Saturday, April 4, 2009
पत्करू के लिय बने सच्व्लय मीडिया सेण्टर मई इन दिनू जहा कई बहरी लोग आ रहे है वही कई लोग यहाँ आकर सिर्फ़ सोने का ही कम करते है वही कुछ लोग अपने को अकबर का मालिक भी बता कर यहाँ टेलीफोन फैक्स इन्टरनेट का उपयोग कर रहे है इन सब का उपयोग वो लोग अपनी नीजी कामू के लिया जयदा कर रहे है जब की इस तरफा कोई भी देख नही रहा है जी है यह सत्य है की कई लोग सुबह ही ९ बजते ही यहाँ आ कर चाय की चुस्की लेते हुआ दिन भर यह की हर चीज का फायदा ले रहे है यदि समय रहते इन लोगू पर लगाम नही लगाई गई तो एक दिन मीडिया सेण्टर मोकामूका मिलेतो किजय्गा घटा लग जायगा मित्रू ... ब्लॉग पर .... लिखा सिर्फ़ ध्यान के लिया है आप के कोम्म्नेट का इंतजार रहेगा 09837261570
Thursday, March 12, 2009
सेक्स इंसान की जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत अहसास होता है। लेकिन कई बार गलतफहमियों और गलतियों के चलते यह
बुरे स्वप्न में तब्दील हो जाता है। आइए ........ ऐसे कुछ टिप्स जिनसे आप अपनी सेक्सुअल लाइफ को खुशहाल बना सकते हैं .........इमोशनल अटेचमंट जरूरी है कुछ महिलाओं के मन में सेक्स को लेकर गलतफहमियां होती हैं, जिस वजह से वे पहली बार संभोग करते वक्त कंफर्टबल फील नहीं करती। कई बार ऐसी स्थिति तब भी आती है, जब आप आपके सेक्सुअल पार्टनर के बीच इमोशनल अटेचमंट नहीं है। खासकर की अरेंज मैरिज के दौरान अक्सर ऐसा देखने में आता है। किसी भी महिला की सेक्स करने की इच्छा उसके दिल से जुड़ी होती है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी की बजाय इंतजार करना ज्यादा फायदेमंद होता है। मन से निकालें गलतफहमी ज्यादातर महिलाओं के दिमाग में यह फोबिया बैठा रहता है कि पहली बार संभोग के वक्त काफी तकलीफ होती है। और तो और मॉडर्न जमाने की महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। दरअसल, हमारे समाज में महिलाओं में यह डर बचपन से ही बैठाना शुरू कर दिया जाता है और काफी गहरे तक बैठ जाता है। किशोरावस्था में लड़कियां अक्सर इस डर से रूबरू होती रहती हैं। यही वजह है कि वे पार्टनर के साथ पहली बार संभोग करते वक्त सहयोग नहीं करती। फिजिकल प्रॉब्लम हो सकती है बहुत सी महिलाओं द्वारा शिकायत की जाती है कि उन्हें पहली बार संभोग के वक्त बहुत दर्द हुआ था। ऐसा उनकी पैलविक मसल्स के ज्यादा टाइट होने या फिर वैजाइना में लिक्विड की कमी होने की वजह से होता है। इसकी वजह उनका हाइमन (वैजाइना को बाहर की ओर से कवर करने वाली झिल्ली) पहले से ही चोटिल होना भी हो सकती है। अगर किसी को इनमें से कोई भी परेशानी है, तो उन्हें संभोग को अवॉइड करना चाहिए, नहीं तो नतीजे बेहद खराब हो सकते हैं। कई बार यह फिजिकल प्रॉब्लम एक मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम में भी तब्दील हो जाती है। हाइमन पहले से टाइट है वैजाइना को बाहर से कवर करने वाली झिल्ली को हाइमन कहा जाता है। यह जन्म के समय से हो भी सकती है और नहीं भी। कुछ महिलाओं में यह काफी टाइट पाई जाती है। इस वजह से संभोग करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से जबर्दस्ती संभोग करने पर खून निकलने और बहुत ज्यादा दर्द की शिकायत आती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है, तो