनका मनपसंद चैनल ऑन कर देगा।
इस सिस्टम का इस्तेमाल कम्पयूटर पर भी किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसकी यह प्रणाली रंग, आकार और हाथों के इशारे समझने में एकदम सटीक है। हालांकि कुछ मामलों में इशारे समझने में गलती हो सकती है।
ऐसा व्यक्ति के टीवी के सामने अंगड़ाई लेने या छींकने के मामले में हो सकता है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि वह इसका भी हल ढूंढ रहे हैं। उन्होंने इस सप्ताह बर्लिन में इस सिस्टम को पेश किया है। इसे अगले 5 साल तक बाजार में उतारा जाएगा।
ऐसी काम करेगी यह तकनीक
वैबकैम हाथों के इशारे समझकर डाटाबेस को भेजेगा, जो इसे आगे टीवी कंट्रोल को भेज देगा।
टीवी की आवाज कम करने के लिए हाथ नीचे करें।
टीवी का प्रसारण बंद करने के लिए हाथ ऊपर की ओर खड़ा करें।
चैनल बदलने के लिए हाथ आगे बढ़ाएं।

आठ साल की लड़की को चाहिए 50 साल के पति से तलाक


सउदी मीडिया की खबरों के अनुसार यहां एक आठ साल की लड़की ने अपने से 42 साल बड़े पति से तलाक के लिए सउदी कोर्ट में गुहार लगाई है। उसके पति की उम्र 50 साल बताई जा रहीं है और इस निकाह के लिए उसका अपना पिता जिम्मेदार है जिसकी मर्जी से यह विवाह हुआ है।
बताया जा रहा है कि इस लड़की के पिता ने बिना लड़की को जानकारीं दिए बगैर उसका निकाह ५क् साल के एक व्यक्ति से करा दिया है जिसके बाद इस लड़की ने इस प्रकार का कदम उठाया है।
मां ने बेटी के हक में उठाई आवाज
स्थानिय समाचार पत्रों की खबर के अनुसार लड़की की मां ने अपनी बेटी के हक में आवाज उठाते हुए स्थानिय कोर्ट में लड़की की तरफ से तलाक के लिए आवाज उठाई है। लड़की ने अभी चौथा ग्रेड पास किया है और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि इस परिवार के कुछ सदस्यों ने लड़की के पिता के खिलाफ सउदी मानवअधिकार कमेटी में भी शिकायत की है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ऐसा ही एक मामला यमन की कोर्ट में आया था जब एक आठ साल की लड़की ने अपने २८ साल के पति से तलाक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और अंत में अदालत ने उसके हक में फैसला सुनाया।

पृथ्वी को निगल लेगा ब्लैक होल!


अगले बुधवार यानी दस सितंबर को फ्रांस-स्विस सीमा के पास जमीन से 300 फीट नीचे दुनिया का सबसे खर्चीला और शक्तिशाली वैज्ञानिक परीक्षण होने जा रहा है।
जहां एक ओर पांच हजार से भी ज्यादा साइंटिस्ट इस महापरीक्षण की तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं कई वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे ब्लैक होल पैदा होंगे जो पृथ्वी को निगल जाएंगे
सुपर एक्सपेरिमेंट
वैज्ञानिक धरती से 300 फीट नीचे ‘द लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ (एलएचसी) नामक 17 मील लंबी एक मशीन के जरिये बिग-बैंग व ब्रम्हांड के पैदा होने की स्थिति को लैब में जीवंत करना चाहते हैं। दस सितंबर को जब यह परीक्षण शुरू होगा तो अणु विध्वंसक एक तरह से टाइम मशीन बन जाएगा जिससे यह पता चलेगा कि 14 अरब साल पहले जब ब्रम्हांड अस्तित्व में आया था तब क्या हुआ था। जब वैज्ञानिक ‘बिग बैंग’ यानी ब्रम्हांड के अस्तित्व में आने के एक सेकंड के एक अरबवें हिस्से के बाद जैसे हालात पैदा करेंगे तो पदार्थ के नए-नए अंशों और ब्रांड के नए आयामों का पता चल सकेगा। इस एक्सपेरिमेंट पर 4.4 अरब पौंड खर्च हुए हैं।
क्या है डर
इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे करोड़ों सूक्ष्म ब्लैक होल पैदा होंगे जो पृथ्वी को निगल सकते हैं। इसे रोकने के लिए यूरोप की मानवाधिकार कोर्ट में अपील दायर की गई है। उन्हें डर है कि लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर परीक्षण अज्ञात के साथ खिलवाड़ करना और मानव-प्रजाति व पृथ्वी को जोखिम में डालना है।
दूसरी ओर परीक्षण करने जा रहे यूरोपियन न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर का कहना है कि यह डर बे-मायने है, नन्हे ब्लैक होल्स पैदा होते ही गायब हो जाएंगे। जबकि इसके विरोधियों का कहना है कि वैज्ञानिक ईश्वर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ब्लैक होल्स गायब हो जाएंगे। ये तेजी से बढ़कर पृथ्वी को हजम कर सकते हैं।
इन सवालों के मिलेंगे जवाब
आधुनिक फिजिक्स की आधारशिला सही है या गलत?
ब्रम्हांड के जन्म के वक्त क्या मौजूद था?
कुछ पदार्थो का द्रव्यमान क्यों नहीं होता?
डार्क मैटर की नेचर क्या है?
क्या अंतरिक्ष का कोई ऐसा आयाम है जो अब भी हमारी पहुंच से बाहर है? संभार भास्कर

'भारत के ख़िलाफ़ लड़ाई की तैयारी'



'भारत के ख़िलाफ़ लड़ाई की तैयारी'

ओबामा पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं
बराक ओबामा ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि पाकिस्तान अमरीका से मिलने वाली आर्थिक सहायता का इस्तेमाल भारत के खिलाफ़ लड़ाई की तैयारी में कर रहा है.
अमरीका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेट उम्मीदवार बराक ओबामा ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए मिलने वाली सहायता राशि का इस्तेमाल "भारत के विरुद्ध अपनी सेना को मज़बूत करने में कर रहा है".
ओबामा ने कहा कि वे अगर राष्ट्रपति चुन लिए गए तो अमरीका की ओर से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता का हिसाब लेंगे.
उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाएँगे कि वह अफ़ग़ानिस्तान से लगने वाली सीमा पर आतंकवादियों की शरणस्थली को समाप्त करने के लिए सख़्त कार्रवाई करे.
पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए मिलने वाली सहायता राशि का इस्तेमाल भारत के विरुद्ध अपनी सेना को मज़बूत करने में कर रहा है

बराक ओबामा, फॉक्स टीवी पर
फॉक्स न्यूज़ को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें अफ़ग़ानिस्तान से अपनी निगाह नहीं हटाना चाहिए और पाकिस्तानियों पर अधिक दबाव डालना चाहिए."
ओबामा ने कहा है कि अमरीका पाकिस्तान को बिना पर्याप्त नियंत्रण और ज़िम्मेदारी के आर्थिक सहायता दे रहा है.
उन्होंने कहा कि वे ओसामा बिन लादेन की तलाश में कोई कसर नहीं उठा रखेंगे और "नरक के दरवाज़े तक" पीछा नहीं छोड़ेंगे.
शिकोगा के सीनेटर का कहना था कि ओसामा को पकड़ने के लिए अमरीकी थल सैनिकों को पाकिस्तान में उतारने की कोई ज़रूरत नहीं है.
ओबामा ने ज़ोर देकर कहा कि उनके बयान का मतलब यह नहीं है कि वे 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में कोई कसर छोड़ेंगे, पाकिस्तान की सहायता कम या बंद कर देंगे.
डेमोक्रेट उम्मीदवार ने टीवी इंटरव्यू में कहा, "देखिए, हम ये कह रहे हैं कि पाकिस्तान को हम अतिरिक्त सैनिक सहायता देंगे जिसका उद्देश्य आतंकवादियों से निबटना होगा, हम पाकिस्तान में लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में समर्थन देंगे."
उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा, "हमने मुशर्रफ़ को बिना किसी जवाबदेही के दस अरब डॉलर दिए जो सरासर बर्बादी थी क्योंकि आतंकवादियों के ठिकानों को बर्बाद करने की शर्त नहीं रखी गई थी." संभार फोक टीवी

