Tuesday, August 31, 2010

लापरवाह कर्मियों के विरूद्ध सख्त कदम उठाये जायेंगे। निशंक


देहरादून, 31 अगस्त 2010 राज्य गठन के उद्देशयों के अनुरूप सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करें। नई कार्य संस्कृति विकसित करते हुए जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जायेगा, जबकि लापरवाह कर्मियों के विरूद्ध सख्त कदम उठाये जायेंगे। यह निर्देश मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने देहरादून के विभिन्न कार्यलयों में आकस्मिक निरीक्षण करने के दौरान दिये। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने निरीक्षण के दौरान विभागों की उपस्थिति पंजिकाओं तथा विभागीय संचालित योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने दोपहर बाद सबसे पहले कांवली रोड़ स्थित ऊर्जा भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उप महाप्रबंधक एन.के. जोशी से से विभागीय प्रगति तथा अब तक व्यय हुई धनराशि की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारी से विद्युत सामग्री की आपूर्ति के सापेक्ष क्षेत्र में वितरण की अद्यतन स्थिति पर प्रगति आख्या प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विद्युत सामग्री की मौके पर आपूर्ति का निरन्तर अनुश्रवण किया जाय। उन्होंने महाप्रबंधक यूपीसीएल से नियोजन एवं अनुश्रवण के बारे में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन लोगो के रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं है, उन्हें चेतावनी जारी की जाय, भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न दोहराई जाय। मुख्यमंत्री ने इसे पश्चात जलागम निदेशालय का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अतिरिक्त निदेशक डी.जे.के. शर्मा तथा नीना ग्रेवाल से विभागीय योजनाओं की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने केन्द्र को भेजी गई परियोजना रिपोर्ट की प्रगति की भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जलागम परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र द्वारा जो दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं, उनका शत-प्रतिशत पालन किया जाय। श्री शर्मा ने बताया कि केन्द्र को 400 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्ताव भेजे गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विकास योजनाओं पर आधारित प्रकाशन साहित्य को ग्रामीण क्षेत्रों तक वितरित किया जाय तथा प्रकाशन साहित्य को हिन्दी भाषा में प्रकाशित किया जाय। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक द्वारा विभागीय योजनाओं के संबंध में पूछे जाने पर अपर निदेशक नीना ग्रेवाल ने बताया कि परियोजना में 2 लाख 3 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल भूमि के हिसाब से परियोजना प्रस्ताव तैयार किये गये हैं। इसमें पर्वतीय भूमि को 15 हजार प्रति हैक्टेयर तथा मैदानी भूमि को 12 हजार प्रति हैक्टेयर के मानक से परियोजना को तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने उत्तराखण्ड परिवहन निगम के कार्यालय का भी औचक निरीक्षण किया गया, जहां उन्होंने उपस्थिति पंजिका तथा निगम की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति के संबंध में विभागीय अधिकारियों से विस्तार से रिपोर्ट प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने भूमि सर्वेक्षण निदेशालय में वन भूमि से लंबित मामलों पर विस्तार से जानकारी मांगी। उन्होंने राज्य स्तर, केन्द्र स्तर पर लंबित प्रकरणों की विस्तार से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश नोडल अधिकारी को दिये। संबंधित पटल सहायक द्वारा बताया गया कि 5 हैक्टेयर क्षेत्रफल तक के वन भूमि अधिनियम से प्रभावित होने वाले 161 परियोजनाओं में से 48 की स्वीकृति प्राप्त हो गयी है। अवशेष प्रकरणों को केन्द्र सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय को पुनः अनापत्ति हेतु संदर्भित किया जा रहा है। हिमालय आजीविका सुधार परियोजना कार्यालय में निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. निशंक को परियोजना निदेशक विजय कुमार ने बताया कि 2004 से दिसम्बर 2012 तक संचालित इस परियोजना में केन्द्र से आइफैड योजना के तहत लगभग 110 करोड़ रुपये प्राप्त हुए है, जिसके विपरीत अब तक 52 प्रतिशत खर्चा किया जा चुका है तथा 30 करोड़ रुपये राज्यांश स्वीकृत हुआ है एवं विभिन्न वित्त पोषित संस्थाओं से लगभग 80 करोड़ रुपये काश्तकारों को पोषित कराने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने परियोजना निदेशक विजय कुमार को राज्यांश का प्रस्ताव बढ़ाने के निर्देश देते हुए योजना के समाप्त होने तक व्यय में तेजी लाने के निर्देश दिये है।

1 comment:

हमारीवाणी said...
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