Friday, August 6, 2010

गढ़वाली और कुमांऊनी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कर राज

देहरादून। गढ़वाल सांसद श्री सतपाल महाराज जी द्वारा गढ़वाली और कुमांऊनी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कर राज भाषा का दर्जा दिए जाने के संसद में दिए व्यकतव्य पर पूर्व मंत्री एंव उŸाराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री श्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने श्री सतपाल महाराज का आभार प्रकट किया है। श्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि जो साक्ष्य श्री सतपाल महाराज जी ने संसद के समक्ष प्रस्तुत किए हैं वह यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि ये प्राचीनतम भाषाएं हैं और उन्होंने यह भी कहा कि आज जब पूरा विश्व अपनी भाषाओं के संरक्षण को प्रयासरत है ऐसे में हम सबको मिलकर अपनी भाषाओं को राज भाषा का दर्जा दिलाने के लिए मांग उठानी चाहिए। उŸाराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजीव महर्षि ने भी श्री सतपाल महाराज के लोकसभा में दिए गये इस व्यकतव्य का स्वागत किया और गढ़वाल सांसद का आभार प्रकट किया है। उन्होंने श्री सतपाल महाराज जी द्वारा संसद में दिए गये इस व्यकतव्य का स्वागत करते हुए कहा कि गढ़वाली भाषा के दसवीं सदी के साहित्य की उपलब्धता यह प्रमाणित करती है यह प्राचीनतम भाषाएं हैं और इसके लिए इनकों आठवीं अनुसूची में शामिल कर राज भाषा का दर्जा अवश्य ही मिलना चाहिए।

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