Friday, September 5, 2008

सेक्सी जासूसों के राज खोलेगी किताब



जेम्स बाँड जैसे काल्पनिक जासूसों की तरह प्रसिद्ध जासूस रोआल्ड डाल के बारे में जानकारी देने वाली एक पुस्तक सामने आई है। डाल ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका में ब्रिटेन के लिए जासूसी की थी। नई किताब के अनुसार बच्चों के लिए बेस्ट सेलर पुस्तकें लिखने वाले डाल ने लेखक बनने से पहले अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तट में कई महिलाओं से अंतरंग संबंध कायम किए। जल्द ही प्रकाशित होने वाली किताब में दावा किया गया है कि डाल के आकर्षण जाल में आने वालों में स्टैंडर्ड ऑइल फार्च्यून कंपनी की उत्तराधिकारी मिलिसेंट रोजर्स और टाइम पत्रिका के प्रकाशक तथा कांग्रेस सदस्य क्लेयर बूदे ल्यूस भी शामिल थीं। 'द संडे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार बेस्ट सेलर क्लासिक किताबों 'द टिव्ट्स' और 'चार्ली एंड द चाकलेट फैक्टरी' के लेखक डाल ने राष्ट्रपति एफडी रूजवेल्ट की पत्नी इलिनर के साथ भी दोस्ती की थी और वह हमेशा व्हाइट हाउस में आता-जाता था। एक अमेरिकी पत्रकार जेनेट कोनांट ने 'द इररेगुलर्स' में लिखा है डाल के ऊपर के अधिकारी तो उसके प्रसंगों पर नजर रखते थे। जब इसमें कुछ अच्छे उद्देश्य होते तो उसमें माफी योग्य गलती की संभावना जरूर होती थी। प्रकाशित होने वाली किताब में कोनांट ने इस ब्रिटिश जासूस के यौन जीवन के बारे में अपने दावों की पुष्टि के लिए डाल की घनिष्ठतम मित्र चार्ल्स मार्श की बेटी अंटोनिए मार्श हास्केल के वक्तव्य लिए हैं। हास्केल के अनुसार लड़कियाँ डाल के पैरों पर गिरती थीं। उनके लिए महिलाओं की कतार लगी रहती थी। पश्चिम एशिया में रॉयल एयर फोर्स में प्रशिक्षण के दौरान घायल होने के बाद डाल को वॉशिंगटन स्थित ब्रिटिश दूतावास में एक अंडरकवर एजेंट के रूप में भेजा गया था। उसने गोपनीय नामों और पासवर्ड के साथ पूरे विश्व में काम किया। सन् 1943 में उनके लेखन की प्रतिभा सामने आई। 1990 में उनकी मौत हो गई।

सही निकली जगूडी की भविष्यवाणी

लोकतंत्र के पाखंड पर प्रहार करने वाले एवं व्यवस्था को तार-तार करने वाले कवि धूमिल जब स्थापित नहीं हुए थे तो उनके एक मित्र कवि ने उन्हें तुलसीदास और गालिब के बाद शब्दों को सही ढंग से पकड़ने वाला कवि बताया था।यह भविष्यवाणी साहित्य अकादमी से पुरस्कार प्राप्त कवि लीलाधर जगूडी ने आज से करीब 40 साल पहले लखनऊ से प्रकाशित पत्रिका 'आरंभ' के संपादक विनोद भारद्वाज को लिखे पत्र में की थी। उस समय धूमिल हिन्दी कविता में अपनी पहचान बना रहे थे और जगूडी भी धीरे-धीरे स्थापित हो रहे थे। बाद में दोनों कवियों को साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला।सर्वश्री राजकमल चौधरी, धूमिल, श्रीकांत वर्मा, रघुवीर सहाय, इन्द्रनाथ मदान, कुँवर नारायण से लेकर अशोक वाजपेयी, दूधनाथ सिंह और काशीनाथ सिंह जैसे करीब पचास लेखकों के ऐतिहासिक पत्र 'आरंभ की दुनिया' नामक पुस्तक में छपे हैं, जो भारद्वाज को तब लिखे गए थे।किसी एक पत्रिका के प्रकाशन के सिलसिले में लेखकों द्वारा संपादकों को लिखे गए पत्रों की हिन्दी में यह पहली किताब है, जिसका लोकार्पण शुक्रवार को हिन्दी के प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह कर रहे हैं।1967 में निकली इस पत्रिका के कुल छह अंक निकले थे, जिसके तीसरे अंक में धूमिल की चर्चित कविता मोचीराम भी छपी थी। धूमिल ने श्री भारद्वाज को कुल 28 पत्र लिखे थे, जिनमें उन्होंने अपनी नौकरी से परेशान होने की व्यथा भी लिखी थी।'दिनमान' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में पत्रकार रहे भारद्वाज ने 19 वर्ष की आयु में यह पत्रिका निकाली थी, जिसमें राजकमल चौधरी के प्रसंग अकविता को लेकर बहस भी चली थी। पत्रिका में राजकमल चौधरी के निधन पर धूमिल की एक कविता का अंश भी छपा था।धूमिल ने भारद्वाज को लिखे पत्र में अपनी नौकरी की व्यथा व्यक्त करते हुए लिखा था कि यह नौकरी कविता के लिए खाना देने वाले आदमी को खा रही है। मैं किसी बैल की तरह इस रस्सी को खोलकर एक झटके से अलग कर देना चाहता हूँ। ओह बैल लिखते ही मुझे अपने दरवाजे पर खूँटे से बँधे उस बैल की याद आती है जो अपने पगहे को दाँत से खोलना सीख गया था।धूमिल की कविता में भी इस मुक्ति की तड़प है और वह आजादी को व्यापक अर्थों में देखना चाहते थे, जिसकी अभिव्यक्ति 'संसद से सड़क तक' और 'कल सुनना मुझे' नामक उनके संग्रहों में व्यक्त हुई थी। संभार वार्ता

हथियारों की होड़ पर भारत का स्पष्टीकरण



हथियारों की होड़ पर भारत का स्पष्टीकरण


भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की दूसरा दिन की बैठक शुरू हो गई है. पहले दिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया था.
हालाँकि अमरीका ने उम्मीद जताई थी कि एनएसजी के सदस्य देश इसे मंज़ूरी दे देंगे. न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की हरी झंडी मिलने के बाद ही भारत-अमरीका परमाणु समझौता आगे बढ़ पाएगा.
शुक्रवार को भारत ने एनएसजी के सदस्य देशों की शंकाओं पर बयान देते हुए कहा है कि भारत हथियारों की होड़ में शामिल नहीं होगा.
एनएसजी के कुछ सदस्य देशों को इस पर आपत्ति है कि भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है और ऐसी स्थिति में वे भारत पर कैसे भरोसा कर लें.
प्रतिबद्धता
लेकिन भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक को लेकर प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि भारत किसी भी हथियार की होड़ में शामिल नहीं होगा और न ही किसी को संवेदनशील परमाणु तकनीक ही देगा.
हम किसी भी हथियारों की होड़ में शामिल नहीं हैं. हम परमाणु हथियारों को पहले इस्तेमाल न करने की अपनी नीति पर भी क़ायम हैं

