Friday, April 16, 2010
यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष खरोला के हटाये जाने की संभावना
देहरादून,। प्रदेश में यूथ कांग्रेस को लेकर स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। प्रदेश में यूथ कांग्रेस के प्रवक्ताओं को लेकर फर्जी तरीके से यूथ कांग्रेस के नाम का उपयोग करते युवा कार्यकर्ता कांग्रेस की छवि को बदनाम करने में लगे हैं जबकि प्रदेश भर में भी यूथ कांग्रेस के सिफ चार ही प्रदेश प्रवक्ता काम कर रहे हैं। इससे पूर्व भी यूथ कांग्रेस में जिलाध्यक्षों व अन्य पदों को लेकर यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल खरोला पर कथित रूप से कई गंभीर आरोप कांग्रेसी कार्यकर्ता लगा चुके हैं। यहां तक कि पदों पर बैठाने की एवज में कथित रूप् से मोटी रकम का खेल तक खेले जाने की बातें सामने आती रही हैं। इतना ही नहीं विभिन्न स्थानों पर पदों पर बैठाए गए कार्यकर्ताओं को लेकर भी गुटबाजी खुलकर सडक से लेकर हाईकमान के कानों तक पहुंचाई जा चुकी है। जिसे लेकर हाईकमान ने अब गंभीर रूख अपना लिया है और माना जा रहा है कि जल्द ही यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल खरोला को उनके पद से हटाए जाने की संभावनाएं भी बढ गई है। इसके पीछे पार्टी हाईकमान का मानना है कि प्रदेश में जिस तरह की यूथ विंग की परिकल्पना को साकार किया जाना था उसे साकार कर पाने में प्रदेश की यूथ कांग्रेस पूरी तरह नाकामयाब साबित हुई है। यहां तक कि पदों पर बैठाये जाने को लेकर जिस तरह से कार्यकर्ताओं में विरोध के स्वर उठ खडे हुए उसे लेकर भी यूथ कांग्रेस प्रदेश में अपना नेटवर्क तैयार नहीं कर पाई। यहां तक यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल खरोला लोकसभा चुनाव में हरिद्वार सीट से चुनाव लडने की बात कहने के बाद हरीश रावत के विरोधी होने के रूप में सामने आए और जिस कारण दोनेां के बीच गतिरोध् बढता गया। जबकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य से भी राजपाल खरोला के संबंध् मध्ुर नहीं रहे और यूथ कांग्रेस में दोनों ही नेताओं के अनुरूप युवाओं को तवज्जो नहीं दी गई। कुल मिलाकर प्रदेशभर में मात्रा डेढ लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य यूथ कांग्रेस हासिल कर नपाई है जबकि प्रदेशभर में तीन लाख से अध्कि युवाओं को पार्टी से जोडे जाने का लक्ष्य निर्धरित किया गया था जबकि यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष खरोला का आयु सीमा को लेकर भी विरोध् के स्वर अब हाईकमान तक जा पहुचे हैं और वर्तमान में खरोला की आयु सीमा को उनके विरोध्यिों ने यूथ के नाकाबिल होने की बात हाई कमान से कही है। इसके साथ ही यूथ कांग्रेस में प्रदेश प्रवक्ता को लेकर पिछले कापफी समय से उध्मसिंहनगर के काशीपुर में युवा काय र्कर्ता जितेंद्र सरस्वती अपने को प्रदेश प्रवक्ता बताते चले आए हैं लेकिन इसका यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने खंडन किया उनका कहना है कि काशीपुर में किसी भी कार्यकर्ता को यूथ के प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी नहीं दी गई है जबकि प्रदेशभर में चार ही प्रदेश प्रवक्ता वर्तमान में काम कर रहे हैं जिनमें देहरादून में बेग शरीपफ अहमद, पिथौरागढ में रातिक राव जोशी, उत्तकाशी में हिमांशु, हरिद्वार में दीपक जखमोला यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इसके अलावा कोई भी प्रदेश प्रवक्ता वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं यदि पिफर भी कोई कार्यकर्ता अपने को प्रदेश प्रवक्ता लिख रहा है तो उसके खिलापफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। खरोला का सापफ कहना है कि राहुल गांध्ंी व महात्मा गांधी की नीतियों को आगे बढाते हुए प्रदेश में युवाओं की पफौज को बढाया जाएगा। कुल मिलाकर यूथ के प्रदेश प्रवक्ता को लेकर फर्जीवाडा सामने आ गया है
Wednesday, April 7, 2010
२०१२ के मिशन को संगठन और सरकार का मूल मंत्र
