Monday, February 27, 2012

केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव!

नई दिल्ली। संसद को अपराधियों का अड्डा बताने वाले अन्ना हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राजनीतिक दलों ने तीखा हमला बोला है। अपने मतभेदों को भुलाकर सभी पार्टियों ने कहा है कि केजरीवाल की घृणित टिप्पणी से यह पता चलता है कि उनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। वहीं राजद केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है।कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि यह संसद का अपमान है। यह इस देश की जनता का अपमान है, जो सांसदों और विधायकों को चुनकर भेजती है। ऐसे बयानों से लोकतंत्र कमजोर होता है। ऐसे लोगों का प्रचार नहीं करना चाहिए। संसद में ऐसे लोगों का बहुमत है जो इस देश के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। वे सभी वहां कड़ी मेहनत से पहुंचे हैं।भाजपा ने केजरीवाल के बयान पर आक्रोश जताते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को ईमानदार के रूप में पेश करने की कोशिश में यह एहसास कराते हैं कि पूरी दुनिया बेईमान हैं। इससे पता चलता है कि उन्हें संविधान और लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। पार्टी के महासचिव मुख्तार अब्बास नकवी ने यह स्वीकार किया कि संसद में कुछ लोगो दागी हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए आप संसदीय प्रणाली या लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म नहीं कर सकते।लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा है कि यह लोकतंत्र पर हमला है। यह उन लोगों की मानसिकता का परिचायक है। पासवान ने उन नेताओं को भी आड़े हाथ लिया, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्न हजारे के आंदोलन में उनके साथ मंच साझा किया था।गौरतलब है कि उत्तार प्रदेश के गाजियाबाद में शनिवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि इस संसद में 163 सदस्यों पर जघन्य अपराध के मामले हैं। इस संसद में बलात्कारी, लुटेरे और हत्यारे बैठे हैं। आप कैसे उम्मीद करते हैं कि यह संसद जन लोकपाल बिल को पारित कर देगी? आपको गरीबी और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला देगी?केजरीवाल के बयान पर बाबा रामदेव ने कोच्चि में कहा कि केजरीवाल के शब्दों और भाषा पर आपत्तिहो सकती है लेकिन उन्होंने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है। अगर हम सांसद चुन सकते हैं तो उनके खिलाफ भी बोल सकते हैंटीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल संसद के बजट सत्र में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगा। राजद यह प्रस्ताव केजरीवाल के सांसदों के ऊपर दिए गए गैरवाजिब टिप्पणी पर लाएगा।पार्टी महासचिव राम कृपाल यादव ने रविवार को कहा कि केजरीवाल ने अपनी टिप्पणी से संसद, उसके सदस्यों और मतदाताओं का अपमान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। इसके साथ ही केंद्र से मांग कर दी कि उन्हें तुरंत राष्ट्रद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जाए।यादव ने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ता केजरीवाल विदेशी ताकतों की शह पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर व कमजोर करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा केजरीवाल ऐसा इस लिए कर रहे हैं क्योंकि अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को लोगों ने अस्वीकार कर दिया है।

Friday, February 17, 2012

भाजपा सरकार के शासनादेशो को पलटती भाजपा सरकार। भाजपा सरकार के शासनादेशो को पलटती भाजपा सरकार।