प्रणव मुखर्जी
उन्होंने कहा, "हम किसी भी हथियारों की होड़ में शामिल नहीं हैं. हम परमाणु हथियारों को पहले इस्तेमाल न करने की अपनी नीति पर भी क़ायम हैं."
गुरुवार को विएना में एनएसजी के सदस्य देशों की बैठक शुरू हुई थी. लेकिन पहले दिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया था. अमरीका एनएसजी से परमाणु समझौते पर हरी झंडी लेना चाहता है ताकि वह इसे मंज़ूरी के लिए संसद के सामने रख सके.
लेकिन ऑस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड, आयरलैंड, न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे को इस बात की चिंता है इस समझौते के लिए नीतियों में बदलाव क्यों किया जाए और इससे ग़लत उदाहरण पेश होगा. संभार बीबीसी

पश्चिमी देशों को गरीब मानती थीं मदर टेरेसा


पाँच सितंबर को पुण्यतिथि पर विशेष ..........................................................................................पीड़ितमानवता की सेवा को अपना सर्वोपरि धर्म मानने वाली मदर टेरेसा दुनिया के गरीब मुल्कों से भी ज्यादा पश्चिमी देशों को गरीब मानती थी और उनके अनुसार इन संपन्न देशों की गरीबी हटाना ज्यादा मुश्किल है।मदर टेरेसा के अनुसार भूखे को भरपेट भोजन, वस्त्र और आवास देकर संतुष्ट किया जा सकता है, लेकिन उपेक्षा, अकेलापन, असहाय जैसी भावनाओं से रूबरू होने वाले पश्चिम के संपन्न समाज की गरीबी दूर करना बेहद कठिन काम है। अकेलेपन और उपेक्षित होने की भावना को अत्यंत भयानक गरीबी मानने वाली मदर टेरेसा धर्म से कैथोलिक थीं और एक सच्ची ईसाई की तरह उन्होंने मनुष्य सेवा को ही प्रभु सेवा बना लिया था।उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को मकदूनिया में हुआ और उनका परिवार अल्बानिया मूल का था। बचपन से ही एगनेस गोनक्शा बोजाशियो (मदर टेरेसा का मूल नाम) ईसाई मिशनरियों के जीवनगाथाओं से प्रभावित थीं।सपने बुनने वाली किशोरावस्था के दौर में मदर टेरेसा के मन में कुछ अलग ही सपना पल रहा था और 12 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपना जीवन धर्म के नाम करने का संकल्प कर लिया। धर्म की राह पर चलने का उनका यह संकल्प आने वाले सालों में और सुदृढ़ होता गया तथा अंतत: 18 साल की उम्र में वह सिस्टर्स ऑफ लॉरेटो में मिशनरी के रूप में शामिल हो गईं।सिस्टर्स ऑफ लॉरेटो में आने के बाद मदर टेरेसा को अंग्रेजी भाषा सीखने के लिए आयरलैंड जाना पड़ा। मदर टेरेसा ने अपनी कर्मभूमि भारत में 1929 में कदम रखा और शुरू में वे दार्जिलिंग में बच्चों को पढ़ाने का काम करती रहीं। उन्होंने 24 मई 1931 को नन के रूप में धार्मिक शपथ ली।मदर टेरेसा ने 1931 से 1948 के बीच कोलकाता के सेंट मैरी स्कूल में शिक्षण का काम किया लेकिन उनका भावुक मन इस दौरान विद्यालय परिसर के बाहर हो रही घटनाओं को लेकर बुरी तरह पीड़ित होता रहा, जिनमें 1943 का अकाल और 1946 के सांप्रदायिक दंगे शामिल हैं।पीड़ित मानवता की पुकार को मदर टेरेसा अधिक देर तक अनसुनी नहीं कर पाईं और अंतत: 1948 से उन्होंने समाजसेवा और मलिन बस्तियों के बच्चों और बेसहारा लोगों की सेवा का काम शुरू कर दिया।इस संबंध में उन्होंने अपनी डायरी में लिखा आपको केवल दुनिया से कहना भर है सब चीजें फिर से आपकी हो जाएँगी। प्रलोभन लगातार आवाज दे रहे थे, मुक्त निर्णय से मेरे प्रभु और आपके, मनुष्य प्रेम, प्यार के कारण मैं सिर्फ वही आकांक्षा करूँगी और वही काम करूँगी जो इस संबंध में परम पवित्र की इच्छा हो। मैं एक भी आँसू गिरने नहीं दूँगी।मदर टेरेसा को 7 अक्टूबर 1950 को वेटिकन से मिशनरीज ऑफ चैरिटी नामक अपनी संगत शुरू करने की इजाजत मिल गई। कलकत्ता में मात्र 13 सदस्यों के साथ शुरू की गई इस संस्था के आज दुनियाभर में करीब 10 लाख से अधिक कार्यकर्ता हैं।मदर टेरेसा ने 1952 में मृत्यु के कगार पर खड़े रोगियों की देखभाल और मृत्यु के बाद उनका सम्मानजनक ढंग से अंतिम संस्कार करने के लिए 'निर्मल हृदय' नामक केन्द्र खोला। इसी प्रकार 1955 में उन्होंने बेसहारा और अनाथ बच्चों के लिए 'निर्मल शिशु' सदन खोला।उन्हें पीड़ित मानवता की सेवा के लिए 1979 में 'नोबेल' पुरस्कार तथा 1980 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'भारत रत्न' प्रदान किया गया। मदर टेरेसा की स्वास्थ्य की खराबी का दौर 1983 से ही शुरू हो गया था जब रोम में पहली बार उन्हें दिल का दौरा पड़ा था लेकिन उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा में कभी भी अपने स्वास्थ्य को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 13 मार्च 1997 को मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रमुख पद को त्यागा और इसके कुछ ही महीनों बाद 5 सितंबर 1997 को संक्षिप्त बीमारी के बाद उनकी देह शांत हो गई।निधन के बाद 19 अक्टूबर 2003 में रोम के कैथोलिक चर्च ने उन्हें धन्य घोषित करते मदर ब्लेस्ड की उपाधि दी। वर्ष 2002 में पश्चिम बंगाल की महिला मोनिका बेसरा ने दावा किया था कि मदर टेरेसा के चित्र वाला लॉकेट पहनने के कारण उसका ट्यूमर दूर हो गया। चमत्कार की इसी घटना के कारण उन्हें धन्य घोषित किया गया। कैथोलिक चर्च के नियमों के अनुसार मदर टेरेसा को संत घोषित करने के लिए इसी प्रकार के एक और चमत्कार की घटना की जरूरत है। चर्च अपने रीति-रिवाजों के कारण भले ही मदर टेरेसा को चाहे जब संत घोषित करे, लेकिन भारत ही नहीं दुनियाभर में उनके प्रशंसक उन्हें संत की तरह प्यार और सम्मान करते हैं। संभार वार्ता

बदल गया शिक्षक दिवस मनाने का तरीका


भारतीय संस्कृति में गुरु यानी शिक्षक के महत्व को कुछ इस प्रकार बताया गया है, लेकिन समय के साथ रफ्तार पकड़ते भौतिकवाद से शिक्षक दिवस भी अछूता नहीं रह गया है और पब्लिक स्कूलों से लेकर आम सरकारी स्कूलों तक के बच्चों में अपने अध्यापक को ग्रीटिंग देने की होड़ मची है।शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर स्कूल से घर पहुँचते ही पूर्वी दिल्ली के एक नर्सरी स्कूल में पढ़ने जाने वाले पाँच साल के शौर्य ने अपने माता-पिता से अगली सुबह अपनी शिक्षिका को देने के लिए ग्रीटिंग कार्ड की माँग की। यह पूछने पर कि वह क्यों अपनी मैम को ग्रीटिंग कार्ड देना चाहता है तो उसने तपाक से कहा कि कल 'टीचर्स डे' है।अपने बच्चे की माँग के बारे में पूछे जाने पर बैंक में काम करने वाले उसके माता-पिता संजय और मनीषा ने कहा कि उसकी माँग पूरी करनी ही होगी। इसके साथ ही उन्होंने खिन्नता प्रकट करते हुए कहा कि हर कुछ दिन के बाद स्कूल में कोई न कोई इस तरह की चीज हो जाती है, जिसके लिए उन्हें अलग से समय निकाल कर बच्चे को सामान दिलाना पड़ता है।भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मनाए जाने की भी एक दिलचस्प कहानी है। देश का दूसरा राष्ट्रपति बनने के बाद जब सर्वपल्ली राधाकृष्णन से उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने के बारे में पूछा तो भारतीय दर्शन के इस विद्वान ने कहा कि मेरा जन्मदिन मनाने की बजाए यह ज्यादा सम्मानजनक होगा यदि 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। तभी से देश में राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संभार वेब दुनिया