देहरादून। भाजपा के अध्विेशन में आडवाणी ने जहां कार्यकर्ताओं में नये उत्साह व ताकत का अहसास भाजपा कार्यकर्ताओं में करा दिया वहीं प्रदेश सरकार की तारीपफ के पुल भी बांध डाले जिससे सरकार को बेहतर संजीवनी मिलने के साथ-साथ उत्साह का नया संचार हो गया है। मिशन २०१२ की तैयारियों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को जहां संविधन के अनुरूप एकजुटता स काम करने की नसीहत दी गई है वहीं २०१२ के चुनाव में विजय पताका फहराने का भी मूल मंत्र दिया गया है। प्रदेशभर के पार्टी कार्यकर्ता इस उत्साह का संचार २०१२ तक करते रहें इसे लेकर भी प्रदेश के जिलाध्यक्षों व महामंत्रियों के साथ बैठक कर इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोडी गई है। कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल की अधिकारिक प्रदेश अध्यक्ष पर मुहर लग जाने के बाद उनमें भी नये उत्साह का संचार हो गया है। कम बोलने वाले बिशन सिंह चुफाल अध्विेशन के साथ-साथ कार्य समिति में कार्यकर्ताओं को भाजपा की नीतियों के साथ-साथ अपने अब तक के कार्यकाल को लेकर भी नसीहत देते नजर आए। इतना ही नहीं अपने भाषण मेंउन्होंने जहां पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया वहीं कांग्रेस पर भी जमकर राज्य की उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्तओं में नये उत्साह का संचार करते हुए २०१२ के मिशन में अभी से जुट जाने के मूल मंत्रा भी दे दिये हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला अवसर था जब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्री चुपफाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोध्ति किया हों। इससे पूर्व के प्रदेश अध्यक्ष बच्ची सिंह रावत ने भी जहां पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का संचार करने का प्रयास किया वहीं अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव में विजय पताका पफहराने के मूल मंत्रा भी कार्यकर्ताओं के साथ बांटे। हालांकि लोक सभा चुनाव को लेकर मानसिक रूप से तैयार न होने की बातें भी बचदा ने कार्यकर्ताओं से की कुल मिलाकर आडवाणीी ने जहां प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं व कुंभ को लेकर बेहतर इंतजाम किये जाने का सराहा वहीं सरकार के अब तक के कार्यकाल को बेहतर करार दिया। एक मंच पर जुटे प्रदेश के सभी नेताओं को देखकर कार्यकर्ताओं भी जिस तरह से नये उत्साह का संचार हुआ है उसे लेकर कांग्रेस में खलबली मच गयी है। हमेशा से ही कांग्रेस भाजपा पर गुटबाजी में उलझे होने का आरोप लगाती आई है लेकिन जिस तरह से भाजपा के अधिवेशन में खंडूडी, कोश्यारी, ध्यानी के साथ-साथ प्रदेश भर के पार्टी नेताओं ने एक जुटता का परिचय दिया है उसस कार्यकर्ताओं के उत्साह में नया संचार देखा जा रहा है। यदि २०१२ के चुनाव तक पार्टी कार्यकर्ताओं में इसी तरह का उत्साह बना रहा तो निश्चित रूप से विधनसभा चुनाव में कांग्रेस के गणित को भाजपा बिगाड सकती है। कुल मिलाकर भाजपा की ताकत ने कांग्रेस के दिग्गजों को हिलाकर रख डाला है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल की भी २०१२ के विधनसभा चुनाव को लेकर अग्निपरीक्षा अध्किारिक घोषणा होने के बाद शुरू हो गयी है। भाजपा के अध्विेशन में आडवाणी ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय देते हुए कार्य करने की नसीहत कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रदेश के पदाधिकारियों को दी है उसका कितना असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर पडता है यह भी देखने लायक होगा।े वहीं गुटबाजी में उलझने के कारण लोकसभा चुनाव की हार को भी लेकर पार्टी कार्यकर्ता ने आत्म मंथन किया है और इस पीडा को भाजपा के निर्वतमान प्रदेश अध्यक्ष बच्ची सिंह रावत कार्यकर्ताओं के बीच बयां भी कर गये हैं। वहीं भगतसिंह कोश्यारी ने पद छोडने की बात जिस तरह से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कही है उसे लेकर भी इन बातों को बेहद गंभीर माना जा रहा है कुल मिलाकर गुटबाजी से उभरने के बाद यह पहला अवसर था जब संगठन और सरकार मिलकर पार्टी कार्यकर्ताओं को २०१२ का मूल मंत्रा दने में कामयाब रहे हैं और भाजपा के शीर्ष नेता आडवाणी की उपस्थिति भी कार्यकर्ताओं में नये उत्साह का संचार कर गई है।
