Friday, February 13, 2009

मंदी से वेलेंटाइन डे भी प्रभावित

बजरंग दल,विहिप या श्री‍राम सेना या अन्य नैतिकतावादी सेनाओं को पसंद हो या न हो, लेकिन इस बार बाजारों में इतने ज्याद गुलाब के फूल हैं कि अब वेलेंटाइन एक-दूसरे को एक कली के बजाय दर्जनों गुलाब के फूल दे सकते हैं क्योंकि फूल इतने सस्ते जो बिक रहे हैं। पिछले वर्ष तक जहाँ एक टहनी समेत गुलाब के फूल की कीमत 16 से 20 रुपए थी लेकिन इस बार यह 3 रुपए से पाँच रुपए में मिल रहा है क्योंकि बाजार की मंदी ने वेलेंटाइन डे को भी ‍अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दक्षिण भारत के जिन शहरों से गुलाब के फूल विदेशों और विशेष रूप से यूरोप के देशों को भेजे जाते थे, उनकी माँग अब बहुत गिर गई है। इस माँग में तीस प्रतिशत तक की गिरावट आ गई है। यूरोपीय देशों को इस अवसर पर गुलाब के फूलों की आपूर्ति करने का बेंगलुरु एक बड़ा केन्द्र रहा है लेकिन इस बार जैसी मंदी कभी नहीं देखने में आई है। पिछले वर्ष तक मेघना फ्लोरीटेक लिमिटेड छह,साढ़े छह लाख गुलाब के फूलों की आपूर्ति करती थी लेकिन इस बार करीब चार लाख गुलाब ही भेजे जा सके हैं।पिछले वर्ष टहनी समेत लाल गुलाब की कीमत 63 यूरो सेंट रही है लेकिन इस बार 40 यूरो सेंट तक नीचे आ गई है। उल्लेखनीय है कि केन्या के बाद बेंगलुरु के गुलाब सारी दुनिया में प्रसिद्ध हैं और यहाँ से हर वर्ष भारी मात्रा में गुलाब के फूल और कलियाँ विदेशों को भेजे जाते हैं। पुणे से गुलाब विदेशों को भेजे जाते हैं लेकिन इस वर्ष दोनों ही शहरों के फूलों पर मंदी भारी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 50 सेंटीमीटर या अधिक लंबाई वाले गुलाब के फूलों और तीन से छह सेमी की कलियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी माँग होती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि केवल वेलेंटाइन दिवस पर ही लाल गुलाबों की 1 करोड़ से डेढ़ करोड़ टहनियों समेत गुलाब भेजे जाते रहे हैं। पर इस बार अगर अस्सी लाख स्टेम्स भी भेजी जा सकें तो बेहतर बात होगी। पिछले वर्ष सितंबर में ही फ्लोरीकल्चर निर्यात 40 फीसदी नीचे चला गया था। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 45 फीसदी की गिरावट है लेकिन फिर भी उम्मीद की जा रही है कि वेंलेंटाइन डे के दिन तक बाजार में सुधार होगा।

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