एशियाई अरबपतियों में छह भारतीय





एशिया में 40 वर्ष से कम उम्र के 15 अरबपतियों की फोर्ब्स की सूची में रैनबैक्सी के प्रवर्तक परिवार के मलविन्दर एवं शिविन्दरसिंह सुजलान के गिरीश तांती और इंडियाबुल्स के समीर गहलौत सहित 6 भारतीयों ने जगह बनाई है।फोर्ब्स ने कहा पिछले साल देश के अरबपतियों की तादाद में 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बढ़कर 53 पर पहुँच गई। अरबपतियों की बढ़ती संख्या के मामले में भारत ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। पंद्रह अरबपतियों की सूची में शामिल अन्य भारतीयों में रीयल एस्टेट कंपनी ओबेराय कंस्ट्रक्शंस के विकास ओबेराय और ऑनलाइन गैंबलिंग कंपनी 'पार्टीगेमिंग' के संस्थापक अनुराग दीक्षित हैं। सूची में छह भारतीय अरबपतियों का कुल नेटवर्थ 8.3 अरब डॉलर है।सूची में आठ अरबपतियों के साथ चीन पहले पायदान पर है और इन अरबपतियों का कुल नेटवर्थ बीस अरब डॉलर है, जबकि दक्षिण कोरिया और हांगकांग के एक-एक अरबपति सूची में शामिल हैं। फोर्ब्स ने एक ही परिवार के मलविन्दर एवं शिविन्दर को एक ही रैंक में रखा है।युवा अरबपतियों की सूची में शामिल भारतीयों में मलविन्दर और शिविन्दर सिंह का नेटवर्थ 2.5 अरब डॉलर है। दोनों भाई दवा बनाने वाली कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज का संचालन करते हैं। हालाँकि इस साल की शुरुआत में यह कंपनी जापान की दाईची को बेच दी गई।कंपनी बिकने के बावजूद मलविन्दर रैनबैक्सी के सीईओ बने हुए हैं, जबकि शिविन्दर भारतीय हास्पिटैलिटी चेन फोर्टिस हेल्थकेयर चलाते हैं। दूसरी ओर विकास ओबेराय 1.7 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ दूसरे सबसे युवा भारतीय अरबपति हैं। वर्ष 1998 में उन्होंने ओबेराय कंस्ट्रक्शंस की कमान अपने हाथ में ली थी। इस कंपनी की स्थापना ओबेराय के पिता रणवीर ने की थी।

संभार वार्ता

'मृत पिता' को देखा टेलीविजन पर




ब्रिटेन के एक व्यक्ति ने पाँच साल बाद जब अपने पिता को एक टेलीविजन शो में देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा, क्योंकि वह तो खुद अपने पिता का अंतिम संस्कार कर चुका था।जॉन रेनीहन के पिता जॉन डेलैनी वर्ष 2000 में लापता हो गए थे। जनवरी 2003 में पुलिस को एक क्षत-विक्षत शव मिला, जिस पर ठीक वैसे ही कपड़े थे जैसे कि लापता होने के समय रेनीहन के पिता ने पहन रखे थे।रेनीहन ने इस शव की पहचान अपने पिता के रूप में की और उसका अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन उसका 71 वर्षीय असली पिता नजदीक के ही एक देखभाल केंद्र में था।वह 2000 में बेसहारा हालत में घूमता पाया गया था, जो मस्तिष्क में चोट के बाद याददाश्त खो बैठा। इसके चलते वह अपनी पहचान बताने में असमर्थ हो गया। देखभाल केंद्र के कर्मियों ने उसे एक नया नाम डेविड हैरीसन दे दिया।उसे टेलीविजन पर दिखाकर लोगों से अपील की गई कि वे उसकी पहचान करने और उसे उसके घर पहुँचाने में मदद करें। 42 वर्षीय रेनीहन भी यह कार्यक्रम देख रहा था और टेलीविजन पर अपने पिता को देखकर वह हैरान रह गया। मैनचेस्टर पुलिस ने जब डीएनए परीक्षण कराया तो इस बात की पुष्टि हो गई कि डेलैनी और रेनीहन पिता-पुत्र हैं।पुलिस ने अब उस व्यक्ति की पहचान का काम शुरू कर दिया है जिसे डेलैनी समझकर 2003 में दफना दिया गया था। पुलिस ने पहचान के मामले में हुई अपनी गलती भी स्वीकार कर ली है। संभार वार्ता

दोगुनी हो जाएगी बाल वधुओं की संख्या


गरीब देशों में 18 साल की उम्र से पहले ही विवाह के बंधन में बाँध दी जाने वाली लड़कियों की संख्या अगले दो दशकों में दोगुनी होकर 10 करोड़ हो जाएगी। इनमें से ज्यादातर पर एड्स का खतरा भी गहरा जाएगा।एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में खाद्यान्न की बढ़ती किल्लत से हालात और खराब हो रहे हैं, क्योंकि इसकी वजह से लोग अपने परिवार पर बोझ को कम करने के लिए अपनी बेटियों की जल्द शादी कर देते हैं।इन लड़कियों को समय से पहले विवाह का खासा खामियाजा भुगतना पड़ता है। उनकी शिक्षा बीच में ही छूट जाती है और शरीर का समुचित विकास नहीं होने के कारण अनेक लड़कियाँ तो बच्चे को जन्म देते वक्त मर भी जाती हैं।अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उम्र में गर्भधारण और बच्चे को जन्म देने के समय मुश्किलें होना आम बात है। इससे मृत्युदर तथा नवजात शिशु मृत्यु दर बढ़ने तथा जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ जाता है।एक अनुमान के अनुसार दुनिया में 3500 लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही कर दी जाती हैं। इसके साथ 21 हजार लड़कियाँ, 18 वर्ष की होने से पहले ब्याह दी जाती हैं।अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उम्र में लड़कियों की शादी करने का सिलसिला हालाँकि पूरे विश्व में जारी है, मगर दक्षिण एशिया, मध्य अमेर‍िका और अफ्रीका के सहारा मरुस्थलीय इलाकों में ऐसी घटनाओं की संख्या काफी ज्यादा है।बांग्लादेश में बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा है। वहाँ 53 फीसदी लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले ही कर दी जाती है। नाइजर में 38 प्रतिशत लड़कियाँ 15 साल की आयु से पहले ही विवाह के बंधन में बाँध दी जाती है। इसके बाद चाड तथा इथोपिया और भारत की बारी आती है। संभार वार्ता