पहली बार संभोग करने से पहले इसे स्त्री रोग एक्सपर्ट की हेल्प से हटवाया जा सकता है। महिला पार्टनर का असहयोग अनचाहे डर की वजह से कुछ महिलाएं पहली बार संभोग के वक्त अपनी वैजाइना की मसल्स को सिकोड़ लेती हैं। ऐसे में जब उनका पार्टनर संभोग की कोशिश करता है, तो मसल्स में रगड़ लगने की वजह से चोट लगती है। महिला के वैजाइना को जबर्दस्ती सिकोड़ने की वजह से ही संभोग दर्दनाक और असंभव बन जाता है। अगर महिला संभोग से पहले अपने मन के अनचाहे डर को खत्म नहीं करती है, तो कोई दवा उसकी मदद नहीं कर सकती। ऐसे में किसी सेक्सोथैरेपिस्ट के साथ काउंसलिंग बेहतर ऑप्शन हो सकता है। मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम इरक्टाइल डिस्फंक्शन के तहत महिला संभोग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाती। ज्यादातर केसों में इसकी वजह मनोवैज्ञानिक तनाव, थकान, डर, गुस्सा, मूड डिस्ऑर्डर, रिलेशनशिप में प्रॉब्लम और पहले हुई दर्दनाक घटना हो सकती है। इसका इलाज उसकी वजह पर डिपेंड करता है। अगर मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम है, तो उसके लिए सेक्स काउंसलिंग और थैरपी ली जा सकती है। पुरुष तैयार नहीं हो पाते कई बार पुरुषों के साथ यह परेशानी होती है कि उनका लिंग सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता। इस वजह से कई बार शादी टूटने की नौबत आ जाती है। इस परेशानी को ऑर्गेनिक इरक्टाइल डिस्फंक्शन कहते हैं। इसकी वजह डाइबिटीज, थायरॉइड, पीयूष गंथि में प्रॉब्लम और किसी दवाई का रिएक्शन भी हो सकती है। खासतौर पर हाईपरटेंशन की दवाई लेने से कई बार इस तरह की परेशानी हो जाती है। पार्टनर को खुश कर पाऊंगा? ज्यादातर पुरुषों को संभोग के दौरान सबसे ज्यादा डर अपनी परफॉर्मंस का रहता है। इसी वजह से उन्हें कई बार नपुंसकता जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर कोई पुरुष सेक्स को एंजॉय करने की बजाय इस बात पर ज्यादा ध्यान देता है कि वह अपने पार्टनर को कितना खुश कर पा रहा है, तो उस इस तरह की परेशानी होने की संभावना ज्यादा है। इस तरह की परेशानी किसी के साथ भी हो सकती है। ऐसी कंडिशन में वाइफ का सहयोग इस परेशानी से निपटने में सहायता करता है।................................................. शीघ्रपतन बीमारी नहीं है ज्यादातर पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या पाई जाती है। ध्यान रखें कि यह कोई फिजिकल प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि एक प्रोसेस है। नवविवाहित जोड़ों को यह प्रोसेस सीखने में कुछ वक्त लगता है। अगर आदमी और औरत दोनों मिलकर कोशिश करें, तो शीघ्रपतन की परेशानी पर काबू पाया जा सकता है। शीघ्रपतन की समस्या पर रोक लगाने के लिए स्टॉप-स्टार्ट टेक्नीक अपनाई जा सकती है। महिला तैयार नहीं हो पाती पुरुषों की तरह कई बार महिलाओं में भी सेक्स के लिए उत्तेजना नहीं आ पाती। संभोग के लिए पुरुष के साथ महिला में भी उत्तेजना पैदा होना उतना ही जरूरी है। महिलाओं में भी पुरुषों की तरह इस परेशानी की वजहें हार्मोनल, ऑर्गेनिक इरक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकती हैं। अगर पार्टनर्स के बीच में कोई प्रॉब्लम चल रही है या फिर उनकी रिलेशनशिप मजबूत नहीं है, तो भी इस तरह की परेशानी आ सकती है। महिलाएं इस परेशानी से उबरने के लिए कुछ दवाइयों का सहारा ले सकती हैं