Saturday, April 3, 2010
अभी ७ हजार शिक्षकों की कमी है।
अप्रैल से देशभर में शिक्षा का मौलिक अधिकार लागू हो गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मौजूदा सिस्टम नाकाफी है। जिले में अभी ७ हजार शिक्षकों की कमी है। आलम यह है कि एक शिक्षक के भरोसे सैंकड़ों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शिक्षा विभाग के लिए कड़ी चुनौती से कम नहीं है। इधर निजी स्कूल संचालक २५ फीसदी सीट गरीब बच्चों को देने में नाक-भों सिकोड़ रहे हैं। कानूनन अनिवार्य की गई शिक्षा के लिए जिले में १३ हजार से ज्यादा शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि अभी महज ५ हजार ७०० शिक्षक ही कार्यरत हैं। अधिनियम लागू होने के बाद शिक्षा विभाग ने शत-प्रतिशत बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कमर कस ली है। ताबड़तोड पालकों से संपर्क कर स्कूल में दाखिला कराया जा रहा है लेकिन अभी विभाग के पास शिक्षकों का खासा टोटा है। अच्छी शिक्षा के लिए छात्र संख्या के मान से जिले में १३०९९ शिक्षक चाहिए, लेकिन विभाग में केवल ५ हजार ७६५ शिक्षक ही है। यानि अधिनियम संचालित करने के लिए जिले में ७ हजार १६४ शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों के अभाव में विभाग बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के प्रयास में लगा है। इसके लिए उन्होंने ६ माह की समयावधि दी है लेकिन इनकी पूर्ति कैसे होगी, इसकी योजना तक अभी नहीं बनाई गई है।सुविधाओं का अभाव : ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों स्कूलों के हालात ऐसे हैं कि वहां कक्षा 1 से लेकर ५ तक बच्चों के लिए एक या दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। उससे भी बढ़कर बात यह है कि एक या दो कमरों में कई कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। अधिनियम लागू होने के बाद शासकीय व अशासकीय स्कूलों में बच्चों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाना आवश्यक है लेकिन अधिकांश स्कूल बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। स्कूलों में न तो पानी की व्यवस्था है और न ही खेलने के लिए मैदान। ऐसे में बच्चों को मजबूरन अव्यवस्थाओं के बीच शिक्षा प्राप्त करना होगी। पढ़ाई के साथ फिटनेस का भी ख्याल : पढ़ाई के साथ स्कूलों में अब बच्चों को फिटनेस का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में अलग से फिटनेस टीचर नियुक्त किए जाएंगे, जो स्कूल पढ़ाई के बाद अलग से कक्षा लेकर बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रहने के तरीके बताएंगे।ञ्चराइट टू एजुकेशन शुरू होने के बाद छात्र संख्या के मान से शिक्षक नियुक्त होना है। इसके लिए जिले में आवश्यकतानुसार आगामी ६ माह में पदों की पूर्ति की जाना है। वहीं संस्थाओं में बुनियादी सुविधाएं जुटाने की निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
Wednesday, March 31, 2010
1 अप्रैल से शुरू होगी जनगणना 2011
हर 10 साल पर होने वाली जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू हो र
ही है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जनगणना 2011 की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत करेंगी। गृह सचिव गोपाल कृष्ण पिल्लई ने मंगलवार को बताया कि जनगणना दो चरणों में होगी। इस बार राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (एनपीआर) तैयार किया जाएगा। पहली बार देश के नागरिकों का व्यापक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। आजादी के बाद सातवीं बार देश में जनगणना हो रही है। 