केट मॉस सबसे सेक्सी लिंगरी मॉडल


वेब पर कराए गए एक सर्वेक्षण की रपट की मानें तो कहा जा सकता है कि ब्रिटेन की सुपर मॉडल केट मॉस सर्वकालिक सर्वाधिक सेक्सी लिंगरी मॉडल हैं। केट ने यह खिताब हासिल करने के लिए 34 वर्षीया सुंदरी गायिका कैली मिनॉग को पीछे छोड़ दिया है। कैली इस सर्वेक्षण में दूसरे स्थान पर रहीं। इस सर्वेक्षण में तीसरा स्थान 35 वर्षीय डीटा वान टीज को मिला है, जिन्हें हाल ही विश्व की सर्वाधिक सेक्सी वॉंडरब्रा बेबी का सम्मान मिला है। सर्वेक्षण के बारे में समाचार देते हुए डेली स्टार ने कहा है कि जिन चार फिल्मों में केट ने अभिनय किया है वे ऐसे ड्रीम सीक्वेंस लगते हैं कि जिन्हें देखकर हर कोई केट का दीवाना हुए बिना नहीं रह सकता है। प्रतियोगिता में चौथा स्थान बीस वर्षीय मॉडल एलिस डेलाल का है जो कि जल्द ही एक लिंगरी फर्म के लिए प्रोमो फिल्म और फोटोशूट में हिस्सा लेंगी। उनके बाद एक और बीस वर्षीय सुंदरी लिली कोल का है, जिन्होंने हाल ही में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। वे हाल में कई स्थानों पर कैटवाक में भाग ले चुकी हैं। छठा स्थान कैथरीन बैली का है जो कि इस क्षेत्र की सबसे पुरानी मॉडल हैं। उनकी 46 वर्ष की आयु से उनके अनुभव का पता लगता है। उनके बाद 19 वर्षीय मॉडल डेजी लो 7वें, अभिनेत्री मैगी गिलेनहाल (30 वर्षीय) आठवें और ऑस्ट्रेलिया की तिया एकहार्ट को नौवाँ स्थान मिला है। दसवें स्थान की हकदार 27 वर्षीय फ्रांसीसी सुंदरी वाइना जियोंका हैं जो कि अंतिम स्थान पाने में कामयाब रहीं। संभार टुडे

मर्दों की आक्रामकता की वजह?


अकसर कहा जाता है कि औरतें किसी सजीले मर्द के मुकाबले ऐसे मर्दों को पसंद करती हैं, जो उन पर हावी हो सके। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि कुछ मर्द ज्यादा आक्रामक क्यों होते हैं? दरसअल यह बात जर और जोरू से जुड़ी है।हाल में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक महिलाओं को हासिल करने की लालसा और दौलत हासिल करने की भूख वे दो कारण हैं, जिनके चलते मर्दों में होड़ और बहादुरी की भावना आती है।एक अंतरराष्ट्रीय दल ने यह नतीजे उन विकासकारी शक्तियों के विश्लेषण के आधार पर तैयार किए हैं, जिनके चलते मर्दों में बहादुरी की भावना विकसित होती है। इसके चलते वे अपने साथियों से मुकाबला करते हैं। इस होड़ में सफल होने की संभावना सीधे तौर पर बहादुरी के प्रदर्शन से जुड़ी है। ब्रिटिश अखबार द डेली टेलीग्राफ के अनुसार स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के लारेंट लेहमैन और प्रोफेसर मार्क फेल्डमैन के नेतृत्व में एक दल ने विकासवादी जंग का गणितीय विश्लेषण किया, जो सभ्यता की पहुँच से दूर छोटे-छोटे समूहों पर आधारित थी। इसमें शिकारी जीवन जीने वाले समुदाय शामिल हैं।अध्ययन के नतीजों के अनुसार होड़ और बहादुरी से जुडे़ गुणसूत्रों का चुनिंदा दबाव बड़े आकार के समुदायों में भी साफ तौर पर देखा जा सकता है। चुनिंदा दबाव वह सीमा है, जिसे लोगों की एक आबादी या तो लाभकारी आनुवंशिकी या सांस्कृतिक गुण के लिए हासिल कर लेती है जिससे उसे फायदा मिलता है। इस फायदे के चलते उस समूह की उत्तरजीविता की दर बढ़ जाती है।अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार यह दबाव होड़ करने से मिलने वाले लाभ से भी संचालित होता है। यह दबाव एक समूह के बहादुर मर्दों ही नहीं, उनके परिवार के सदस्यों पर भी होता है। यही कारण है कि अकसर जंग का नुकसान बहादुर मर्दों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी उठाना पड़ता है।अध्ययन के मुताबिक शिकार करने वाले समुदायों के बारे में यह एक सुविख्यात तथ्य है कि वे अकसर दूसरे समुदायों पर हमले करते हैं और उनकी संपत्ति के साथ-साथ उनकी औरतों को भी हासिल कर लेते हैं। संभार टुडे

इस हाल के लिए भज्जी जिम्मेदार!


ऑस्ट्रेलियन मीडिया का मानना है कि आज सायमंड्स के साथ जो भी कुछ हो रहा है उसके पीछे कहीं ने कहीं सायमंड्स-भज्जी विवाद का बहुत बड़ा हाथ है। ऑस्ट्रेलियन अखबार ‘द एज’ की रिपोर्ट के मुताबिक भज्जी के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी के सायमंड्स के आरोप को कम करने में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) की भूमिका से वे अभी तक नाराज हैं और उन्होंने सीए को माफ नहीं किया है।
अखबार के मुताबिक भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हुए इस विवाद में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की पहल के कारण ही हरभजन सिंह नस्लभेदी टिप्पणी के आरोप से बच गए और उन्हें सजा भी कम मिली। सायमंड्स इस मामले को अभी तक पचा नहीं पाए हैं।
बीसीसीआई के आगे झुक गया था सीए:
द एज ने लिखा है कि भज्जी को इस मामले में मिली राहत से सायमंड्स नाराज थे। उन्होंने मान लिया था कि अधिकारियों ने उनसे पल्ला झाड़ लिया है और वे भारतीय क्रिकेट बोर्ड से अपने संबंधों को लेकर ज्यादा फिक्रमंद हैं न कि अपनों की रक्षा के लिए।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने मामले को हल करने की कोशिश की लेकिन सायमंड्स ने इससे इंकार कर दिया और इसका असर धीरे-धीरे टीम में उनकी प्रतिबद्धता पर भी पड़ने लगा।
द एज का कहना है कि अनुशासनहीनता के मामले में सायमंड्स को लेकर विवाद पहली बार नहीं हुआ है लेकिन हरभजन सिंह के साथ हुए विवाद और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की भूमिका ने उन्हें काफी प्रभावित किया है।संभार भास्कर

गणपति का आशीर्वाद लेने नहीं गए शाहरुख


सलीम खान के घर हर वर्ष डेढ़ दिन के लिए गणोशजी की स्थापना की जाती है। इन दो दिनों में उनके सभी दोस्त और रिश्तेदार घर आते हैं और गणपति का आशीर्वाद लेते हैं।
इस मौके पर आने वालों में शाहरुख खान भी एक प्रमुख शख्सियत होते थे, लेकिन इस बार उन्होंने यह नियम तोड़ दिया है। और, उसके मूल में है कैटरीना की बर्थडे पार्टी में हुआ विवाद।

सलमान के नजदीकी सूत्र ने बताया, शाहरुख सलमान में जब से दोस्ती हुई है, एसआरके हर वर्ष गणोशोत्सव के दौरान सलमान के घर आते थे और गणोशजी की पूजा कर आशीर्वाद लेते थे। यह सिलसिला बरसों से जारी था और शाहरुख तमाम व्यस्तताओं के बावजूद यह नियम नहीं तोड़ते थे।
इस वर्ष पहली बार शाहरुख उनके घर गणोशजी के दर्शन करने नहीं आए। शाहरुख से जुड़े सूत्र ने बताया, हालांकि शाहरुख गणोशजी के दर्शन को जाना चाहते थे, लेकिन विवाद के चलते और सलमान द्वारा खुले आम उनके साथ दोस्ती खत्म करने की बात करने से वह नहीं गए।
इस पर्व और सलीम खान के विश्वास का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गणोशजी का विसर्जन करने के लिए पूरा परिवार जाता है और सलमान इस दौरान दिल खोल कर नाचते भी हैं। यहां तक कि इन दो दिन सलमान हर तरह के ऐब से भी दूर रहते हैं।संभार भास्कर