बुरे स्वप्न में तब्दील हो जाता है। आइए ........ ऐसे कुछ टिप्स जिनसे आप अपनी सेक्सुअल लाइफ को खुशहाल बना सकते हैं .........इमोशनल अटेचमंट जरूरी है कुछ महिलाओं के मन में सेक्स को लेकर गलतफहमियां होती हैं, जिस वजह से वे पहली बार संभोग करते वक्त कंफर्टबल फील नहीं करती। कई बार ऐसी स्थिति तब भी आती है, जब आप आपके सेक्सुअल पार्टनर के बीच इमोशनल अटेचमंट नहीं है। खासकर की अरेंज मैरिज के दौरान अक्सर ऐसा देखने में आता है। किसी भी महिला की सेक्स करने की इच्छा उसके दिल से जुड़ी होती है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी की बजाय इंतजार करना ज्यादा फायदेमंद होता है। मन से निकालें गलतफहमी ज्यादातर महिलाओं के दिमाग में यह फोबिया बैठा रहता है कि पहली बार संभोग के वक्त काफी तकलीफ होती है। और तो और मॉडर्न जमाने की महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। दरअसल, हमारे समाज में महिलाओं में यह डर बचपन से ही बैठाना शुरू कर दिया जाता है और काफी गहरे तक बैठ जाता है। किशोरावस्था में लड़कियां अक्सर इस डर से रूबरू होती रहती हैं। यही वजह है कि वे पार्टनर के साथ पहली बार संभोग करते वक्त सहयोग नहीं करती। फिजिकल प्रॉब्लम हो सकती है बहुत सी महिलाओं द्वारा शिकायत की जाती है कि उन्हें पहली बार संभोग के वक्त बहुत दर्द हुआ था। ऐसा उनकी पैलविक मसल्स के ज्यादा टाइट होने या फिर वैजाइना में लिक्विड की कमी होने की वजह से होता है। इसकी वजह उनका हाइमन (वैजाइना को बाहर की ओर से कवर करने वाली झिल्ली) पहले से ही चोटिल होना भी हो सकती है। अगर किसी को इनमें से कोई भी परेशानी है, तो उन्हें संभोग को अवॉइड करना चाहिए, नहीं तो नतीजे बेहद खराब हो सकते हैं। कई बार यह फिजिकल प्रॉब्लम एक मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम में भी तब्दील हो जाती है। हाइमन पहले से टाइट है वैजाइना को बाहर से कवर करने वाली झिल्ली को हाइमन कहा जाता है। यह जन्म के समय से हो भी सकती है और नहीं भी। कुछ महिलाओं में यह काफी टाइट पाई जाती है। इस वजह से संभोग करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से जबर्दस्ती संभोग करने पर खून निकलने और बहुत ज्यादा दर्द की शिकायत आती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है, तो पहली बार संभोग करने से पहले इसे स्त्री रोग एक्सपर्ट की हेल्प से हटवाया जा सकता है। महिला पार्टनर का असहयोग अनचाहे डर की वजह से कुछ महिलाएं पहली बार संभोग के वक्त अपनी वैजाइना की मसल्स को सिकोड़ लेती हैं। ऐसे में जब उनका पार्टनर संभोग की कोशिश करता है, तो मसल्स में रगड़ लगने की वजह से चोट लगती है। महिला के वैजाइना को जबर्दस्ती सिकोड़ने की वजह से ही संभोग दर्दनाक और असंभव बन जाता है। अगर महिला संभोग से पहले अपने मन के अनचाहे डर को खत्म नहीं करती है, तो कोई दवा उसकी मदद नहीं कर सकती। ऐसे में किसी सेक्सोथैरेपिस्ट के साथ काउंसलिंग बेहतर ऑप्शन हो सकता है। मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम इरक्टाइल डिस्फंक्शन के