निशंक कार्यकाल में हुए आदेश को खुंडरी ने पलटा।

लोकायुक्त कार्यालय को दी गई जमीन सतर्कता विभाग को यौंपी।

नारायण परगांई।

देहरादून। सरकार के आदेश को परिवर्तित करने का काम नई सरकार के गठन के बाद होता हुआ तो जरूर देखा होगा लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार अपने ही शासन मे हुए आदेशो को ही पलटती हुई देखी जा रही है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा सरकार के भीतर किस तरह का शीतयुद्व लगातार जारी है। ऐसा नही है कि भाजपा के सभी बड़े नेता एकजुट होकर विकास की बात करते हो जबकि भाजपा हाइकमान कई बार भाजपा के उत्तराखण्ड नेताओ को एकजुट रहते हुए विकास पर ध्यान देने की नसीहत दे चुका है। लेकिन इसके बाद भी भाजपा सरकार हाइकमान के आदेशो पर कोई ध्यान नही दे रही। विधानसभा चुनाव का मतदान निपट जाने के बाद चुनाव परिणाम आने से पहले जिस तरह भाजपा के भीतर भीरतघात किए जाने की बातो को लेकर भाजपा हाइकमान के दरबार में उत्त्राखण्ड के नेताओ ने दस्तक दी वह निश्चित रूप से एक दुसरे को नीचा दिखाने के सिवा और कुछ नही थी। उत्तराखण्ड में 2012 के विधानसभा चुनाव में पूरी भाजपा को दांव पर लगाकर जिस तरह खंडूरी है जरूरी का नारा जनता के बीच प्रस्तुत किया गया इसका क्या परिणाम रहेगा यह तो 6 मार्च को मतगणना के बाद तय हो जाएगा लेकिन इस नारे ने उत्त्राखण्ड की भाजपा को एकजुट करने के बजाए बिखराव की ओर बड़ा दिया। राजनैतिक लड़ाई सभी दलो में लगातार सामने आती रहती है लेकिन यदि मौजूदा सरकार के शासनकाल में ही पुराने आदेशो को पलटने का खेल खेला जाना शुरू हो जाए तो यह सरकार के लिए बेहद सोचनीय विषय बन जाता है। गौरतलब है कि बीती 4 मार्च 2011 को प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. निशंक के शासनकाल में ग्राम लाडपुर क्षेत्र में जिला देहरादून में 0.296 हैक्टेयर भूमि लोकायुक्त कार्यालय हेतु शासनादेश संख्या 554 के माध्यम से दिए जाने का शासनादेश जारी किया गया था और पिछले काफी समय से लोकायुक्त का अपना कार्यालय ना हो पाने के कारण कार्यालय खुल जाने की उम्मीदें जाग गई थी। मौजूदा समय में लोकायुक्त कार्यालय उत्त्राखण्ड में मौजूद तो है लेकिन वहां स्थान का अभाव होने के कारण कुछ समस्याएं जरूर खड़ी है लेकिन 11 सितम्बर के बाद उत्त्राखण्ड में पूर्व सीएम निशंक के शासनकाल में हुए कई आदेशो को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद मौजूदा सीएम खंडूरी ने पलटना शुरू कर दिया और लोकायुक्त कार्यालय की जमीन के शासनादेश को दिनांक 14 फरवरी को पलटते हुए लोकायुक्त कार्यालय के लिए दी गई जमीन सतर्कता विभाग उत्त्राखण्ड को एक हैक्टेयर भूमि देने का आदेश जारी कर दिया गया ऐसा नही है कि उत्त्राखण्ड सरकार पूर्व में किए गए कई अन्य आदेशो को भी ना पलटती हुई दिखी हो ऐसे कई आदेश खंडूरी शासनकाल में पलट दिए गए जिन्हे नही पलटा जाना चाहिए था। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्तमान भाजपा सरकार के भीतर शीतयुद्व काफी तेज गति से चल रहा है। इस तरह के आरोप कांग्रेस भाजपा पर लगाती हुई नजर आती थी लेकिन मौजूदा खंडूरी सरकार ने जिस तरह आदेशो को पलटना शुरू किया है अब कांग्रेस को इस तरह के आरोप लगाने की जरूरत नही आती हुई देखी जा रही यह काम खुद सत्ता में बैठी खंडूरी सरकार करती हुई नजर आ रही है। ऐसे में पुनः सत्ता वापसी का सब्जबाग देखना कहां तक सफल होगा इसका आंकलन खुद ही किया जा सकता है। एक तरफ भाजपा उत्त्राखण्ड में खुडूरी के नेतृत्व में चुूनाव लड़कर पूरी भाजपा को दांव पर लगा बैठा है वही दूसरी तरफ इस तरह के आदेश भाजपा के भीतर ही कई तरह के विवादो को जन्म भी देते हुए नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर सरकार के बाहर मतभेदो की लड़ाई चलने की बातें जो साबित नही हो पाती थी वह खंडूरी के शासनकाल में इा शासनदेश को पलट देने से साबित हो जाती है कि मौजूदा समय में भी खंडूरी निशंक के कार्यकाल में हुए शासनादेश को पलटने का खेल खेलने में लगे हैं।


