Wednesday, October 20, 2010
खजानदास को जान का खतरा!
देहरादून। स्वच्छ छवि, स्वभाव से सीध्े सरल और ईमानदार, ऐसा कोई कार्य नहीं किया कि कोई सामान्य व्यक्ति भी उन्हें ध्मकी देता, मापिफया, आतंकवादियों की बात दूर रही, पिफर भी जान का खतरा! ह ना हैरान करने की बात। पशोपेश में मत पडिये, चलिऐ बता देते है कि यह खतरा किसी को नहीं बल्कि अपने कैबिनेट मंत्राी खजानदास को है। शायद आप विश्वास न करें लेकिन खजानदास को यह खतरा महसूस हो रहा है। तभी तो उन्होंने रिवालर/पिस्टल का लाईसेंस लिया है। यूॅ तो वह नये-नये कैबिनेट मंत्राी बने है। सुरक्षा के लिए सूबे की सरकार ने उन्हें गनर मुहिया करा रखा है। हैसियत वाले है, मात्रा सूचना देने पर आनन-पफानन में पुलिस की गार्द आ सकती है। लेकिन शायद इतने भरसे वे संतुष्ट नहीं है। इस लिए सारे नियमों को दरकिनार करते हुए उन्होंने रिवाल्र का लाईसेंस लिया है। रिवालर का लाइसेंस लेने की एक प्रक्रिया है। अगर कोई सामान्य व्यक्ति या व्यापारी रिवालर या पिस्टल का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन करें तो इसके लिए जटिल प्रक्रिया से गुजरना होता है। मसलन 16 थानो की रिर्पोट लगती है। रिवालर का लाइसेंस पाने के लिए महीनों आम आदमी को पुलिस से लेकर जिला प्रशासन तक के चक्कर काटने पडते है और रिवालर व पिस्टल का लाइसेंस किस लिए लिया जाना है उसके लिए आम आदमी को अपना पूरा तर्क देना पडता है। देखने में आता है कि जिस थाने से लाईसेंस बनने होता है वहां का प्रभारी पहले पूरी छानबीन कर अपनी रिपोर्ट देता है और उसके बाद सभी 16 थानों से रिपोर्ट मंगाई जाती है जिसमें अच्छाकासा समय लग जाता है। इतना हीं नहीं दर्जनों आवेदन ऐसे है जो आज भी अस्लाह, क्लर्क के यहां ध्ूल पफांक रहे है क्योंकि चर्चा यहां तक है कि जब तक आवेदनकर्ता अपनी पहॅुच से कुछ अध्किारियों को रूबरू नहीं करा देता तब तक उसका लाईसेंस बनना महाभारत होता है। लेकिन अपने खजानदास के साथ ऐसा कुछ घटित नहीं हुआ क्योंकि वह ठहरे कैबिनेट मंत्राी। भला उन पर यह सारे नियम कानून लागू हो सकते है। सूत्रों के अनुसार खजानदास पुत्रा संतादास निवासी 131/2 बसंत विहार में निवास करते है और उन्होंने अपने हथियार का लाईसेंस बनाने के लिए आवेदन किया और उनकी जांच 30 अगस्त 2010 को राजधनी के पुलिस कप्तान के कार्यालय में भेजी गई। चर्चा है कि इस आवेदन को बंसत विहार थाने मंे भेजा गया जहां रिपोर्ट में अंकित किया गया कि राज्य के कैबिनेट मंत्राी खजानदास को आत्मरक्षा के लिए रिवालर व पिस्टल का लाईसेंस चाहिए जिस पर उन्होनंे अपनी रिपोर्ट प्रेषित की कि सभी थानों में खजानदास के खिलापफ कोई अपराध् दर्ज नहीं है और उसी के चलते उन्हें हथियार की संस्तुति की गई। चर्चा यहां तक है कि सभी 16 थानों से लिखित में रिपोर्ट नहीं ली गई बल्कि आवेदन में दर्ज किया गया कि सभी थानों से खजानदास के खिलापफ अपराध् की सूचना शून्य में है। सूत्रों का कहना है कि 22 सितम्बर 2010 को खजानदास का हथियार का लाईसेंस रिवालर/पिस्टल स्वीकृत हो गया और 27 सितम्बर को खजानदास ने अपना हथियार का लाईसेंस बनवा लिया। बताया जा रहा है कि यह हथियार का लाईसेंस 22 सितम्बर 2013 तक वैध् है। सवाल यह उठता है कि लाईसेंस देने वाली अथयोटी ने आनन-पफानन में मंत्राी जी का लाईसेंस देने की स्वीकृति कर दी। अब मंत्राी जी को लाईसेंस तो मिल गया है लेकिन सम्भवतः वह रिवालर/पिस्टल खोज रहे है। लेकिन यह पता नहीं है कि मंत्राी जी को रिवालर/पिस्टल पर ट्रेगर दबाना आता है भी या नहीं। शेपफटी