Friday, April 27, 2012

एनडी तिवारी को देना होगा ब्लड सैंपल

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें कहा गया था कि काग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को पितृत्व संबंधी मामले में खून के नमूने देने को बाध्य नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि तिवारी को डीएनए जांच के लिए खून का सैंपल देना ही होगा और अगर इसमें वह आनाकानी करते हैं तो पुलिस की मदद ली जा सकती है।

Thursday, April 26, 2012

नरेंद्र मोदी को अमरीकी वीजा नहीं


अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने अपनी नियमित प्रेस कांफ्रेस में कहा, “मोदी के वीजा के मुद्दे पर हमारे रुख में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है.”
नुलैंड अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को लिखे अमरीकी सांसद जो वाल्श के उस पत्र के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थीं, जिसमें उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री को राजनयिक वीजा देने के बारे में सरकार के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था .
कहा जा रहा है कि वाल्श ने लगभग पंद्रह दिन पहले यह पत्र लिखा. इस पत्र पर अमरीकी भारतीय मुस्लिम समुदाय (आईएएमसी) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
इस समुदाय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि विदेश विभाग को मोदी को वीजा देने के बारे में अपनी 2005 की नीति को नहीं बदलना चाहिए.
महत्वपूर्ण है मोदी ने मार्च 2005 में अमरीकी वीजा के लिए आवेदन किया था. वह एशियाई अमरीकी होटल मालिकों के सालाना सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमरीका जाना चाहते थे.

दिल्ली में महिलाओं के लिए हेलमेट होगा जरूरी

राजधानी में दोपहिया वाहनों पर चालक के साथ बैठने वाली महिलाओं के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य हो जाएगा। हाईकोर्ट ने सुरक्षा का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार को इसके लिए कानून में बदलाव करने को कहा है। कानून में संशोधन के बाद पगड़ी नहीं पहनने वाले सिखों को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के सीकरी और जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने कानून में बदलाव के लिए दो महीने का वक्त दिया है। पीठ ने सरकार से इसकी रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके।

तेंदुलकर को रास सदस्य मनोनीत करने की सिफारिश

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री रेखा सहित चार प्रतिष्ठित हस्तियों को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत करने की सिफारिश की गई है।
क्रिकेट की दुनिया में बुलंदियां छू चुके 39 वर्षीय तेंदुलकर और हिन्दी सिनेमा की 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्री रेखा संविधान के एक प्रावधान के तहत संसद के उच्च सदन की सदस्यता हासिल करेंगे। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति 12 सदस्यों को उच्च सदन के लिए मनोनीत कर सकते हैं।

Saturday, April 7, 2012

बहुमत, बहुगुणा और बखेड़ा

देहरादून, विधानसभा चुनाव नतीजों को घोषित हुए एक महीना बीत चुका है लेकिन उत्तराखंड की जनता ने सियासी दलों को जो खंडित जनादेश दिया है उसने दलों के भीतर नेताओं की मर्यादाओं को भी खंड-खंड कर दिया है। कांग्रेस तो इस खंडित जनादेश से परेशान है ही भाजपा की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। भाजपा और कांग्रेस को मिले खंडित जनादेश में छोटे दलों और निर्दलियों की बल्ले-बल्ले हो रही है। कांग्रेस सरकार बनाने में भले ही कामयाब हो गई हो लेकिन समर्थन दे रहे निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के विधायक अब भी बंदूक लेकर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को डरा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री की कैबिनेट के सदस्य भी मौका देखकर उन्हें चाकू दिखाकर डराने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में संभवतः मुख्यमंत्री विजय बहुुगुणा रात को संतुष्ठी के इस भाव से झपकी लेते होंगे कि ‘चलिए एक दिन और कट गया’। खंडित जनादेश के कारण उत्तराखंड में सरकार होने के बावजूद सरकार होने का अहसास ही नहीं हो रहा है। यह सिर्फ विजय बहुगुणा या कांग्रेस की चिन्ता नहीं है बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की चिन्ता है। सरकार किसी भी दल की बने लेकिन यदि वह बहुमत में नहीं है तो उस सरकार के चलने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। जिस तरह से खंडित जनादेश ने सरकार चलाने वालों को असहाय कर दिया है उससे तीव्र गति से विकास की कल्पना करना बेईमानी सा लगता है। इसमें दोष मुख्यमंत्री का नहीं है बल्कि सरकार चलाने के लिए जो आंकड़ा चाहिए, दोष उस आंकडे़ तक नहीं पहुंच पाने का है। दुर्भाग्य से जिनके बूते सरकार बनाने का आंकड़ा विजय बहुगुणा छू रहे हैं उनकी प्राथमिकता में विकास की बजाए मंत्री पद है। ऐसे में बहुगुणा यदि उन्हें खुश कर रहे हैं तो पार्टी के भीतर डैमेज कंट्रोल करना टेड़ी खीर साबित हो रहा है। नतीजा सामने है कि सरकार होने का अहसास ही नहीं हो रहा है।
  खंडित जनादेश ने जिस तरह से सरकार व उसके मुखिया को पंगु बनाया है। उससे यह चिन्ता बढ़ गयी है कि क्या सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। और यदि सरकार कार्यकाल पूरा कर सकी तो क्या मुख्यमंत्री फ्रंटपुफट पर रहकर विकास के चौके-छक्के मार पायेेंगे। यह बड़ा सवाल है। जिस तरह से मौजूदा सरकार फिलहाल बैकपफुट पर है उसने मतदाता को यह अहसास करा दिया है कि लोकतंत्र के महापर्व में जनता जनार्दन को समझ-बूझकर मतदान करने की है। किसी एक दल की सरकार यदि पूर्ण बहुमत में होगी तो उस दल के सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं होगी।