Tuesday, January 17, 2012

भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड एक बार फिर मुख्यमंत्री खंडूरी के नेतृत्व मै चुनाव लड़ रही है ये वही खंडूरी हैं जो बीरोंखाल से भागकर कोटद्वार से चुनाव लड़ रहे हैं, आखिर वहाँ की जनता पूछ रही है की हमे दो राहे पैर क्यों छोड़ा आपने, क्या हमारा ये दोष था की जिसे आपने कहा हमने उसे वोट दिया , क्या आप चोबत्ताखाल से क्यों नही चुनाव लड़े ,हम तो यहीं है आप भाग लिए हमे हमारी किस्मत के भरोसे छोडकर, अब कोटद्वार वाले आप पर क्यों भरोसा करे कही आप कुर्सी देखकर उन्हें भी न छोड दें

चुनाव आयोग को ध्त्ता बनाते मीडिया मैनेजर

देहरादून, 2012 के मिशन को पफतह करने के लिये दिल्ली की चकाचैंध् से उत्तराखण्ड पहुंचे भाजपा व कांग्रेस के मीडिया मैनेजर पांच सितारा होटलों में बैठकर अपने आकाओं को जीत-हार का गणित बताते हुए नजर आ रहे हैं। बंद कमरों में की जा रही इस चुनावी चाल में मीडिया मैनेजरों की बातें कितनी सटीक हैं  इसका आंकलन तो 30 जनवरी को उत्तराखण्ड में होने वाले मतदान के बाद ही जनता का जनादेश मिलने के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन इन पांच सितारा होटलों में बैठकर जिस तरह से मीडिया मैनेजर पार्टियों के पैसों को भारी मात्रा में खर्च कर रहे हैं उस पर चुनाव आयोग की नजरें इनायत क्यों नहीं हो रही।  उत्तराखण्ड में एक प्रत्याशी 11 लाख  रूपये की  ध्नराशि ही चुनावी खर्च में खर्च कर सकता है लेकिन चुनाव आयोग रोजाना होने वाली इन बैठकों पर ध्यान  देता हुआ नजर नहीं आ रहा। रोजाना राजनैतिक दलों के मीडिया मैनेजर पार्टी पफंड से हजारों रूपये पानी की तरह बहा रहे हैं और यह सिलसिला पिछले एक सप्ताह से भी अध्कि समय होने के चलते लगातार जारी है। दिल्ली से कांग्रस के एक मीडिया मैनेजर इन दिनों राजधनी के एक बड़े होटल में बैठकर अपने आकाओं को जीत-हार का गणित जिस तरह से कुछ चाटुकार मीडिया लोगों के माध्यम से कराने में लगे हैं उनमें कितनी हकीकत है  इसका आंकलन करना बेहद मुश्किल भरा काम है। चुनाव आयोग एक तरपफ प्रत्याशियों के हर कार्यक्रम व चुनावी खर्च की नजर मजबूती के साथ रख रहा है। लेकिन बंद कमरों में रोजाना होने वाली इन दावतों का जिक्र न तो राजनैतिक अपने  चुनावी खर्च में करते हुए देखे जा रहे हैं और न ही चुनाव आयोग इन  पर रोक लगाने की कार्रवाई करता हुआ नजर आ  रहा है। रोजाना किये जा रहे इस हजारों रूपये के ध्न का हिसाब चुनाव आयोग किस राजनैतिक दल से लेगा इसको लेकर भी उंगलियां उठनी शुरू हो गई है।  राजनैतिक गलियारों में चर्चा आम हो गई है कि एक तरपफ तो चुनाव आयोग राज्य में बाहर से आने वाले काले ध्न पर लगातार अपना शिकंजा कसता जा रहा है वहीं दूसरी तरपफ इस तरह की होने वाली दावतों पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। जिससे लोकतंत्रा में निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न हो इसे लेकर शंसय के बादल मंडराते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि इस तरह के घटना क्रम पर यदि शीघ्र ही  रोक नहीं लगाई गई तो इसके खतरनाक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजपुर रोड, सुभाष रोड, त्यागी रोड, हरिद्वार रोड, चकराता रोड के साथ-साथ कई अन्य स्थानों पर भी रोजाना होटलों के बंद कमरों में दावतों का जोर लगातार जारी है लेकिन इन स्थानों की जानकारी निर्वाचन आयोग को लगती हुई नजर नहीं आ रही। इन होटलों में रूकने वाले लोगों की पहचान अगर की जाए तो कई राजनैतिक चेहरों के साथ-साथ कई बड़े लोग बेपर्दा हो सकते हैं।
पांच सितारा होटलों तक सिमटी भाजपा-कांग्रेस देहरादून, 2012 के