जेनेलिया और रितेश की प्रेमकहानी


परदे के पीछे.आमिर खान की इमरान अभिनीत सफल फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ की नायिका जेनेलिया डिसूजा ने अपना कैरियर रितेश देशमुख के साथ ‘तुझे मेरी कसम’ से शुरू किया था और दक्षिण भारत की भाषाओं की अनेक फिल्में उसने की, परंतु असली स्टारडम उसे आमिर की फिल्म से ही मिला।
आजकल वह बोनी कपूर की अनीस बज्मी निर्देशित फिल्म में हरमन बावेजा के साथ काम कर रही हैं। फिल्म का नाम ‘इट्स माय लाइफ’ है। इसी कथा के तमिल और तेलुगु संस्करण के लिए जेनेलिया पुरस्कृत हुई हैं। रितेश देशमुख और जेनेलिया एक दूसरे के अंतरंग मित्र रहे हैं और इस प्रेम कहानी में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (रितेश के पिता) कतई अकबर की भूमिका नहीं करना चाहेंगे।
रितेश ने अब तक लगभग दो दर्जन फिल्मों में अभिनय किया है और कुछ फिल्में सफल भी रहीं, परंतु अभी तक उन्हें सितारा हैसियत नहीं मिली है। उन्होंने खुद को फूहड़ फिल्मों में फिजूलखर्च किया है। वह अमेरिका से भवन निर्माण शास्त्र सीखकर आया है परंतु उसके अपने फिल्म कैरियर का डिजाइन कल्पनाशील नहीं कहा जा सकता। उसने लड़की पात्र का स्वांग बड़ी विश्वसनीयता से निभाया है। अपनी प्रतिभा के परिमार्जन के प्रति उसका रवैया व्यावसायिक नहीं है।
उसकी प्रथम फिल्म की नायिका और अंतरंग मित्र जेनेलिया डिसूजा ज्यादा व्यवस्थित है और प्रथम श्रेणी के सितारा होने के सारे गुण उसके पास हैं। प्रिटी जिंटा, रानी मुखर्जी और ऐश्वर्या राय अब थकी और बासी लगने लगी हैं। कैटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा आज के मौसम की बहार हैं। इस बाजार में वक्त भागता है।
जेनेलिया की ताजगी केवल उम्र का तकाजा नहीं है वरन उसके पास प्रतिभा भी है, जो उसे लंबी पारी खेलने का अवसर दे सकती है। क्या सितारा हैसियत का अंतर और भविष्य के अवसरों का आकलन जेनेलिया और रितेश के प्रेम पर प्रभाव डाल सकता है! यह बात पैसे की नहीं है क्योंकि राजनीति में जितना पैसा है उतना फिल्मों में कभी हो नहीं सकता। आजकल सेलिब्रेटी हैसियत भी एक सिक्के में बदल गई है। नए समाज में नई रेटिंग्स चलती हैं।
अब अगर जेनेलिया किसी फिल्म का केंद्रीय पात्र है और रितेश उसमें जॉनी लीवरनुमा कॉमिक पात्र निभा रहे हैं, तो प्रेम पर प्रभाव पड़ सकता है। प्रेम की खातिर रितेश को जेनेलिया के साथ एक प्रेम कहानी पर फिल्म बनानी चाहिए। बॉक्स ऑफिस के तराजू पर वजन लगभग समान होने से ही बात बनती है।संभार भास्कर

14 की उम्र में ब्रिटनी ने किया था सैक्स


लॉस एंजिलस.पॉप गायिका ब्रिटनी स्पीयर्स ने 13 साल की उम्र में शराब पीना शुरू कर दिया था, 14 की उम्र में पहली बार अपने ब्वॉयफ्रैंड के साथ सैक्स किया और 15 की उम्र में वह ड्रग्स लेने लग गई थी।
यह कहना है ब्रिटनी की मां लिन स्पीयर्स का। लिन की किताब ‘थ्रू द स्टॉर्म’ की रिलीज से पहले हुए इस खुलासे से उनकी किताब की जबरदस्त बिक्री होने की उम्मीद तो है ही लेकिन इससे मां-बेटी के बीच दूरियां बढ़ जाएंगी, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अपनी बेटी को नियंत्रण में नहीं रख परई लिन लिन ने बताया कहा कि उन्हें बेहद अफसोस है कि वह अपनी बेटी को नियंत्रण में नहीं रख परई और उसकी बागडोर मैनेजर के हाथों में सौंप दी, नतीजतन एक गंदे वीडियो के जरिए दूसरों ने उसे नाजुक उम्र में ही सैक्सभोग की वस्तु बना दिया।
फुटबॉलर ब्वॉयफ्रैंड के साथ पहली बार सैक्स
उन्होंने बताया कि मिकी माउस क्लब छोड़ने के बाद ब्रिटनी ने केंटवुड के स्कूल में पढ़ाई की और इसी दौरान अपने फुटबॉलर ब्वॉयफ्रैंड के साथ पहली बार सैक्स किया।
उम्र के साथ बढ़ने लगी अय्याशियां :
इसके बाद जैसे-जैसे उसका करियर आगे बढ़ता गया, वैसे वैसे अय्याशियां भी बढ़ने लगीं। 16 साल की उम्र में उसकी मां ने उसे ब्वॉयफ्रैंड जस्टिन टिंबरलेक से यह सोचकर सैक्स करने की अनुमति दे दी कि जस्टिन से सच्च प्यार करती है लेकिन ऐसा कुछ नहीं था।
उस समय तो जस्टिन को यह पता नहीं था कि ब्रिटनी इससे पहले किसी और के साथ सैक्स कर चुकी है या नहीं। उसी दौरान ब्रिटनी को एक प्राइवेट जैट में कोकीन के साथ पकड़ा गया। कच्ची उम्र की ब्रिटनी तब शायद यह नहीं जानती थी कि मौज-मस्ती के चक्कर में वह अपनी जिंदगी को बर्बादी की डगर पर ला रही है।
बचपन में ठीक ढंग से नहीं हुई देखभाल
लिन का मानना है कि ब्रिटनी की वर्तमान समस्याएं बचपन में ठीक ढंग से उसकी देखभाल न हो पाने के कारण पैदा हुई है। लीन ने किताब में इस बात पर दुख जताया है कि ब्रिटनी पर उनका कंट्रोल नहीं रहा। लीन ने लिखा है, ‘मेरी बेटी बहुत जल्द बड़ी हो गई। उसकी हालिया परेशानी के पीछे भी सबकुछ जल्दी हासिल कर लेना ही रहा है।’ लीन की यह किताब 16 सितंबर को रिलीज होगी।संभार भास्कर