लॉक लगाना और खोलना भी शायद उन्हें सिखना पडे। ऐसे मंे सवाल उठता है कि रिवालर की उन्हें इतनी जरूरत क्या पड गई कि सारी प्रक्रिया को चंद समय में पूरा कराकर उन्हंे लाईसेंस लेना पड गया। आखिर उन्हें किससे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है? यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार ने दायित्वधरियों से लेकर विधयकों व मंत्रियों को सरकारी गनर उपलब्ध् करा रखे है और इस राज्य में आजतक ऐसा देखने को नहीं मिला कि किसी विधयक या मंत्राी पर कोई जानलेवा हमला हुआ हो। सवाल कैबिनेट मंत्राी खजानदास से जुडा है तो यह अपने आप में हैरानी करने वाली बात है कि आखिरकार जो कैबिनेट मंत्राी सरल व साधरण किस्म के व्यक्ति के है और मसूरी व उसके आसपास उनका राजनैतिक क्षेत्रा है जहां आदमी को सम्मान देना इलाके के लोगों की रगो में कूट-कूट कर भरा है। ऐसे इलाके के अगर मंत्राी को अपनी जान का खतरा सताने लगे तो यह अपने आप में इस राज्य के लिए चिंता का विषय ही कहा जा सकता है।
Friday, October 15, 2010
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिये।
नई टिहरी/देहरादून 14 अक्टूबर, 2010 मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने बांध झील से प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने के बाद भागीरथीपुरम में टी.एच.डी.सी. निरीक्षण भवन के सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिये। डॉ. निशंक ने झील से सटे तिवाड़गांव, रौलकोट, सौड, उप्पू गांवों में जाकर प्रभावितों की समस्याएं सुनी। इस अवसर पर अधिकांश ग्रामीणों का कहना था कि टिहरी झील से उनके गांव को कभी भी क्षति हो सकती है, इसलिये उनका पूर्ण विस्थापन किया जाय। मुख्यमत्रंी से तिवाड़ गांव के 19 ऐसे परिवार है, जिनकी भूमि 90 प्रतिशत डूब गयी है, केवल मकान ही बचा है। जबकि रौलकोट के ग्रामीणों ने भी धसाव की आशंका को देखते हुए पूर्ण विस्थापन की मांग की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को मौके पर निर्देश दिये कि जी.एस.आई. की टीम जितनी जल्दी आये, उतनी जल्दी प्रभावित क्षेत्र का सर्वेक्षण करवाये, जहां जी.एस.आई. अपनी रिपोर्ट में पूर्ण विस्थापन का उल्लेख करेगा। सौड उप्पू के ग्रामीणों का कहना था कि उनकी निस्प्रयोज्य भूमि ही शेष रह गई है, जबकि उपजाऊ भूमि झील में डूब चुकी है, इसको मध्य नजर रखते हुये उन्होंने भी पूर्ण विस्थापन की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी। रौलकोट बने प्राथमिक पाठशाला भवन के विवाद के मामले जांच के आदेश देते हुये मुख्यमंत्री ने इसके लिये दोषी व्यक्ति के प्रति जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने मानको में परिवर्तन हेतु टी.एच.डी.सी. के अधिकारियों को निर्देश दिये, जिस पर अधिकारियों ने कहा कि वे इस प्रकार के प्रकरणों को समन्वय समिति की बैठक में रखकर इसका समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। अधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्री ने अवरूद्ध शेष सड़कों को तत्काल चालू करने तथा पेयजल, विद्युत लाईनों को दुरूस्त करने के निर्देश दिये। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में चीनी, मिट्टी का तेल, एवं खाद्यान्न की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी राघिका झा ने बताया कि आपदा के दौरान 19000 परिवार, 1159 गांव, 302 पूर्ण क्षतिग्रस्त मकान, 11 कच्चे मकान, 600 आंशिक क्षतिग्रस्त मकान तथा 590 करोड़ रुपये की परिसम्पत्तियों का नुकसान हुआ है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अम्बरीश चन्द्र चमोली के द्वारा रचित लघु प्रबन्ध काव्य जय रघुनायक पुस्तक का भी विमोचन किया। इस अवसर पर पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बच्ची सिंह रावत, विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पंवार, भाजपा अध्यक्ष विनोद सुयाल, पुलिस अधीक्षक केवल खुराना, मुख्य विकास अधिकारी आशीष जोशी, मुख्य महाप्रबंधक ए.के.शाह, खेम सिंह चौहान, दिनेश डोभाल, अजयपाल सिंह नेगी, जयेन्द्र सेमवाल जिला महामंत्री भाजपा सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
आई.ए.एस. व पी.सी.एस. अधिकारियों का स्थानांतरण
देहरादून 14 अक्टूबर, 2010 शासन द्वारा जनहित में आई.ए.एस. व पी.सी.एस. अधिकारियों का स्थानांतरण एवं दायित्वों में फेरबदल किया गया। यह जानकारी देते हुए अपर सचिव कार्मिक अरविन्द सिंह हयांकी ने बताया कि प्रबन्ध निदेशक कुमांयू मण्डल विकास निगम नैनीताल डॉ. पी.एस.गुसांई को स्थानांतरित करते हुए जिलाधिकारी चमोली, जिलाधिकारी नैनीताल शैलेश बगोली को उनके वर्तमान पदभार के साथ-साथ प्रबन्ध निदेशक कुमायूं मण्डल विकास निगम का पदभार सौपा गया है। जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग रमन रविनाथ को स्थानांतरित करते हुए अपर सचिव ग्राम्य विकास, वित्त तथा मुख्य समन्वयक अटल आदर्श ग्राम योजना के पद पर तैनात किया गया है। अपर सचिव ग्राम्य विकास, वित्त तथा मुख्य समन्वयक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एस.ए.मुरूगेशन को उनके वर्तमान पदभार से स्थानांतरित करते हुए जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग के पद पर तैनात किया गया है। जिलाधिकारी नीरज सेमवाल को स्थानांतरित करते हुए अपर सचिव लोक निर्माण, तकनीकी शिक्षा तथा निदेशक तकनीकी शिक्षा के पद पर तैनात किया गया है। अपर सचिव खेल, नियोजन, संस्कृति, प्रशिक्षण तथा निदेशक खेल डॉ रंजीत कुमार सिन्हा को उनके वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव धर्मस्व का पदभार भी सौपा गया है। अपर सचिव पर्यटन, लोक निर्माण तथा प्रबन्ध निदेशक गढ़वाल मण्डल विकास निगम डी.सैथिल पांडियन को उनके लोक निर्माण विभाग के पदभार से अवमुक्त किया गया है, शेष पदभार यथावत रहेंगे। आई.ए.एस. नीरज खरवाल को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व देहरादून के पद पर तैनात किया गया है। आई.ए.एस.परिवीक्षाधीन हरिद्वार ज्योति यादव को देहरादून में तैनात किया गया है। अपर सचिव नियोजन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, मुख्य समन्वयक अटल आदर्श ग्राम योजना तथा स्टॉफ ऑफिसर मुख्य सचिव प्रयाग सिंह जंगपागी को मुख्य समन्वयक अटल आदर्श ग्राम योजना के पदभार से अवमुक्त किया गया है, शेष पदभार यथावत रहेंगे। अपर सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा बाह्य सहायतित परियोजना विनोद शर्मा को उनके वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव नागरिक उड्डयन का पदभार सौपा गया है। अपर सचिव गन्ना एवं चीनी,परिवहन, नियोजन तथा नागरिक उड्डयन विनोद प्रसाद रतूड़ी को अपर सचिव नागरिक उड्डयन के पदभार से अवमुक्त किया गया है। शेष पदभार यथावत रहेगे। सचिव मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण तथा क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक गढ़वाल मण्डल सुशील कुमार को उनके वर्तमान पदभार से स्थानांतरित करते हुए मुख्य नगर अधिकारी नगर निगम देहरादून के पद पर तैनात किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी देहरादून, मुख्य नगर अधिकारी नगर निगम देहरादून इन्दुधर को मुख्य नगर अधिकारी नगर निगम देहरादून के पदभार से अवमुक्त किया गया गया है, शेष पदभार यथावत रहेंगे। महाप्रबन्धक जी.