Monday, September 21, 2009

पतंजलि योगपीठ से समन्वय कर प्रदेश सरकार इस दिशा में कार्य करेगी और उत्तराखण्ड के गांवों को आयुष ग्राम बनाएगी।


मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि वर्ष २०२० तक उत्तराखण्ड को आयुर्वेद एवं योग का विश्व प्रसिद्ध ''हब'' बना दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए जड़ी-बूटियों की आपूर्ति मांग से कम हो जायेगी। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड में जड़ी-बूटियों के संरक्षण के साथ ही इनके वृहद उत्पादन के लिए एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह बात अपने आवास पर उनसे मिलने आये योग गुरू स्वामी रामदेव तथा परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानन्द मुनि जी महाराज से भेंट के अवसर पर कही। योग गुरू रामदेव द्वारा योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पतंजलि योगपीठ से समन्वय कर प्रदेश सरकार इस दिशा में कार्य करेगी और उत्तराखण्ड के गांवों को आयुष ग्राम बनाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पतंजलि योगपीठ की भांति ही आयुर्वेद एवं योग के केन्द्र गढ़वाल और कुमांऊ के सुदूर पर्वतीय स्थानों पर भी खोले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार भी हर सम्भव सहयोग देगी। आयुर्वेद विश्वविद्यालय को जड़ी-बूटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस की स्थापना से उत्तराखण्ड की पहचान देश और विदेश में बनेगी। उन्होंने कहा कि योग गुरू द्वारा अपने कर्मस्थली देवभूमि उत्तराखण्ड को बनाया गया है जिसका लाभ प्रदेश को योग और आयुर्वेद के क्षे+त्र में भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चार धाम यात्रा को और अधिक व्यवस्थित रूप से आयोजित करने तथा गंगा की पवित्रता को बनाए रखने में सरकार संतजनों का भी पूरा सहयोग लेगी। इस अवसर पर योग गुरू स्वामी रामदेव ने कहा कि उत्तराखण्ड अनादिकाल से अध्यात्म का सर्वोश केन्द्र है, यहां प्रचुर मात्रा में दुर्लभ जड़ी-बूटियां हैं जो मानव के लिए जीवन दायिनी हैं। योग गुरू ने कहा कि सम्पूर्ण आयुर्वेद की परम्पराओं को लेकर एक आंदोलन चलाने की आवश्यकता है, जिसका नेतृत्व निसन्देह उत्तराखण्ड द्वारा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में पतंजलि पीठ राज्य सरकार के साथ परस्पर सहयोग से कार्य करेगी और उत्तराखण्ड को आयुर्वेद के क्षेत्र में विश्वस्तर पर स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में योग शिक्षा के लिए भी राज्य सरकार को प्रभावी पहल करनी होगी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानन्द मुनि महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड में अध्यात्म पर्यटन योगध्यान पर्यटन, चिकित्सा पर्यटन की प्रचुर सम्भावना है। इन क्षेत्रों को बढ़ावा देकर राज्य के आर्थिक संसाधनों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश विदेश आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को उत्तराखण्ड में और अधिक सुविधाएं देने के लिए भी कार्य किया जाना चाहिए।

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