डेरामुखी की हत्या करना चाहते थे आतंकी


जालंधर.डेरा सच्च सौदा के मुखी बाबा गुरमीत राम रहीम की हत्या का ताना बाना बुनने वाले खालिस्तान कमांडो फोर्स के दो पूर्व कुख्यात आतंकी सीआईए स्टाफ की गिरफ्त में आ गए हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से पाकिस्तान से भेजी गई एके 47 व खतरनाक हथियार बरामद किए हैं।
इनमें से एक का नाम डीसी निवासी बिजलीवाल (बटाला) और दूसरे का नाम बिंदर निवासी पिंड मान (मुक्तसर) बताए जा रहे हैं।
पूछताछ प्रक्रिया में डीसी व बिंदर ने कहा कि वह दोनों मिलकर बाबा राम रहीम की हत्या करना चाहते थे,लेकिन अपने मकसद में सफल होने से पहले ही पकड़े गए। सीआईए स्टाफ के इंचार्ज अंग्रेज सिंह ने अपनी टीम के साथ अन्य आतंकियों को पकड़ने के लिए माझा में छापेमारी की है।
हाथ आई इतनी बड़ी सफलता को लेकर सीनियर पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि आईजी (जोनल) संजीव कालड़ा ने यह माना है कि जालंधर में आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के होने की सूचना मिली है और पुलिस उन्हे पकड़ने के लिए आपरेशन चला रही है।
.. तो कोई और मार देगा
आतंकी डीसी और बिंदर से उच्च स्तरीय टीम पूछताछ कर रही है। पूछताछ में वह बार-बार यही कह रहे है कि तो क्या हुआ हम बाबा राम रहीम को मार न सके , इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनके संगठन से जुड़े साथी बाबा को मारने में सफल हो जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने कुछ प्रमुख लोगों को मारने की बात भी कही। गौरतलब है कि पाक में शरण लेकर बैठे आंतकी संगठन के आकाओं की हिट लिस्ट में बाबा राम रहीम का नाम है।
जालंधर में आंतकी, एफआरआई दर्ज
थाना जालंधर छावनी में वीरवार को गुप्त सूचना पर जालंधर में आंतकी होने संबंधी एफआरआई दर्ज करवाई गई है। पुलिस ने कहा कि कुछ आंतकी बड़ी आतंकी वारदात की फिराक में शहर में आए हैं और वह छुपने के लिए ठिकाना ढूंढ रहे हैं। उनके पास घातक हथियार भी बताए गए हैं। इनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा-25 के तहत केस दर्ज किया गया है।
जेल में रची थी साजिश
आंतकी डीसी और बिंदर कुछ समय पहले ही हत्या के केस में जमानत पर आए थे। उन्हे जेल में ही बाबा राम रहीम को मारने के लिए तैयार किया गया था। सरहद पार से योजना के तहत हथियार भेजे गए। जमानत पर छूटने के बाद वह और उनके साथी बताई गई जगह से हथियार निकाल कर ले आए थे। वह मौके की तलाश में थे। डीसी और बिंदर आंतकबाद के काले दौर में केसीएफ से जुड़ गए थे। उन पर लगभग 8 केस दर्ज हुए थे। वह फिरोजपुर व अमृतसर जेल में रहे हैं।संभार भास्कर

असफल एकता कपूर


धारावाहिक की स्क्रिप्ट पर काम शुरु हो गया है और यह दीवाली के आसपास प्रसारित होगा। उल्लेखनीय है कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से एकता ने देश के साथ ही विदेशों में भी सफलता के झंडे गाड़े थे।
उसके बाद एकता ने जो भी काम हाथ में लिया, उन्हें कामयाबी मिलती गई। सफलता के मद में एकता ने एक के बाद एक शो बनाने शुरू किए और फिर वहीं हुआ, जो मास प्रोडक्ट बनाने से होता है। एकता लगातार असफल होती गईं।
स्मृति इरानी द्वारा तुलसी का किरदार छोड़ने के बाद एकता ने दूसरी तुलसी खड़ी की, जो असफल साबित हुई। एकता ने फिर स्मृति से सुलह कर ली और उन्हें फिर से तुलसी बनाया, लेकिन रबर की तरह खिंचते जा रहे ‘क्योंकि’ में इस बार वे भी असफल रहीं।
एकता ‘हम पांच’ सीरियल को नए सिरे से लेकर आईं, लेकिन यह पूरी तरह नाकाम रहा। उसके बाद एकता ने जोर-शोर से अपने पहले रियालिटी शो की घोषणा की, जो फुस्स साबित हुआ। ‘कौन जीते बॉलीवुड का टिकट’ शो के बारे में लोगों को ज्यादा कुछ पता नहीं है। इसके बाद एकता ने ‘महाभारत’ की शुरुआत की, लेकिन यह पहले एपिसोड से ही विवाद में रहा।
एकता ने इसे अपनी स्टाइल में भव्य बनाने की कोशिश की, लेकिन इसकी टीआरपी बढ़ ही नहीं रही है। सूत्र ने बताया कि लगातार मिल रही असफलता से एकता परेशान हैं और अब वे फिर से सास-बहू के चक्कर में आ रही हैं। बालाजी की तरफ से जल्द ही सास-बहू पर आधारित एक धारावाहिक बनाया जाने वाला है। फिलहाल धारावाहिक के स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है।संभार भास्कर

'विहिप को अस्थि यात्रा नहीं निकालने देंगे'


'विहिप को अस्थि यात्रा नहीं निकालने देंगे'

उड़ीसा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को राहत शिविरों की पुख़्ता सुरक्षा का भरोसा दिलाया है
उड़ीसा की नवीन पटनायक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता प्रवीण तोगड़िया को अस्थि यात्रा का आयोजन नहीं करने देगी.
उड़ीसा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा कि कंधमाल के दंगा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं.
उड़ीसा सरकार ने उनकी सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम के लिए केंद्र सरकार से सुरक्षा बलों की चार और बटालियनों की माँग की है.
सुप्रीम कोर्ट को उड़ीसा सरकार ने बताया कि हिंसा प्रभावित पूरे इलाक़े में धारा-144 लागू है.
एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के जवाब में उड़ीसा सरकार ने ये आश्वासन दिए हैं.
अदालत की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय खंडपीठ ने उड़ीसा सरकार के इस आश्वासन को दर्ज करते हुए उम्मीद जताई कि दंगा प्रभावित इलाक़ों और राहत शिविरों की सुरक्षा के समुचित उपाए किए जाएँगे.
अदालत अब इस मामले में अगली सुनवाई अब नौ सितंबर को करेगी.
याचिका दायर करने वाले कटक के आर्चबिशप रायफ़ेल चीनाथ के वकील चाहते थे कि विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया को अस्थिकलश यात्रा निकालने की अनुमति न दी जाए.
दंगा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं. उनके पुख्ता सुरक्षा इंतज़ाम के लिए उसे केंद्र सरकार से सुरक्षा बलों की चार और बटालियनें चाहिए

उड़ीसा सरकार
विश्व हिंदू परिषद ने घोषणा की है कि वह सात सितंबर से पूरे उड़ीसा में अस्थिकलश यात्रा निकालेगी.
कटक के आर्चबिशप रायफ़ेल चीनाथ ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रवीन तोगड़िया की अस्थि यात्रा पर प्रतिबंध लगाने और दंगा प्रभावित परिवारों की समुचित सुरक्षा व्यवस्था करने की माँग की थी.
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा सरकार को एक नोटिस जारी कर पूछा था कि प्रवीन तोगड़िया को अस्थिकलश यात्रा निकालने की अनुमति कैसे दी गई और दंगा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा सरकार से चौबीस घंटे के भीतर अपना जवाब दाख़िल करने को कहा था.
हिंसा
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में 23 अगस्त को अज्ञात लोगों ने एक आश्रम पर हमला कर दिया था. इसमें विश्व हिंदू परिषद के नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती समते पाँच लोगों की मौत हो गई थी.
इस हमले के बाद कंधमाल ज़िले के साथ-साथ कई ज़िलों में हिंसा भड़क उठी थी. जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी. इसमें ईसाइयों और उनके पूजा घरों को निशाना बनाया गया.
जिसके बाद से हज़ारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.
इस हिंसा की गूंज दुनिया भर में सुनाई पड़ी थी और कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धार्मिक नेता पोप ने भी इस पर चिंता ज़ाहिर की थी.
बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित कंधमाल ज़िले का दौरा कर स्थिति का जायज़ा लिया था.
संभार बीबीसी