विधनसभा चुनाव में जनता के बीच जनादेश पाने के लिये जोर आजमाइश में लगी भाजपा व कांग्रेस दोनों ही राजनैतिक पार्टियां घोषणा पत्रों को पांच सितारा होटलो में जारी कर हजारों रूपये पफूंकती हुई नजर आ रही हैं। जबकि इन घोषणा पत्रों को पार्टी मुख्यालयों में भी जारी किया जा सकता था।
लेकिन इसके बजाय दोनों ही राजनैतिक दल अपने घोषणा पत्रा को पांच सितारा होटलों की चकाचैंध् के बीच जनता के बीच प्रस्तुत करने में अपनी वाहवाही करते हुए नजर आ रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब उत्तराखण्ड में दिल्ली के नेताओं का आगमन होने के बाद उनकी आवभगत पांच सितारा होटलों में की जाती है। दिल्ली में जहां राष्ट्रीय दल अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्रा को पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जारी करते हैं वहीं उत्तराखण्ड में दोनों ही राजनैतिक दलों की घोषणा पत्रा को जारी करने में चकाचैध् पांच सितारा होटलों की पीछा छोड़ती हुई नजर नहीं आ रही। जनता के बीच कांग्रेस जहां विकास के साथ-साथ हर वर्ग को साथ में लेकर चलना चाहती है वहीं भाजपा अपने घोषणा पत्रा में मौजूदा सरकार का कामकाज जनता के बीच लेजाकर सहानुभूति वोट बटोरना चाहती है। लेकिन पिछले पांच सालों में जनता को विकास की कितनी किरणों ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा सरकार पहुंचाने में कामयाब हो पाई है इसका सवाल भी उत्तराखण्ड की जनता वर्तमान सरकार से पूछती हुई नजर आ रही हैं कई विधनसभा क्षेत्रों में मुख्यमंत्राी को बदले जाने का पफैसला भी भाजपा के लिये टेढ़ी मुसीबत बनता हुआ नजर आ रहा है और भाजपा प्रत्याशियों को भी जनता के बीच सरकार का विकास किये जाने की गुड गर्वनेंस पहुंचाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालात कई विधनसभाओं के इस कदर हैं कि क्षेत्राीय जनता सरकार से नाखुश नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा सरकार अपने किस विकास को लेकर जनता के बीच जाती हुई दिख रही है यह आम आदमी की समझ में नहीं आ पा रहा। कांग्रेस भाजपा सरकार के शासनकाल में हुए घोटालों के साथ-साथ 2012 में सत्ता वापसी के बाद जनता को कईं संकल्प दोहराती हुई नजर आ रही है और कर्मचारियों के साथ-साथ युवाओं को रोजगार देने के अलावा कई मुद्दे प्रभावी तरीके से घोषणा पत्रा में प्रदर्शित किये गये हैं। भाजपा को सबसे ज्यादा मुश्किल सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्राी के रूप में सीएम प्रोजेक्ट करने को लेकर आ रही है और राजनाथ सिंह द्वारा बीते दिवस वर्तमान सीएम बीसी खण्डूरी को 2012 में पुनः सीएम प्रोजेक्ट करने की बात कहने से ही भाजपा के भीतर अंदरखाने विरोध् की आग सुलगनी शुरू हो गई है। जबकि कांग्रेस अभी 2012 में किसी को भी सीएम के रूप में प्रोजेक्ट नहीं कर रही है और कांग्रेस के सभी लोग एकजुटता के साथ 2012 काविधनसभा चुनाव जीतने में लगे हुए हैं। जनता को घोषणा पत्रा के माध्यम से विकास के सब्जबाग दिखाने वाली दोनों ही राजनैतिक पार्टियां पांच सितारा होटलों में बैठकर विकास का जो खाका तैयार कर रही हैं वह ध्रातल पर कितना उतर पाएगा इसे लेकर भी संशय के बादल मंडराते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा राजधनी के कई बड़े होटलों में मीडिया के साथ-साथ 2012 की रणनीति को लेकर भाजपा व कांग्रेस के साथ-साथ अन्य दलों के लोग भी राजनैतिक गोटियां पिफट करने में तेजी दिखाते हुए नजर आ रहे हैं और बड़े होटलों में पार्टी पफंड के माध्यम से रोजाना हजारों रूपये खर्च किये जा रहे हैं।