Monday, February 27, 2012

केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव!

नई दिल्ली। संसद को अपराधियों का अड्डा बताने वाले अन्ना हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राजनीतिक दलों ने तीखा हमला बोला है। अपने मतभेदों को भुलाकर सभी पार्टियों ने कहा है कि केजरीवाल की घृणित टिप्पणी से यह पता चलता है कि उनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। वहीं राजद केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है।कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि यह संसद का अपमान है। यह इस देश की जनता का अपमान है, जो सांसदों और विधायकों को चुनकर भेजती है। ऐसे बयानों से लोकतंत्र कमजोर होता है। ऐसे लोगों का प्रचार नहीं करना चाहिए। संसद में ऐसे लोगों का बहुमत है जो इस देश के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। वे सभी वहां कड़ी मेहनत से पहुंचे हैं।भाजपा ने केजरीवाल के बयान पर आक्रोश जताते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को ईमानदार के रूप में पेश करने की कोशिश में यह एहसास कराते हैं कि पूरी दुनिया बेईमान हैं। इससे पता चलता है कि उन्हें संविधान और लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। पार्टी के महासचिव मुख्तार अब्बास नकवी ने यह स्वीकार किया कि संसद में कुछ लोगो दागी हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए आप संसदीय प्रणाली या लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म नहीं कर सकते।लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा है कि यह लोकतंत्र पर हमला है। यह उन लोगों की मानसिकता का परिचायक है। पासवान ने उन नेताओं को भी आड़े हाथ लिया, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्न हजारे के आंदोलन में उनके साथ मंच साझा किया था।गौरतलब है कि उत्तार प्रदेश के गाजियाबाद में शनिवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि इस संसद में 163 सदस्यों पर जघन्य अपराध के मामले हैं। इस संसद में बलात्कारी, लुटेरे और हत्यारे बैठे हैं। आप कैसे उम्मीद करते हैं कि यह संसद जन लोकपाल बिल को पारित कर देगी? आपको गरीबी और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला देगी?केजरीवाल के बयान पर बाबा रामदेव ने कोच्चि में कहा कि केजरीवाल के शब्दों और भाषा पर आपत्तिहो सकती है लेकिन उन्होंने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है। अगर हम सांसद चुन सकते हैं तो उनके खिलाफ भी बोल सकते हैंटीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल संसद के बजट सत्र में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगा। राजद यह प्रस्ताव केजरीवाल के सांसदों के ऊपर दिए गए गैरवाजिब टिप्पणी पर लाएगा।पार्टी महासचिव राम कृपाल यादव ने रविवार को कहा कि केजरीवाल ने अपनी टिप्पणी से संसद, उसके सदस्यों और मतदाताओं का अपमान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। इसके साथ ही केंद्र से मांग कर दी कि उन्हें तुरंत राष्ट्रद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जाए।यादव ने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ता केजरीवाल विदेशी ताकतों की शह पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर व कमजोर करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा केजरीवाल ऐसा इस लिए कर रहे हैं क्योंकि अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को लोगों ने अस्वीकार कर दिया है।

Friday, February 17, 2012

भाजपा सरकार के शासनादेशो को पलटती भाजपा सरकार। भाजपा सरकार के शासनादेशो को पलटती भाजपा सरकार।