25 लाख सरकारी कर्मचारी इस काम को अंजाम देंगे। देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रह रहे करीब एक अरब बीस करोड़ लोगों की वैज्ञानिक ढंग से गणना की जाएगी। जनगणना की यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में घर-घर जाकर लोगों की लिस्ट तैयार की जाएगी। 1 अप्रैल से जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए आंकड़े भी जमा किए जाएंगे। मुख्यत: पहला चरण 45 दिन में पूरा किया जाएगा। जनगणना की शुरुआत के दिन 1 अप्रैल को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अपने जनगणना फॉर्म भरेंगे। दिल्ली में पहले चरण की प्रक्रिया 1 से 6 अप्रैल तक चलेगी। गृह सचिव के मुताबिक, आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो इससे पहले दुनिया में कहीं भी इतने बड़े पैमाने पर लोगों के बारे में जानकारी जमा करने का काम नहीं किया गया है। इस अभियान के दौरान देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 640 जिलों, 5767 तहसीलों, 7742 कस्बों और 6 लाख से भी ज्यादा गांवों को कवर किया जाएगा। जनगणना के काम में लगे कर्मचारी 24 करोड़ से भी ज्यादा घरों में जाएंगे और 120 करोड़ लोगों के बारे में हर संभव जानकारी जुटाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार करीब 2,209 करोड़ रुपये खर्च करेगी। राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर पर करीब 3,756 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का मानना है कि जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद देश के नागरिकों से जुड़े हर पहलू की जानकारी हासिल करना बेहद आसान हो जाएगा। इस जनगणना में अर्थव्यवस्था, शिक्षा, लोगों द्वारा अलग-अलग अपनाए गए रोजगार, साक्षरता, कुल घर और उनमें रहने वाले लोगों को ब्यौरे के साथ-साथ उनसे जुड़ी हर जानकारी ली जाएगी। सरकार ने जनगणना के दौरान सीमावर्ती इलाकों में खास सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए हैं। इस बात की आशंका है कि सीमापार से लोग राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
ही है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जनगणना 2011 की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत करेंगी। गृह सचिव गोपाल कृष्ण पिल्लई ने मंगलवार को बताया कि जनगणना दो चरणों में होगी। इस बार राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (एनपीआर) तैयार किया जाएगा। पहली बार देश के नागरिकों का व्यापक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। आजादी के बाद सातवीं बार देश में जनगणना हो रही है। 25 लाख सरकारी कर्मचारी इस काम को अंजाम देंगे। देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रह रहे करीब एक अरब बीस करोड़ लोगों की वैज्ञानिक ढंग से गणना की जाएगी। जनगणना की यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में घर-घर जाकर लोगों की लिस्ट तैयार की जाएगी। 1 अप्रैल से जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए आंकड़े भी जमा किए जाएंगे। मुख्यत: पहला चरण 45 दिन में पूरा किया जाएगा। जनगणना की शुरुआत के दिन 1 अप्रैल को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अपने जनगणना फॉर्म भरेंगे। दिल्ली में पहले चरण की प्रक्रिया 1 से 6 अप्रैल तक चलेगी। गृह सचिव के मुताबिक, आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो इससे पहले दुनिया में कहीं भी इतने बड़े पैमाने पर लोगों के बारे में जानकारी जमा करने का काम नहीं किया गया है। इस अभियान के दौरान देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 640 जिलों, 5767 तहसीलों, 7742 कस्बों और 6 लाख से भी ज्यादा गांवों को कवर किया जाएगा। जनगणना के काम में लगे कर्मचारी 24 करोड़ से भी ज्यादा घरों में जाएंगे और 120 करोड़ लोगों के बारे में हर संभव जानकारी जुटाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार करीब 2,209 करोड़ रुपये खर्च करेगी। राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर पर करीब 3,756 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का