Monday, October 27, 2008

सेक्स क्षमता बढ़ाने के कई नुस्खे हैं आयुर्वेद में


आयुर्वेदिक दवा से पौरुष लौटाने के बाजारू जुमले पर अगर आपका भरोसा टूटा है तो आप निश्चित रूप से सोने की भस्म की नकली चमक के शिकार हुए हैं। दवा में सोने की असली भस्म होती तो सच मानिए आप अपनी मूँछों पर ताव दे रहे होते। लेकिन केवल स्वर्ण भस्म ही क्यों, आयुर्वेद में कई ऐसे नुस्खे हैं जो आदमी के सेक्स जीवन में गुणात्मक परिवर्तन लाते हैं। वैद्यों का कहना है कि कायाकल्प के लिए पंचकर्म की प्रक्रिया से गुजरने के बाद वैसे भी यह बदलाव आता है, लेकिन जड़ी-बूटियों से बनी कई दवाइयाँ हैं जो नामर्दगी का प्रभावी इलाज करती हैं। पौरुष लौटाने के आयुर्वेद के इस दावे की विश्वसनीयता जल्द ही बढ़ने वाली है। आनंद स्थित कृषि विभाग की शोध संस्था नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन मेडिकल एंड एरोमेटिक प्लांट्स (एनआरसीएमएपी) में नामर्दगी को दूर करने का गुण रखने वाले पाँच पौधों पर शोध हो रहा है। इनमें अश्वगंधा भी शामिल है। संस्थान के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस शोध के परिणाम आयुर्वेद के दावे को पुष्ट करते हैं। संस्थान के निदेशक एस. मैटी ने आनंद से टेलीफोन पर इस शोध की पुष्टि की लेकिन कहा कि हम इन पौधों में कुछ खास रसायनों के होने की पुष्टि के लिए शोध कर रहे हैं। नामर्दगी पर इन रसायनों का क्या प्रभाव प़ड़ता है, हमारा इस पहलू से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर व चमत्कारी पौधे नोनी पर रिसर्च के लिए स्थापित वर्ल्ड नोनी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक डॉ. केवी पीटर ने फोन पर बताया कि नोनी का रस भी मर्दानगी दूर करने में काफी प्रभावी साबित हुआ है। उनके पास इसके क्लिनिकल प्रमाण भी हैं। उन्होंने माना कि अश्वगंधा सहित अन्य रसायन मर्दानगी बढ़ाने की अचूक दवा हो सकती है। मूलचंद अस्पताल में आयुर्वेद के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. एसवी त्रिपाठी कहते हैं कि शरीर में विषैले पदार्थों की वजह से समय के पहले ही मर्द में सेक्स की ताकत कम हो जाती है। सिर्फ स्वर्ण भस्म ही नहीं, आयुर्वेद में इसे लौटाने की कई अचूक दवाएँ हैं, लेकिन इसके नाम पर जो दवा बाजार में बिक रही है, उसकी क्षमता पर सवाल है। दवा में सोने की भस्म होगी ही नहीं तो क्या फायदा होगा। इसके अलावा अश्वगंधा, शतावरी, गोक्षुर चूर्ण, तुलसी बीज के चूर्ण आदि प्रभावी दवाइयाँ हैं। आयुर्वेद में जिस प्रक्रिया से सेक्स की ताकत लौटाई जाती है उसे बाजीकरण विधि कहते हैं। लेकिन साथ ही वे यह भी कहते हैं कि 70 साल का कोई आदमी चाहे कि इस विधि से नामर्दगी का इलाज हो जाए तो यह कतई संभव नहीं है।उन्होंने दावा किया कि आयुर्वेद ही एकमात्र विधा है जिसमें कायाकल्प संभव है। जिस विधि से शरीर का शोधन यानी कायाकल्प किया जाता है उसे पंचकर्म कहते हैं। संभार
दंजय

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