Thursday, November 26, 2009

पिट्कुल अधिकारियों ने इंसानियत की सारी हदें तब पार कर दी

पिट्कुल अधिकारियों ने इंसानियत की सारी हदें तब पार कर दी जब एक उप महाप्रबन्धक के विरुद्ध यौन शौषण की शिकायत दर्ज कराने वाली महिला अवर अभियन्ता(प्रशिक्षु) पर स्थानान्तरण के लिये झूठा आरोप लगाकर आरोपी उपमहाप्रबन्धक को ना केवल आरोपमुक्त किया गया बल्की उसे पदोन्नत करके मलाईदार पद से भी नवाजा गया।सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त दस्त्तावेजों से पिट्कुल मे व्याप्त नैतिक व आर्थिक भ्रष्टाचार क परत दर परत खुलासा निम्न प्रकार है:-
१.) मुख्यालय पर तैनात एक महिला अवर अभियन्ता(प्रशिक्षु) ने एक उप महाप्रबन्धक के विरुद्ध यौन शौषण की शिकायत २० जून २००८ को प्रबन्ध निदेशक के समक्ष की गयी।
२.) २० जून २००८ को ही निदेशक(मा.स.) द्वारा नोट्स एवं ऑर्डर तैयार करके प्रबन्ध निदेशक से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया।
३.)२० जून २००८ को तैयार नोट्स एवं ऑर्डर में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए। इन्टरनेट से डाउनलोड किये गये १ से ४ तक कुल चार पृष्ठ के दिशा निर्देशों को भी संलग्न किया गया।
४.) निदेशक(मा.स.)द्वारा तैयार उक्त नोट्स एण्ड ऑर्डर के साथ संलग्नक के रूप में सुप्रीमे कोर्ट के दिशा निर्देशों के पेज संख्या ४ पर बिन्दु ७ पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि जाँच समिती क गठन इस प्रकार किया जाये कि समिती का अध्यक्ष महिला होने के साथ साथ आधे सदस्य भी महिलायें होनी चाहिये।
५.) इस प्रकरण का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि रिश्वत खा कर उच्च अधिकारियों द्वारा यौन शौषण कि शिकायत को ऑफ़िशियल मिस्कण्डक्ट की शिकायत मे बदल दिया।
६.) २५ जून २००८ तक कोई कार्यावाही नही होने के कारण शिकायत कर्ता द्वारा आरोपि उपमहाप्रबन्धक द्वारा भेजे गये एस एम एस की प्रति भी संलग्न की।
७.) निदेशक(मा.स.) द्वारा पुन: नोट्स एण्ड ऑर्डर तैयार कर प्रबन्ध निदेशक से अनुमोदन प्राप्त किया।
८.) इस बार निदेशक(मा.स.)द्वारा अपने नोट्स एण्ड ऑर्डर में यौन शौषण के स्थान पर आफिशियल मिसकण्डक्ट शब्द का प्रयोग किया गया। ॰ इससे शर्मनाक और क्या हो सकता था कि एक अबला द्वारा अपना सम्मान बचाने के लिये की गयी शिकायत को निदेशक(मा॰ स॰) व अन्य अपनी कमाई का जरिया बनाकर पहले यौन शोष्ण का हव्वा खडा करेगें और रिशवत खाकर जाँच का विषय ही बदल देंगे।॰ इस प्रकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट अवमानना करते हूए पिटकुल अधिकारियों द्वारा एक अबला को चरित्र हनन किया है क्योंकि उक्तमहिला को ही स्थानान्तरण के लिये झूठी शिकायत करने का दोषी करार करते हुए आरोपित उपमहाप्रबन्धक को आरोप मुक्त करके पदोन्नत किया गया ।
९.) एक बार फ़िर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते हुए निदेशक(म.स.)ने यौन शौषण की शिकायत को ऑफ़िसियल मिसक्ण्डक्ट मे बदल दिया।
१०.) जाँच महाप्रबन्धक(सी एंड पी) एस.सी.गोयल को सौंपी गयी तथा महाप्रबन्धक(मा.स.)को प्रिजंइन्टिन्ग ऑफ़िसर बनया गया।
११.) यौन शौषण की शिकायत पर जाँच के दौरान, आरोपित अधिकारी पीड़ित महिला व्यक्तिगत रूप से क्रास परिक्षण नहीं कर सकता जब तक पीड़ित महिला इसके लिये अनुमति न दे।
१२.)इस प्रकरण में पीड़िता का क्रास परिक्षण न केवल आरोपित अधिकारी द्वारा किया बल्की आरोपित के कानूनी सहायक ने भी पीड़िता का क्रास परिक्षण किया।
१३.) क्या ये सम्भव है कि एक पद में सब से छोटे स्तर(अवर अभियन्ता) पर कार्यरत एक महिला(प्रशिक्षु) अधिकारी अपने ही विभाग के दो महाप्रबन्धकों ,एक उप महाप्रब्न्धक व एक कानूनी सहायक की उपस्थिति में अपना बयान दे सकती है और उनके द्वारा क्रास परिक्षण मे दागे गये प्रश्नों का उत्तर दे सकती है।
१४.) इससे पीड़िता के ऊपर मानसिक दबाव बनाकर आरोपित के पक्ष में बयान दर्ज कराया गया है।
१५.) आरोपित अधिकारी ने अपने मोबाईल से पीड़िता के मोबाईल पर भेजे गये मैसेज के बारे में सफ़ाई दी कि उसका मोबाईल किसी ने हैक करके पीड़िता के मोबाईल पर मैसेज भेजे गये हैं इसके समर्थन में समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख की छायाप्रति लगायी गयी है।

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