मानना है कि जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद देश के नागरिकों से जुड़े हर पहलू की जानकारी हासिल करना बेहद आसान हो जाएगा। इस जनगणना में अर्थव्यवस्था, शिक्षा, लोगों द्वारा अलग-अलग अपनाए गए रोजगार, साक्षरता, कुल घर और उनमें रहने वाले लोगों को ब्यौरे के साथ-साथ उनसे जुड़ी हर जानकारी ली जाएगी। सरकार ने जनगणना के दौरान सीमावर्ती इलाकों में खास सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए हैं। इस बात की आशंका है कि सीमापार से लोग राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
Monday, March 15, 2010
लाखों लोगों ने किया शाही स्नान
हरिद्वार. उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान सोमवती अमावस्या पर्व पर आज लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। हर की पौडी, मालवीय द्वीप, सुभाष घाट, गऊघाट पर बीतीरात बारह बजे से ही स्नान शुरू हो गया था। सैकड़ों वर्ष बाद महाकुंभ पर सोमवती अमावस्या पर्व के इस दुर्लभ संयोग के कारण आज के स्नान का महत्व काफी बढ़ गया था। जिसके कारण अपार भीड़ कल से ही हरिद्वार पहुंच गई थी।देश के विभिन्न प्रांतों से आज लाखों श्रद्धालुओं के अलावा विदेश से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। हरिद्वार में समूचे कुंभ क्षेत्न में चारों तरफ यात्नियों की आवाजाही दिखायी पड़ रही है। भीड़ के कारण यात्नियों को कई किलोमीटर पहले ही रोककर निर्धारित मार्गो से भेजा जा रहा है। प्रशासन की रणनीति श्रद्धालुओं को हर की पौडी से अलग घाटों पर भेजने की रही है। जिससे हर की पौडी पर भीड़ का दबाव न बन सके।सरकारी सूत्नों ने बताया की सभी वाहनों को शहर के विभिन्न क्षेत्नों में बनी पार्किग में खड़ा किया जा रहा है जहां से पैदल ही यात्नियों को स्नान घाटों की तरफ जाना पड़ रहा है। रिक्शा, तांगा तक बंद होने के कारण यात्नियों को सामान भी पैदल सर पर ढोना पड़ रहा है।आस्था सब पर भारी पड रही हैबच्चे, बूढे जवान, महिलाएं महाकुंभ के इस दुर्लभ संयोग के चलते सोमवती स्नान के लिए 10 से 12 किलोमीटर पैदल चल कर भी स्नान के लिए हर की पौडी पहुंच रहे हैं.पहली बार सभी 13 अखाडे स्नान करेंगेजिनका समय व क्रम निर्धारित कर दिया गया है। जिसमें पहले निरंजनी, फिर जूना, उसके बाद महानिवार्णी, वैरागी अखाडे, उदासीन व निर्मल अखाडे स्नान करेंगे। अखाडों का स्नान पूर्वान्ह् 11 बजे से शुरू हो जाएगा जो रात 7 बजे तक चलेगा। जिसको देखते हुए हर की पौडी को 9 बजे ही यात्नियों से खाली करा लिया जाएगा। आज हर की पौडी से ज्वालापुर-भीमगोडा तक करीब 10 किलोमीटर तक लंबे घाटों पर हर जगह यात्नी स्नान करते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने स्नान के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की है। हरिद्वार में चारों ओर पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने मोर्चा संभाल रखा है।...................................हरिद्वार। महाकुंभ के दौरान आज हरिद्वार में दूसरा शाही स्त्रान है। इस मौके पर देश भर के लाखों श्रद्धाओं हरिद्वार में पहुंचे। देर रात से ही श्रद्धाओं ने गंगा मे डुबकी लगाना शुरू कर दिया था। सुबह सवा ग्यारह बजे अखांडों का स्त्रान शुरू होना है। आज दूसरा शाही स्त्रान सोमवती अमावस्या के मौके पर हो रहा है आज अमावस्या के पडने और चंद्रमा के सूर्य के निकट आने का ये संयोग 760 साल बाद पड रहा है। 2010 की पहली तारीख के साथ शुरू हुए कुंभ मेले में हर दूसरे शाही स्त्रान का उत्साह है। इस समय बृहस्पति कुंभ में और सूर्य मीन राशि में है लेकिन अब चंद्रमा भी मीन राशि में पहुंच रहा है। जिसमें सूर्य और चद्र की अति निकटता का दुर्लभ संयोग बन रहा है। धर्मशास्त्रों के अनुसार सूर्य में व्याप्त अगिA और चंद्रमा की शीतलता में ही संपूर्ण जगत समाया हुआ है। उनकी निकटता के इस संयोग के अवसर पर पवित्र नदियों में स्त्रान का महत्व बढ जाता है।
Thursday, March 4, 2010
5 मार्च को कार्यशाला का आयोजन