Thursday, January 5, 2012

सभी पार्टियों में बगावती तेवर दिखा रहे हैं नेता


देहरादून  राजनीति में पार्टी के प्रति निष्ठा कोई मायने नहीं रखती, थोड़ी सी उपेक्षा क्या हुई, बड़े से बड़े नेता भी बगावत का झंडा थाम लेते हैं। कुछ यही हाल आजकल उत्तराखंड की राजनीति में भी आया हुआ है। वह चाहे कांग्रेसी दिग्गज नारायण दत्त तिवारी हों या फिर टिकट कटने से आहत भाजपाई, जगह-जगह बगावत के झंडे दिखाई दे रहे हैं। कोई समर्थकों के दबाव की बात कह रहा है तो कुछ ने पार्टी से इस्तीफा ही दे दिया है।
सभी पार्टियों में बगावती तेवर दिखा रहे हैं नेता
शुरुआत टिकट से वंचित रह गए भाजपा नेताओं से। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है, वो बगावत की राह में निकल चुके हैं। कुछ दावेदार चुपचाप दोबारा से सेटिंग करने में जुट गए हैं, लेकिन कुछ ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। कैबिनेट मंत्री खजानदास को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें राजपुर रोड से चुनावी मैदान में उतारेगी लेकिन उनका तो पत्ता ही साफ हो गया। अब वह इससे काफी आहत हैं और खुलकर बोल भी रहे हैं। उन्होंने इसे साजिस कहा है। वह इस मामले में मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसी मुद्दे पर उनके समर्थकों ने प्रदेश मुख्यालय पर हंगामा भी किया।
इसी तरह कर्णप्रयाग के विधायक अनिल नौटियाल, सहसपुर विधायक राजकुमार, कोटद्वार विधायक शैलेंद्र सिंह रावत के समर्थकों ने खुलेआम पार्टी के निर्णय के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। इन सभी ने भी बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। दिवाकर भट्ट को पार्टी सिंबल से लड़ाने का विरोध हो रहा है। उधर अल्मोड़ा में जिलाध्यक्ष समेत 216 पदाधिकारियों ने अपना सामूहिक इस्तीफा पार्टी को भेज दिया है। बागेश्वर व कपकोट में भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। जिन सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं, वहां भी दावेदार आशंकित हैं और सभी परिस्थितियों की तैयारी कर रहे हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस में सूची जारी होने से पहले ही मुश्किल खड़ी हो गई है। तिवारी समर्थकों ने निरंतर विकास समिति के बैनर तले पूरे प्रदेश में सभी 70 सीटों में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। अब कांग्रेस एनडी तिवारी को समझाने-बुझाने में जुट गई है। प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में भी कई बगावती नेता दिखाई दे सकते हैं।