तहत महिला संभोग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाती। ज्यादातर केसों में इसकी वजह मनोवैज्ञानिक तनाव, थकान, डर, गुस्सा, मूड डिस्ऑर्डर, रिलेशनशिप में प्रॉब्लम और पहले हुई दर्दनाक घटना हो सकती है। इसका इलाज उसकी वजह पर डिपेंड करता है। अगर मनोवैज्ञानिक प्रॉब्लम है, तो उसके लिए सेक्स काउंसलिंग और थैरपी ली जा सकती है। पुरुष तैयार नहीं हो पाते कई बार पुरुषों के साथ यह परेशानी होती है कि उनका लिंग सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता। इस वजह से कई बार शादी टूटने की नौबत आ जाती है। इस परेशानी को ऑर्गेनिक इरक्टाइल डिस्फंक्शन कहते हैं। इसकी वजह डाइबिटीज, थायरॉइड, पीयूष गंथि में प्रॉब्लम और किसी दवाई का रिएक्शन भी हो सकती है। खासतौर पर हाईपरटेंशन की दवाई लेने से कई बार इस तरह की परेशानी हो जाती है। पार्टनर को खुश कर पाऊंगा? ज्यादातर पुरुषों को संभोग के दौरान सबसे ज्यादा डर अपनी परफॉर्मंस का रहता है। इसी वजह से उन्हें कई बार नपुंसकता जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर कोई पुरुष सेक्स को एंजॉय करने की बजाय इस बात पर ज्यादा ध्यान देता है कि वह अपने पार्टनर को कितना खुश कर पा रहा है, तो उस इस तरह की परेशानी होने की संभावना ज्यादा है। इस तरह की परेशानी किसी के साथ भी हो सकती है। ऐसी कंडिशन में वाइफ का सहयोग इस परेशानी से निपटने में सहायता करता है।................................................. शीघ्रपतन बीमारी नहीं है ज्यादातर पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या पाई जाती है। ध्यान रखें कि यह कोई फिजिकल प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि एक प्रोसेस है। नवविवाहित जोड़ों को यह प्रोसेस सीखने में कुछ वक्त लगता है। अगर आदमी और औरत दोनों मिलकर कोशिश करें, तो शीघ्रपतन की परेशानी पर काबू पाया जा सकता है। शीघ्रपतन की समस्या पर रोक लगाने के लिए स्टॉप-स्टार्ट टेक्नीक अपनाई जा सकती है। महिला तैयार नहीं हो पाती पुरुषों की तरह कई बार महिलाओं में भी सेक्स के लिए उत्तेजना नहीं आ पाती। संभोग के लिए पुरुष के साथ महिला में भी उत्तेजना पैदा होना उतना ही जरूरी है। महिलाओं में भी पुरुषों की तरह इस परेशानी की वजहें हार्मोनल, ऑर्गेनिक इरक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकती हैं। अगर पार्टनर्स के बीच में कोई प्रॉब्लम चल रही है या फिर उनकी रिलेशनशिप मजबूत नहीं है, तो भी इस तरह की परेशानी आ सकती है। महिलाएं इस परेशानी से उबरने के लिए कुछ दवाइयों का सहारा ले सकती हैं
Monday, March 2, 2009
तंत्र्की बाबा और जर्नलिस्ट
Tuesday, February 17, 2009
दिल नहीं, दिमाग से उठती हैं प्यार की हिलोरें

प्रेमी जोडे़ अक्सर प्यार