श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। पर्यटक स्थलों के संरक्षण को लेकर वैज्ञानिक तकनीकों से उनके बचाव और विकास को लेकर गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग ने
श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। पर्यटक स्थलों के संरक्षण को लेकर वैज्ञानिक तकनीकों से उनके बचाव और विकास को लेकर गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग ने 5 मार्च को एक कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र इस कार्यशाला में सहभागी है।
इस कार्यशाला के आयोजन प्रबन्ध को लेकर आयोजित बैठक में गढ़वाल विवि पर्यटन विभाग के अध्यक्ष प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटकों स्थलों पर भारी दवाब होने के कारण विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभावों को बल मिला है। पर्यटन से जुड़ी सभी क्रियाओं और आवश्यकताओं का वैज्ञानिक तकनीक से डाटा बैंक तैयार करना आज की जरूरत भी बन गया है। प्रो. बागड़ी ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा। कार्यशाला के संयोजक संजय सिंह महर ने कहा कि भौगोलिक सूचना तंत्र और सुदूर संवेदन तकनीकी के माध्यम से सभी पर्यटक स्थलों और उनकी गतिविधियों की जानकारी के टूर ऑपरेटर्स को एक डाटा बेस के माध्यम से जारी किए जाने की योजना है। इससे पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कार्य करने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी अब यह जरूरी हो गया है। पर्यटन विभाग के सर्वेश उनियाल ने कहा कि अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र के माध्यम से प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड का एक सैटेलाइट डाटा बेस भी तैयार कर रही है। इससे यहां के सभी प्राकृतिक स्थलों, नदी, झरने, ट्रैक, बुग्यालों आदि की सभी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। इसको लेकर गढ़वाल विवि का पर्यटन विभाग पर्यटन से जुड़े लोगों को जागरूक भी करेगा।कर रहा है। उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र इस कार्यशाला में सहभागी है।
इस कार्यशाला के आयोजन प्रबन्ध को लेकर आयोजित बैठक में गढ़वाल विवि पर्यटन विभाग के अध्यक्ष प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटकों स्थलों पर भारी दवाब होने के कारण विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभावों को बल मिला है। पर्यटन से जुड़ी सभी क्रियाओं और आवश्यकताओं का वैज्ञानिक तकनीक से डाटा बैंक तैयार करना आज की जरूरत भी बन गया है। प्रो. बागड़ी ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा। कार्यशाला के संयोजक संजय सिंह महर ने कहा कि भौगोलिक सूचना तंत्र और सुदूर संवेदन तकनीकी के माध्यम से सभी पर्यटक स्थलों और उनकी गतिविधियों की जानकारी के टूर ऑपरेटर्स को एक डाटा बेस के माध्यम से जारी किए जाने की योजना है। इससे पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कार्य करने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी अब यह जरूरी हो गया है। पर्यटन विभाग के सर्वेश उनियाल ने कहा कि अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र के माध्यम से प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड का एक सैटेलाइट डाटा बेस भी तैयार कर रही है। इससे यहां के सभी प्राकृतिक स्थलों, नदी, झरने, ट्रैक, बुग्यालों आदि की सभी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। इसको लेकर गढ़वाल विवि का पर्यटन विभाग पर्यटन से जुड़े लोगों को जागरूक भी करेगा।
श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। पर्यटक स्थलों के संरक्षण को लेकर वैज्ञानिक तकनीकों से उनके बचाव और विकास को लेकर गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग ने 5 मार्च को एक कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र इस कार्यशाला में सहभागी है।