Thursday, August 4, 2011

उत्तराखण्ड में 2012 चुनाव समय पर होंगे।

पेड न्यूज, फर्जी वोटिंग, फंड मिसयूज पर लगेगी रोक।

देहरादून। । उत्तराखण्ड में विधान सभा चुनाव की तैयारियां को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रदेश के आला अधिकारियों की बैठक के साथ जो संकेत दिए हैं उससे चुनाव समय पर होने की बाते सामने आ रही हैं। सात राजनैतिक दलो के साथ विचार करने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को कई समस्याओ से भी रूबरू कराया गया है। जिनमें उत्तराखण्ड में फर्जी वोटिंग, पोलिंग स्टेशनो की दूरी, पेड न्यूज, पब्लिक फंड का मिस्यूज, मिसिंग वोटरो को ढूंढना, कैश के बदले वोट सिस्टम सहित कई अन्य बातो के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग अब इन सब पर पैनी नजर रख रहा है। उत्तराखण्ड में विधान सभा चुनाव को लेकर जिस तरह से डुगडुगी बजनी शुरू हो गई है उससे साफ संकेत जा रहे हैं कि विधान सभा 2012 के चुनाव अपने नियत समय में दिसम्बर जनवरी में होने तय हैं क्योकि एनसीपी व सीपीएम के अलावा किसी भी अन्य राजनैतिक पार्टी ने उत्तराखण्ड में विधान सभा चुनाव नवम्बर में कराए जाने की बात मुख्य चुनाव आयुक्त को नही कही है जिससे साफ संकेत हो गए है कि कांग्रेस, भाजपा, बसपा, उक्रांद के साथ साथ कोई भी राजनैतिक पार्टी समय से पहले चुनाव नही कराना चाहती। जबकि चुनाव आयोग अपनी पूरी तैयारी के साथ विधान सभा चुनाव की कमान संभालने को तैयार बैठा है। उत्तरप्रदेश व उत्तराखण्ड का दौरा करने के बाद मणीपुर, पंजाब, गोवा दौरे के बाद ही विधान सभा चुनाव की होने वाली तिथि का पता चल पाएगा क्योकि मुख्य चुनाव आयुक्त अभी 3 राज्यो का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट केन्द्र को सौंपेंगे जिसके बाद ही देश के 5 राज्यो में 2012 में हाने वाले विधान सभा चुनाव की तिथि तय हो पाएगी। वैसे माना जा रहा है कि उत्तरप्रदेश के साथ साथ उत्तरारखण्ड में एक साथ चुनाव सम्पन्न कराए जा सकते हैं और दोनो ही राज्यो में चुनाव आयोग अपनी तैयारी के साथ मतदाताओ के वोटर कार्ड बनाने की अंतिम प्रक्रिया पूरी कर रहा ळै। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का साफ मत है कि उत्तराखण्ड में लिफाफो में पैसा वोटरो को बाटा जाता है और पेड न्यूज की उत्तराखण्ड में बहुत बड़ी समस्या सामने है जिसे दूर करने के लिए कोई कसर नही छोड़ी जाएगी। उनके अनुसार बिहार में पेड न्यूज पर रोक लगाने के लिए जिस तरह की कमेटी बनाई थी उसे उत्तराखण्ड में भी लागू किया जाएगा। इसके अलावा मिसिंग वोटर जो यूथ की श्रेणी मे हैं उन्हे ढूंढकर मतदान स्थल तक पहुचाने के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किए जायेंगे। इसके अलावा पब्लिक फंड का मिस्यूज होने की शिकायते ंभी जिस तरह से सामने आ रही है उस पर भी लगाम लगाई जायेगी। एमपी व एमएलए चुने जाने के कई सालो बाद तक भी अपनी फंड को खर्च नही करते और चुनावी वर्ष के दौरान फंड को खर्च किया जाता है जो जनता के हित में ठीक नही। उनके अनुसार कई पोलिंग स्टेशन पर्वतीय क्षेत्रों के कारण दूर स्थान पर मौजूद हैं जिन्हे पास किया जाएगा। उन्होने कहा कैश के बदले वोट सिस्टम को उत्तराखण्ड मे लागू नही होने दिया जाएगा और मतदाताओ की कम संख्या भी इसी कारण बढ़ रही है कि राजनेता कैश के बदले वोट सिस्टम को लागू कर रहे हैं जो स्वस्थ चुनाव सम्पन्न कराने के लिए ठीक नहीं। उत्तराखण्ड मे होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग कड़े तेवर में आ गया है और माना जा रहा है कि मार्च में बोर्ड की परीक्षाएं होने के कारण पहले चुनाव को इसी माह कराने का निर्णय था लेकिन अब इस पर एक राय नही बन पायी है और अब उत्तराखण्ड में 2012 का चुनाव अपने नियत समय में होगा। 2007 में जिस तरह दिसम्बर माह में आचार संहिता लगी थी ठीक उसी तरह 2012 के इलैक्शन में भी वही रोस्टर प्रणाली को लागू किया जाएगा। इसके अलावा अगस्त माह तक टाªंसफर पाॅलीसी के तहत 3 साल से ज्यादा एक ही जनपद में रहने वाले अधिकारियो को इधर से उधर किया जाएगा। वही निर्वाचन आयोग बीएलओ को ज्यादा मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है उसके अनुसार बीएलओ मतदान स्थल पर वही का होना चाहिए जिससे मतदाताओ को पहचानने में परेशानी ना हो कुल मिलाकर निर्वाचन आयोग उत्तराखण्ड में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है लेकिन यह भी साफ संकेत हो गए है कि उत्तराखण्ड में समय पर चुनाव सम्पन्न होगे लेकिन निर्वाचन आयोग के अनुसार वह किसी भी राज्य में 6 महीने पहले चुनाव सम्पन्न करा सकता है इसके लिए उसे राज्य सरकार की अनुमति की कोई आवश्यकता नही होती।