निशंक कार्यकाल में हुए आदेश को खुंडरी ने पलटा।

लोकायुक्त कार्यालय को दी गई जमीन सतर्कता विभाग को यौंपी।

नारायण परगांई।

देहरादून। सरकार के आदेश को परिवर्तित करने का काम नई सरकार के गठन के बाद होता हुआ तो जरूर देखा होगा लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार अपने ही शासन मे हुए आदेशो को ही पलटती हुई देखी जा रही है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा सरकार के भीतर किस तरह का शीतयुद्व लगातार जारी है। ऐसा नही है कि भाजपा के सभी बड़े नेता एकजुट होकर विकास की बात करते हो जबकि भाजपा हाइकमान कई बार भाजपा के उत्तराखण्ड नेताओ को एकजुट रहते हुए विकास पर ध्यान देने की नसीहत दे चुका है। लेकिन इसके बाद भी भाजपा सरकार हाइकमान के आदेशो पर कोई ध्यान नही दे रही। विधानसभा चुनाव का मतदान निपट जाने के बाद चुनाव परिणाम आने से पहले जिस तरह भाजपा के भीतर भीरतघात किए जाने की बातो को लेकर भाजपा हाइकमान के दरबार में उत्त्राखण्ड के नेताओ ने दस्तक दी वह निश्चित रूप से एक दुसरे को नीचा दिखाने के सिवा और कुछ नही थी। उत्तराखण्ड में 2012 के विधानसभा चुनाव में पूरी भाजपा को दांव पर लगाकर जिस तरह खंडूरी है जरूरी का नारा जनता के बीच प्रस्तुत किया गया इसका क्या परिणाम रहेगा यह तो 6 मार्च को मतगणना के बाद तय हो जाएगा लेकिन इस नारे ने उत्त्राखण्ड की भाजपा को एकजुट करने के बजाए बिखराव की ओर बड़ा दिया। राजनैतिक लड़ाई सभी दलो में लगातार सामने आती रहती है लेकिन यदि मौजूदा सरकार के शासनकाल में ही पुराने आदेशो को पलटने का खेल खेला जाना शुरू हो जाए तो यह सरकार के लिए बेहद सोचनीय विषय बन जाता है। गौरतलब है कि बीती 4 मार्च 2011 को प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. निशंक के शासनकाल में ग्राम लाडपुर क्षेत्र में जिला देहरादून में 0.296 हैक्टेयर भूमि लोकायुक्त कार्यालय हेतु शासनादेश संख्या 554 के माध्यम से दिए जाने का शासनादेश जारी किया गया था और पिछले काफी समय से लोकायुक्त का अपना कार्यालय ना हो पाने के कारण कार्यालय खुल जाने की उम्मीदें जाग गई थी। मौजूदा समय में लोकायुक्त कार्यालय उत्त्राखण्ड में मौजूद तो है लेकिन वहां स्थान का अभाव होने के कारण कुछ समस्याएं जरूर खड़ी है लेकिन 11 सितम्बर के बाद उत्त्राखण्ड में पूर्व सीएम निशंक के शासनकाल में हुए कई आदेशो को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद मौजूदा सीएम खंडूरी ने पलटना शुरू कर दिया और लोकायुक्त कार्यालय की जमीन के शासनादेश को दिनांक 14 फरवरी को पलटते हुए लोकायुक्त कार्यालय के लिए दी गई जमीन सतर्कता विभाग उत्त्राखण्ड को एक हैक्टेयर भूमि देने का आदेश जारी कर दिया गया ऐसा नही है कि उत्त्राखण्ड सरकार पूर्व में किए गए कई अन्य आदेशो को भी ना पलटती हुई दिखी हो ऐसे कई आदेश खंडूरी शासनकाल में पलट दिए गए जिन्हे नही पलटा जाना चाहिए था। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्तमान भाजपा सरकार के भीतर शीतयुद्व काफी तेज गति से चल रहा है। इस तरह के आरोप कांग्रेस भाजपा पर लगाती हुई नजर आती थी लेकिन मौजूदा खंडूरी सरकार ने जिस तरह आदेशो को पलटना शुरू किया है अब कांग्रेस को इस तरह के आरोप लगाने की जरूरत नही आती हुई देखी जा रही यह काम खुद सत्ता में बैठी खंडूरी सरकार करती हुई नजर आ रही है। ऐसे में पुनः सत्ता वापसी का सब्जबाग देखना कहां तक सफल होगा इसका आंकलन खुद ही किया जा सकता है। एक तरफ भाजपा उत्त्राखण्ड में खुडूरी के नेतृत्व में चुूनाव लड़कर पूरी भाजपा को दांव पर लगा बैठा है वही दूसरी तरफ इस तरह के आदेश भाजपा के भीतर ही कई तरह के विवादो को जन्म भी देते हुए नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर सरकार के बाहर मतभेदो की लड़ाई चलने की बातें जो साबित नही हो पाती थी वह खंडूरी के शासनकाल में इा शासनदेश को पलट देने से साबित हो जाती है कि मौजूदा समय में भी खंडूरी निशंक के कार्यकाल में हुए शासनादेश को पलटने का खेल खेलने में लगे हैं।