दिल देने की बात कहते सुने जाते हैं , पर क्या वाकई प्यार दिलों की पैदाइश है। प्रेमी जन शायद सहमत न भी हों , पर वैज्ञानिकों का दावा यही कहता है। न्यू यॉर्क के एक न्यूरोसाइंटिस्ट का कहना है कि प्यार का असली सोर्स सिर के भीतर मौजूद है , न कि दिल के भीतर। तस्वीरों में : आया सेक्स चिप का जमाना पढ़े : फटाफट सेक्स की बेस्ट जगह रिसर्चर असल में रोमांटिक लव की बायॉलजी समझने की कोशिश कर रहे हैं। कवि और शायरों के लिए प्रेम की परिभाषा अलग हो सकती है , पर रिसर्चरों का कहना है कि प्यार को ब्रेन इमिजों , हॉमोर्न और जिनेटिक्स के जरिए समझा जा सकता है। फिर चाहे इंसान को पहली बार प्यार हुआ हो , लंबे समय से हो या प्यार को खो चुका हो। अटलांटा की इमोरी यूनिवर्सिटी के यर्क्स नैशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर से जुड़ीं लैरी यंग बताती हैं कि प्यार का एक जैविक आधार होता है। हम इसके लिए जिम्मेदार कुछ तत्वों की पहचान कर सके हैं। वैज्ञानिकों ने रोडेंट्स पर टेस्ट के जरिए जानने की कोशिश की कि प्यार में पड़े इंसान के दिमाग में क्या चलता है। दिमाग के भीतर लव सर्किट असल में , वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसानी दिमाग के चार सूक्ष्म हिस्से मिलकर लव सर्किट बनाते हैं। न्यू यॉर्क के अल्बर्ट आइंस्टाइन कॉलिज ऑफ मेडिसिन में काम करने वाले एसिवेडो ने इन हिस्सों का पता लगाया है। ये हैं - वेंट्रल टेगमेंटल एरिया ( वीटीए ) , द न्यूक्लियस एकम्बंस , द वेंट्रल पैडिलम और रैफे न्यूक्लियस। इस सर्किट का हॉट स्पॉट बूंद के आकार के वीटीए को माना जा रहा है। प्यार में नए - नए पड़े लोगों को एमआरआई मशीन में रखा गया। जैसे ही इन लोगों को इनके प्रेमी या प्रेमिका की तस्वीर दिखाई गई , इनका वीटीए रोशन हो गया। इसी तरह का इफेक्ट उन लोगों पर भी दिखा , जिन्हें प्यार में पडे़ बीस साल हो चुके थे। यहां बता दें कि वीटीए ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम का अहम हिस्सा है। रट्गर्स यूनिवसिर्टी में रिसर्चर और प्रफेसर हेलन फिशर के मुताबिक ये सेल्स हैं जो डोपामाइन बनाकर उसे ब्रेन के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाते हैं। ब्रेन का यह हिस्सा इस कारण ऐक्टिवेट हो गया , क्योंकि आप जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी - अपना जीवनसाथी पाने की कोशिश कर रहे थे। पढ़े : किस का करिश्मा नशा यह प्यार का नशा है हालांकि रिसर्च का एक नतीजा उत्साह को ठंडा भी करता है। रिसर्च में पता लगा कि प्यार दिमाग में दवा की लत की तरह काम करता है। फिशर के मुताबिक , रोमांटिक लव नशे की लत की तरह है , यह ऐसा नशा है जो जब तक सही चल रहा हो तो बड़ा आनंद देता है , पर जब यह कमजोर पड़ने लगता है तो खतरनाक मोड़ ले लेता है। प्यार के लिए लोग मारने पर उतारू हो जाते हैं। वे प्यार के लिए खुद भी मर जाते हैं। प्यार की लत को स्वीकारते हुए एसिवेडो कहते हैं , प्यार को मजेदार और निराला माना जाता है पर इसकी कुछ वजहें भी हैं। ये वजहें हमें साथ रखने की हैं। पर कुछ दफा प्यार हमें एकसाथ नहीं रख पाता। इसलिए वैज्ञानिकों ने हाल ही में प्यार में चोट खाए लोगों के ब्रेन की भी स्टडी की। ऐसे लोगों के बेन के न्यूक्लियस एकम्बंस में अडिशनल ऐक्टिविटी देखी गई। यह एडिक्शन से और भी ज्यादा जुड़ा हुआ है। पढ़े : बेवफा होती हैं खूबसूरत महिलाएं! टूटते रिश्तों को जोड़ने की दवा वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उनकी इस रिसर्च से ब्रेन हॉर्मोंस आधारित ऐसी दवाएं बनाने में मदद मिलेगी जिन्हें थेरपी के साथ इस्तेमाल करके बिखरते रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकेगा।