पाकिस्तान ने अमरीका की आलोचना की

पाकिस्तान ने अमरीका की आलोचना की

अमरीकी सेना का कहना है कि उसे हमले की जानकारी नहीं है
पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीं से अपने इलाक़े में किए गए हमले के लिए अमरीका की आलोचना की है. इसमें 15 गाँव वाले मारे गए थे.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला दक्षिणी वज़ीरिस्तान के एक गाँव में हुआ.
अगर इसकी स्वतंत्र पुष्टि होती है तो यह पाकिस्तानी इलाक़े में विदेशी सैनिकों की पहली ज़मीनी कार्रवाई होगी.
गुरुवार को उत्तरी वज़ीरिस्तान में भी अमरीकी सैनिकों ने मिसाइल से हमला किया जिनमें पाँच लोग मारे गए.
पाकिस्तान का कहना है कि इस तरह के हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है.
दूसरी ओर अमरीकी और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) की सेना का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई सूचना नहीं है.
कमांडो कार्रवाई
हालाँकि ग़ैर आधिकारिक रुप से अमरीकी सेना के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीकी कमांडो ने बुधवार को पाकिस्तानी सीमा में अल क़ायदा के संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी की.
उनके मुताबिक इससे सीमापार चरमपंथी गतिविधियों को क़ाबू करने में इस क़दम से ठोस संकेत जाएंगे.
गुरुवार को हुआ हमला मीरानशाह के मोहम्मद खेल गाँव में हुआ. एक प्रत्यक्षदर्शी ने रॉयटर्स को बताया कि पायलट रहित विमान ने एक घर पर तीन मिसाइल दागे.
वहीं बुधवार को जो कार्रवाई हुई उसमें अमरीकी कमांडो को हेलिकॉप्टर से उतारा गया.
इस कार्रवाई में ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाई गईं और बम दागे गए. कुछ अधिकारियों के मुताबिक इसमें बीस लोग मारे गए हैं.संभार बीबीसी हिन्दी कॉम

Tuesday, September 2, 2008

ज़वाहिरी ने पाकिस्तानी सैनिकों को छकाया

ओसामा के बाद अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं अयमन अल ज़वाहिरी
अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता अयमन अल ज़वाहिरी को पकड़ने का अवसर पाकिस्तान की फ़ौज के हाथ से निकल गया है.
गृह मंत्रालय के प्रमुख रहमान मलिक ने कहा कि अफ़गानिस्तान की सीमा से सटे मोहमंद कबायली इलाक़े में एक स्थान पर ज़वाहिरी की पत्नी को देखा गया. इसके बाद सैनिकों ने वहाँ धावा बोला.
लेकिन जब पाकिस्तानी सैनिक वहाँ पहुँचे तो ज़वाहिरी दंपत्ति का कहीं अता-पता नहीं था.
पाकिस्तान और अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि देश का कबायली इलाका इस्लामी चरमपंथियों की शरणस्थली है.
हाल के सप्ताहों में पाकिस्तानी सैनिकों ने मोहमंद और बाजौड़ कबायली ज़िलों में चरमपंथियों के ठिकानों पर कई बार कार्रवाइयाँ की हैं.
ये दोनों ज़िले अफ़गानिस्तान के कुनड़ प्रांत के एकदम नज़दीक स्थित हैं. समझा जाता है कि ये ज़िले अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन, अयमन अल ज़वाहिरी समेत अन्य लड़ाकों के छुपने का सर्वाधिक संभावित स्थान है.
नज़दीकी संबंध
राजधानी इस्लामाबाद में मलिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, '' हमने एक स्थान पर उसे (ज़वाहिरी) खोज निकाला था, लेकिन हमनें अवसर गवां दिया. ''
उन्होंने कहा, '' वह मोहमंद में आता जाता है. कभी कभी कुनड़ और अधिकतर पक़्तिया में आता है. ''
मलिक ने यह नहीं बताया ज़वाहिरी की पत्नी को किस दिन देखा गया था.
गृह मंत्रालय के प्रमुख मलिक ने यह भी कहा कि आतंकवादी समूहों साझा सगंठन तहरीक-ए-तालेबान पाकिस्तान (टीटीपी) संगठन, ''अल कायदा का विस्तार है.''
मलिक ने कहा,'' हमारे पास कुछ ऐसे प्रमाण हैं कि अल क़ायदा और टीटीपी में नजदीकी संबंध और समानताएं हैं। संभार बीबीसी हिन्दी कॉम
उन्होंने कहा, '' टीटीपी अलक़ायदा की मेज़बानी करता है और वह उनका मुखपत्र है. ''
ज़वाहिरी मिस्र के नागरिक हैं और पेशे से डॉक्टर रहे हैं. उन्हें ओसामा बिन लादेन का सबसे निकट सहयोगी माना जाता है.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका पर 11 सितंबर वर्ष 2001 में हुए हमले के पीछे ज़वाहिरी की योजना थी.
अमरीकी सरकार ने वर्ष 2001 में जिन 22 '' मोस्ट वांटेड '' आतंकवादियों की सूची जारी की थी, उसमें ज़वाहिरी का दूसरा स्थान है और उसके सिर पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम भी है.
ज़वाहिरी को अंतिम बार अक्तूबर वर्ष 2001 में पूर्वी अफ़गान कस्बे ख़ोस्त में देखा गया था.
जनवरी वर्ष 2006 में अफ़गानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तान के इलाके में एक अमेरिकी मिसाइल हमले में ज़वाहिरी सुरक्षित बच निकला था जबकि अल क़ायदा के चार अन्य लड़ाके मारे गए थे.

सारा पेलिन की बेटी गर्भवती

सारा पेलिन की बेटी गर्भवती

पेलिन परिवार ने बेटी को पूरा समर्थन देने की घोषणा की है
अमरीका के अलास्का प्रांत की गवर्नर और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार सारा पेलिन ने माना है कि उनकी 17 साल की बेटी गर्भवती हैं.
उन्होंने कहा है कि उनकी बेटी ब्रिस्टल इस बच्चे को जन्म देंगी और बच्चे के पिता से शादी भी करेंगीं.
सारा पेलिन सामाजिक रुढ़िवादी हैं और उन्होंने गर्भपात का विरोध किया है.
पाँच बच्चों की माँ सारा पेलिन को चार दिन पहले ही रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने अपना रनिंग मेट घोषित किया था.
और यह ख़बर ऐसे समय में आई जब रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन में मैक्केन और पालिन की उम्मीदवारी को औपचारिक रुप से स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया चल रही थी.
जॉन मैक्केन और सारा पालिन ने इस मामले को उनकी बेटी और उनके मित्र का निजी मामला बताया है.
बेटी को समर्थन
ख़बर आई थी कि ब्रिस्टल को पाँच महीने का गर्भ है और दिसंबर के अंत में वो बच्चे को जन्म देंगीं.
इस ख़बर के बाद सारा पेलिन और उनके पति टॉड ने एक बयान में कहा, "ब्रिस्टल और वह नवयुवक जिससे वह शादी करने वाली है, बहुत जल्दी ही समझ जाएँगे कि बच्चे को बड़ा करना कितना कठिन काम है, इसलिए उनके साथ पूरे परिवार का समर्थन है."
प्रतिक्रिया
मैं समझता हूँ कि यह हमारी राजनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए. गवर्नर के रुप में सारा पालिन के प्रदर्शन और उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रुप में उनसे उम्मीदों का इस विषय से कोई लेना-देना नहीं हैं

बराक ओबामा
उधर जॉन मैक्केन के सलाहकारों ने कहा है कि जब सारा पेलिन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो वे उनकी बेटी के गर्भवती होने के बारे में जानते थे.
मैक्केन के प्रवक्ता स्टीव शिम्ड ने कहा है, "सीनेटक मैक्केन इसे एक निजी पारिवारिक मामला मानते हैं."
डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बराक ओबामा से जब इस ख़बर पर टिप्पणी करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी ख़बरों से दूर रहना चाहिए.
उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि यह हमारी राजनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए. गवर्नर के रुप में सारा पालिन के प्रदर्शन और उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रुप में उनसे उम्मीदों का इस विषय से कोई लेना-देना नहीं हैं."
जब ब्रिस्टल के बारे में यह ख़बर आई तो इसके बाद इंटरनेट पर एक ब्लॉग में यहाँ तक लिख दिया गया था कि पालिन का सबसे छोटा बच्चा ट्रिग दरअसल ब्रिस्टल का बच्चा है.
इससे पहले यह ख़बर भी आई थी कि सारा पालिन के पति 1986 में नशे में गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए थे.
बीबीसी के संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि रिपब्लिनक सम्मेलन में यह चर्चा का विषय ज़रुर रहा लेकिन इससे सारा पालिन की छवि पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
संभार बीबीसी हिन्दी कॉम