एम.वी.एन. एवं उत्तराखण्ड परिवहन निगम तथा सचिव साडा यू.सी.कबडवाल को महाप्रबन्धक उत्तराखण्ड परिवहन निगम तथा सचिव साडा के पदभार से अवमुक्त किया गया है तथा अपर सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति का पदभार अतिरिक्त रूप से सौपा गया है, शेष पदभार यथावत रहेंगे। ए.डी.एम. हरिद्वार विनोद कुमार सुमन को सचिव एम.डी.डी.ए. के पद पर तैनात किया गया है। अपर सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा विशेष कार्याधिकारी आवास एवं विकास परिषद सतीश चन्द्र बडोनी को उनके वर्तमान पदभार से स्थानांतरित करते हुए अपर सचिव ग्राम्य विकास तथा मुख्य समन्वयक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का पदभार सौपा गया है। अपर सचिव तकनीकि शिक्षा, प्रबन्ध निदेशक हिल्ट्रान, अधिशासी निदेशक कर्मचारी बीमा निदेशक, तकनीकी शिक्षा, निदेशक युवा कल्याण विजय कुमार ढौड़ियाल को अपर सचिव तकनीकी शिक्षा तथा निदेशक तकनीकी शिक्षा के पदभार से अवमुक्त किया गया है तथा अपर सचिव युवा कल्याण का पदभार अतिरिक्त रूप से सौपा गया है। शेष पदभार यथावत रहेंगे। डिप्टी कलैक्टर नैनीताल आलोक कुमार पाण्डेय को महाप्रबन्धक चीनी मिल गदरपुर, महाप्रबन्धक चीनी मिल गदरपुर संजय कुमार को ए.डी.एम. पौडी, डिप्टी कलैक्टर देहरादून विनोद गिरी गोस्वामी को ए.डी.एम. पिथौरागढ़, डिप्टी कलैक्टर पिथौरागढ़ प्रशांत कुमार आर्या को अघिशासी निदेशक चीनी मिल किच्छा, डिप्टी कलैक्टर उत्तरकाशी सुन्दर लाल सेमवाल को डिप्टी कलैक्टर टिहरी, डिप्टी कलैक्टर देहरादून हंसा दत्त पाण्डेय को डिप्टी कलैक्टर उत्तरकाशी, डिप्टी कलैक्टर नैनीताल श्रीश कुमार को डिप्टी कलैक्टर बागेश्वर, डिप्टी कलैक्टर ऊधमसिंहनगर प्रकाश चन्द्र दुमका को डिप्टी कलैक्टर पिथौरागढ़, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व देहरादून एस.एन.पाण्डेय को अपर जिलाधिकरी हरिद्वार के पद पर तैनात किया गया है।
Monday, September 20, 2010
राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता से संचालित किये जा रहे है। निशंक’
अल्मोडा/देहरादून 20 सितम्बर, 2010 प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को अल्मोडा जनपद का व्यापक भ्रमण किया। उन्होंने भारी वर्षा के कारण भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का हैलीकाप्टर से हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री ने बाड़ी बल्टा क्षेत्र में पैदल जाकर अतिवृष्टि एवं भूस्खलन से हुई क्षति को देखा तथा ग्रामवासियों से मुलाकात कर उनका दुःख दर्द जाना। उन्होंने ग्रामवासियों को इस विपदा की घड़ी से उबरने के लिए ढांढस बॅधाया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को एक-एक लाख रूपये की सहायता दिये जाने की भी घोषणा की। उन्होंने मुख्यालय से लगे देवली ग्राम सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में अतिवृष्टि, भूस्खलन एवं बाढ़ के कारण हुई मौतों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को हर सम्भव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा प्रधानमंत्री से राज्य को आपदाग्रस्त राज्य घोषित करते हुये 5000 करोड़ रूपये तत्काल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने जिलाधिकारी सुबर्द्धन सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तेजी से राहत कार्य चलाने के निर्देश देते हुये कहा कि लोगों को राहत पहॅुचाने में धन की कमी आड़े नहीं आयेगी। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम व्यक्ति का जीवन बचाने के लिये कार्यवाही करते हुये असुरक्षित स्थानों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों में विस्थापित करें। उसके उपरान्त क्षति का आंकलन कर सूचना शीघ्र से शीघ्र शासन को भेजें। उन्होंने निर्देश दिये कि बन्द पड़ी सभी सड़कों को तुरन्त खुलवायें ताकि यातायात चालू हो सके और अन्तरिम रूप से लोगों के लिये खाद्यान्न की व्यवस्था की जाय। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाये कि आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि न हो। उन्होंने कहा कि जहॉ-जहॉ भी लोग विस्थापित किये गये हैं उनके लिये भोजन की व्यवस्था की जाय। इसी प्रकार उन्होंने बिजली, पानी तथा रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं को भी पुनर्स्थापित करने के निर्देश दिये ताकि जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। जिलाधिकारी सुबर्धन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि जनपद में राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता से संचालित किये जा रहे है। जिले के अन्तर्गत सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों एवं सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि विस्थापितों के लिये निःशुल्क भोजन, पेयजल आदि की व्यवस्था करें तथा संवेदनशील स्थानों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों में भेजें। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि अभी तक जिले में अतिवृष्टि एवं भूस्खलन के कारण 33 लोगो की मृत्यु हुई है जिनमें से 06 देवली गॉव से, 13 बाड़ी बल्टा गॉव से, 04 पिल्खा से, 02 जोस्याणा से, 02 नौला से, 01 असगोली से, 01 कफड़ा से, 01 सदीलैण (सल्ट), 01 तिमिलचनौला (भिकियासैंण) और 02 स्योंतरा (भिकियासैंण) में के है। उन्होंने बताया कि यह संख्या बढ़ भी सकती है क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में शवों को खोजने का कार्य जारी है।मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने राहत कार्य में लगे सभी ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों के साथ-साथ सेना, आईटीबीपी, पुलिस, एस.एस.बी. व प्रशासन तथा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए जनता से धैर्य रखकर इस संकट से एकजुट होकर निपटने की अपील की। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल, विधायक अजय टम्टा, जिलाध्यक्ष अरविन्द बिष्ट, जिलाधिकारी सुबर्द्धन, पुलिस कप्तान सी.डी.पन्त, एस.डी.एम. एन.एस.क्वीरियाल, सहित अनेक लोग मौजूद थे। 09837261570
Tuesday, September 14, 2010
खराब मौसम में टिहरी पहुंचे सीएम
,14सितम्बर। लोगों की समस्याओं को करीब से देखने की ललक आज मुख्यमंत्राी को खराब मौसम में भी टिहरी खींच लाई। मुख्यमंत्राी ने टिहरी झील से छोड़े गये पानी से हो रही लोगों की दिक्कतों को देखा और लोगों की समस्याएं सुनकर अध्किारियों को समस्याओं का निराकरण करने के आदेश दिये। मुख्यमंत्राी ने टिहरी झील का हैलीकॉप्टर से निरीक्षण भी किया। गौरतलब है कि भीषण बारिश के कारण टिहरी झील का जल स्तर बढ़ गया है जिसके चलते झील से पानी छोड़ना पड़ा। झील के पानी से आस पास के