ब्लॉग पर लिकने का मोका मिला तो सोचा की क्या राम मन्दिर का मुद्दा बीजेपी को सरकार बनाने की रहा माय रोड़ा बन सकता है कोई की इस समय रास्तीय स्तर पर बीजेपी मैकोई भी अडवाणी को पिं ऍम नही चाता कोई की जिस मुद्दा को लाकर सत्ता मै बीजेपी ई थी उसे पुरा नही कर इस समय पूरे देश मै बीजेपी के इस मुद्दा को दुबरा उत कर गलत किया है देश का यूथ अब बीजेपी को सबक सिका कर ही दम लेगा... ब्लॉग पर इसे इस लिया लिख रहा हु की यही सत्य है ओउर मै इसे सामचार के रूप मै नही लिख सकता उत्तरांचल मै भी इस समय सीएम वोट बैंक के लिया जन्पोदोमै जा रहे है लकिन वह सिर्फ़ अधकरीऊ की फोजा दिकाही डे रही है लोग सरकार से नाराज है और इस बार जनता बीजेपी को ठीक जवाब देगी ..... अप्प को समय समय पर याद अया तो ब्लॉग पर याद केज्याग
Friday, February 13, 2009
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मंदी से वेलेंटाइन डे भी प्रभावित
बजरंग दल,विहिप या श्रीराम सेना या अन्य नैतिकतावादी सेनाओं को पसंद हो या न हो, लेकिन इस बार बाजारों में इतने ज्याद गुलाब के फूल हैं कि अब वेलेंटाइन एक-दूसरे को एक कली के बजाय दर्जनों गुलाब के फूल दे सकते हैं क्योंकि फूल इतने सस्ते जो बिक रहे हैं। पिछले वर्ष तक जहाँ एक टहनी समेत गुलाब के फूल की कीमत 16 से 20 रुपए थी लेकिन इस बार यह 3 रुपए से पाँच रुपए में मिल रहा है क्योंकि बाजार की मंदी ने वेलेंटाइन डे को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दक्षिण भारत के जिन शहरों से गुलाब के फूल विदेशों और विशेष रूप से यूरोप के देशों को भेजे जाते थे, उनकी माँग अब बहुत गिर गई है। इस माँग में तीस प्रतिशत तक की गिरावट आ गई है। यूरोपीय देशों को इस अवसर पर गुलाब के फूलों की आपूर्ति करने का बेंगलुरु एक बड़ा केन्द्र रहा है लेकिन इस बार जैसी मंदी कभी नहीं देखने में आई है। पिछले वर्ष तक मेघना फ्लोरीटेक लिमिटेड छह,साढ़े छह लाख गुलाब के फूलों की आपूर्ति करती थी लेकिन इस बार करीब चार लाख गुलाब ही भेजे जा सके हैं।पिछले वर्ष टहनी समेत लाल गुलाब की कीमत 63 यूरो सेंट रही है लेकिन इस बार 40 यूरो सेंट तक नीचे आ गई है। उल्लेखनीय है कि केन्या के बाद बेंगलुरु के गुलाब सारी दुनिया में प्रसिद्ध हैं और यहाँ से हर वर्ष भारी मात्रा में गुलाब के फूल और कलियाँ विदेशों को भेजे जाते हैं। पुणे से गुलाब विदेशों को भेजे जाते हैं लेकिन इस वर्ष दोनों ही शहरों के फूलों पर मंदी भारी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 50 सेंटीमीटर या अधिक लंबाई वाले गुलाब के फूलों और तीन से छह सेमी की कलियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी माँग होती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि केवल वेलेंटाइन दिवस पर ही लाल गुलाबों की 1 करोड़ से डेढ़ करोड़ टहनियों समेत गुलाब भेजे जाते रहे हैं। पर इस बार अगर अस्सी लाख स्टेम्स भी भेजी जा सकें तो बेहतर बात होगी। पिछले वर्ष सितंबर में ही फ्लोरीकल्चर निर्यात 40 फीसदी नीचे चला गया था। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 45 फीसदी की गिरावट है लेकिन फिर भी उम्मीद की जा रही है कि वेंलेंटाइन डे के दिन तक बाजार में सुधार होगा।
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