कई इलाकों में बाढ़ की समस्या पैदा हो गयी है और पानी बढ़ने के कारण गांवों में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है। लोगों की समस्याओं को करीब से देखने के लिए मुख्यमंत्राी पिछले तीन दिनों से प्रभावित इलाकों में भ्रमण का कार्यक्रम बना रहे थे लेकिन मौसम उनका साथ नहीं दे रहा था, जिसके चलते भ्रमण का कार्यक्रम लगातार टल रहा था। आज मौसम थोड़ा खुला तो मुख्यमंत्राी हैलीकॉप्टर से टिहरी झील की ओर रवाना हो गये वह चिन्यिालीसौड़ स्थित हैलीपैड पर उतरे। इसके बाद उन्होने प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनी। उन्होने मौके पर मौजूद अध्किारियों को सभी समस्याओं का निराकरण शीघ्र करने के आदेश दिये। मुख्यमंत्राी ने कहा कि क्षेत्रा की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर है। अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर वह शीघ्र ही अध्किारियों के साथ बैठक कर प्रभावित लोगों को राहत दिलायेंगे। लोगों की समस्याएं सुनने के साथ साथ मुख्यमंत्राी ने टिहरी झील और प्रभावित इलाकों का हैलीकॉप्टर से निरीक्षण भी किया। हवाई निरीक्षण के दौरान चम्बा की पहाड़ियों पर मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्राी के हैलीकॉप्टर को )षिकेश के स्वर्गाश्रम स्थित हैलीपैड पर उतारना पड़ा। जिसके बाद कुछ देर इंतजार के बाद मौसम खुलने पर मुख्यमंत्राी पुनःचिन्यालीसौड़ पहुंचे और बाद में देहरादून के लिए रवाना हो गये। इस दौरान उनके साथ सिचाई मंत्राी मातवर सिंह कंडारी, गढ़वाल के आयुक्त एनबी नब्याल, जनसंपर्क अध्किारी चौहान भी मौजूद थे। 09837261570
Friday, September 10, 2010
वन विकास अभिकरण का गठन किया जा रहा है, निशंक
.jpg)
मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरूवार को एफ.आर.आई. के आईसी.एफ.आर.ई. सभागार में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री वन पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना का शुभारम्भ किया। उन्होंने कार्यक्रम में वन पंचायत का लोगो जारी करते हुए प्रत्येक वर्ष राज्य में 9 सितम्बर को वन पंचायत दिवस मनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का ऐसा विशिष्ट प्रदेश है, जहां 12 हजार से अधिक वन पंचायते है। उन्होंने कहा कि वन पंचायतें उत्तराखण्ड के विकास में नींव का पत्थर साबित होंगी। वन पंचायत प्रदेश की अर्थ व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने कहा कि वन पंचायत सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गई है। वन पंचायतों के माध्यम से महिला किसान नर्सरी व मनरेगा योजनाओं में विभिन्न वानिकी कार्य किया जा रहा है। अटल आदर्श ग्राम योजना के तहत 171 वन पंचायतों को चिन्हित किया गया है। राष्ट्रीय वनीकरण योजना के तहत वित्त पोषण हेतु राज्य वन विकास अभिकरण का गठन किया जा रहा है, जिसके तहत 412 वन पंचायतों में वनीकरण, जल संरक्षण आदि कार्यों का प्रस्ताव है। उन्होंने वन पंचायतों से सम्बन्धित जागरूकता कार्यशालाएं जिला व विकासखण्ड स्तर तक आयोजित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए 108 की सेवा को जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों पर निर्भर ग्रामीणों के लिए जलावनी लकड़ी और चारा आदि के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी करनी होगी। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्याओं से लड़ने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों को महिला पौधालयों और जड़ी बूटी कृषिकरण से भी जोड़ा जाना चाहिए। कार्यक्रम में अच्छा कार्य कर रही वन पंचायतों के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री डॉ. निशंक द्वारा पुरस्कृत भी किया गया। पुरस्कार पाने वालों में अल्मोड़ा भूपाल सिंह भण्डारी, चमोली की सुनंदा देवी, पौड़ी के मोहन सिंह, चमोली के यशवंत सिंह चौहान, उत्तरकाशी के प्रताप पोखरियाल प्रमुख थे। मुख्य सचिव एन.एस.नपलच्याल ने कहा कि मुख्यमंत्री वन पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना को कैम्पा योजना से पोषित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अगले दस वर्षों में इस योजना में 80 करोड़ खर्च किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि अभी तक वन पंचायतों के 21 हजार 500 से अधिक सदस्यांे को वन पंचायत नियमावली, माइक्रोप्लान बनाने की कार्यवाही और वनों को अग्नि से बचाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 2963 वन पंचायतों के माइक्रोप्लान बन चुके है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के क्रम में इस वर्ष 300 वन पंचायतों में 1500 प्रतिमाह प्रोत्साहन धनराशि पर एक-एक वन पंचायत सहायकों की नियुक्ति की जायेगी। पिरूल के व्यावसाियक उपयोग पर जोर दिया गया है, इसके लिए एक प्रति किलोग्राम की दर से वन पंचायतों को भुगतान किया जायेगा। वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष अनिल बलूनी ने कहा कि वन पंचायतों को चारा विकास, जड़ी बूटी कृषिकरण, जल संवर्द्धन आदि माध्यमों से अपने आय के स्रोतों को बढ़ाना चाहिए। प्रमुख वन संरक्षक वन डॉ. आर.बी.एस.रावत ने कहा कि वन पंचायतों की निधि में लगभग 10 करोड़़ की धनराशि है। प्रदेश की वन पंचायतों के दु्रत विकास के लिए इन्हें मनरेगा, ग्राम्या, बांस एवं रेशा परिषद आदि द्वारा भी जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिरूल को बडे पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की योजना है। इस अवसर पर जड़ी बूटी विकास परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार, अपर मुख्य सचिव सुभाष कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग तथा विभिन्न जनपदों से आये वन पंचायतों प्रतिनिधि उपस्थित थे।
Wednesday, September 1, 2010
सरकार देश एवं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैनिशंक
देहरादून 31 अगस्त, 2010 मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से एनेक्सी स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मंगलवार को विख्यात लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य समिति के प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट की।
श्री नेगी ने मुख्यमंत्री से उत्तराखण्ड की लोक भाषाओं के समग्र विकास एवं संरक्षण के लिए लोक भाषा अकादमी का गठन करने की मांग की। श्री नेगी ने कहा कि जहां एक ओर भारतीय भाषाओं की मानक शोध संस्था साहित्य अकादमी द्वारा गढ़वाली-कुमाऊंनी को अपनी सूची में 16वें एवं 17वें स्थान पर रखा गया है, वहीं दूसरी ओर ये भाषाएं संविधान की 8वीं सूची में अपना स्थान नहीं बना पायी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से गढ़वाली-कुमाऊंनी भाषाओं को प्राथमिक स्तर पर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की मांग की।
मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने प्रतिनिधिमण्डल को यथोचित कार्यवाही का आश्वासन देते हुए सचिव भाषा और निदेशक भाषा शोध संस्थान को उपरोक्त मांगो पर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में गठित किये गये भाषा शोध संस्थान के ऊपर क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्द्धन एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी है। आवश्यकता पड़ने पर लोक भाषाओं के लिए अलग से भी संस्थान पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल-कुमाऊंनी सहित उत्तराखण्ड की अन्य लोक भाषाएं अत्यन्त समृद्ध हैं, और इनके संरक्षण संवर्द्धन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं को पाठ्यक्रमों में सम्मिलित करने के लिए सरकार सभी कर्णधारों के साथ विचार विमर्श कर आवश्यक कदम उठायेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं की मजबूती हिन्दी की संमृद्धता के लिए भी आवश्यक है। उत्तराखण्ड सरकार देश एवं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसी दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए संस्कृत को द्वितीय राज भाषा का दर्जा दिया गया है।
प्रतिनिधिमण्डल में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष त्रिभुवन उनियाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल बिष्ट, उपाध्यक्ष नरेन्द्र कठैत, प्रमोद नौटियाल, बी. मोहन नेगी, गणेश खुगशाल, विमल नेगी, ऊषा नेगी आदि सम्मिलित थे।
श्री नेगी ने मुख्यमंत्री से उत्तराखण्ड की लोक भाषाओं के समग्र विकास एवं संरक्षण के लिए लोक भाषा अकादमी का गठन करने की मांग की। श्री नेगी ने कहा कि जहां एक ओर भारतीय भाषाओं की मानक शोध संस्था साहित्य अकादमी द्वारा गढ़वाली-कुमाऊंनी को अपनी सूची में 16वें एवं 17वें स्थान पर रखा गया है, वहीं दूसरी ओर ये भाषाएं संविधान की 8वीं सूची में अपना स्थान नहीं बना पायी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से गढ़वाली-कुमाऊंनी भाषाओं को प्राथमिक स्तर पर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की मांग की।
मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने प्रतिनिधिमण्डल को यथोचित कार्यवाही का आश्वासन देते हुए सचिव भाषा और निदेशक भाषा शोध संस्थान को उपरोक्त मांगो पर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में गठित किये गये भाषा शोध संस्थान के ऊपर क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्द्धन एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी है। आवश्यकता पड़ने पर लोक भाषाओं के लिए अलग से भी संस्थान पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल-कुमाऊंनी सहित उत्तराखण्ड की अन्य लोक भाषाएं अत्यन्त समृद्ध हैं, और इनके संरक्षण संवर्द्धन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं को पाठ्यक्रमों में सम्मिलित करने के लिए सरकार सभी कर्णधारों के साथ विचार विमर्श कर आवश्यक कदम उठायेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं की मजबूती हिन्दी की संमृद्धता के लिए भी आवश्यक है। उत्तराखण्ड सरकार देश एवं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसी दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए संस्कृत को द्वितीय राज भाषा का दर्जा दिया गया है।
प्रतिनिधिमण्डल में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष त्रिभुवन उनियाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल बिष्ट, उपाध्यक्ष नरेन्द्र कठैत, प्रमोद नौटियाल, बी. मोहन नेगी, गणेश खुगशाल, विमल नेगी, ऊषा नेगी आदि सम्मिलित थे।
Subscribe to:
Posts (Atom)