इस कार्यशाला के आयोजन प्रबन्ध को लेकर आयोजित बैठक में गढ़वाल विवि पर्यटन विभाग के अध्यक्ष प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटकों स्थलों पर भारी दवाब होने के कारण विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभावों को बल मिला है। पर्यटन से जुड़ी सभी क्रियाओं और आवश्यकताओं का वैज्ञानिक तकनीक से डाटा बैंक तैयार करना आज की जरूरत भी बन गया है। प्रो. बागड़ी ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा। कार्यशाला के संयोजक संजय सिंह महर ने कहा कि भौगोलिक सूचना तंत्र और सुदूर संवेदन तकनीकी के माध्यम से सभी पर्यटक स्थलों और उनकी गतिविधियों की जानकारी के टूर ऑपरेटर्स को एक डाटा बेस के माध्यम से जारी किए जाने की योजना है। इससे पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कार्य करने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी अब यह जरूरी हो गया है। पर्यटन विभाग के सर्वेश उनियाल ने कहा कि अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र के माध्यम से प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड का एक सैटेलाइट डाटा बेस भी तैयार कर रही है। इससे यहां के सभी प्राकृतिक स्थलों, नदी, झरने, ट्रैक, बुग्यालों आदि की सभी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। इसको लेकर गढ़वाल विवि का पर्यटन विभाग पर्यटन से जुड़े लोगों को जागरूक भी करेगा।कर रहा है। उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र इस कार्यशाला में सहभागी है।
इस कार्यशाला के आयोजन प्रबन्ध को लेकर आयोजित बैठक में गढ़वाल विवि पर्यटन विभाग के अध्यक्ष प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटकों स्थलों पर भारी दवाब होने के कारण विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभावों को बल मिला है। पर्यटन से जुड़ी सभी क्रियाओं और आवश्यकताओं का वैज्ञानिक तकनीक से डाटा बैंक तैयार करना आज की जरूरत भी बन गया है। प्रो. बागड़ी ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा। कार्यशाला के संयोजक संजय सिंह महर ने कहा कि भौगोलिक सूचना तंत्र और सुदूर संवेदन तकनीकी के माध्यम से सभी पर्यटक स्थलों और उनकी गतिविधियों की जानकारी के टूर ऑपरेटर्स को एक डाटा बेस के माध्यम से जारी किए जाने की योजना है। इससे पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कार्य करने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी अब यह जरूरी हो गया है। पर्यटन विभाग के सर्वेश उनियाल ने कहा कि अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र के माध्यम से प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड का एक सैटेलाइट डाटा बेस भी तैयार कर रही है। इससे यहां के सभी प्राकृतिक स्थलों, नदी, झरने, ट्रैक, बुग्यालों आदि की सभी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। इसको लेकर गढ़वाल विवि का पर्यटन विभाग पर्यटन से जुड़े लोगों को जागरूक भी करेगा।
२० हजार रोजगार भी चले जाएंगे।
रुद्रपुर। राज्य में लगे उद्योगों को औद्योगिक पैकेज नहीं मिलने से रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे। साथ ही नए उद्योगों के खुलने का रास्ता भी सिमटता जाएगा साफ। इस स्थिति में यदि केन्द्र सरकार ने औद्योगिक पैकेज को लेकर फिर से कोई निर्णय नहीं लिया तो तराई में लोगों को नए उद्योगों के लगने से मिलने वाले लगभग २० हजार रोजगार भी चले जाएंगे।
ऊधमसिंह नगर जिले के पंतनगर स्थित सिडकुल में ३२६ व एडिल्गो सितारगंज में १०० उद्योग कार्य कर रहे हैं। इन दोनों औद्योगिक क्षतों में अबतक ३० हजार से अधिक युवकों को रोजगार मिल चुका है। इसके साथ ही दोनों औद्योगिक अस्थानों में वर्तमान में २०० से अधिक उद्योगों की स्थापना का कार्य चल रहा है। जिसमें से कई उद्योगों के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है।
उत्पादन शुरू करने से पहले इन उद्योगों को औद्योगिक पैकेज की सीमा बढने का इंतजार था, लेकिन केन्द्र ने मार्च २०१० में खत्म हो रही औद्योगिक पैकेज की सीमा को न बढाकर नए उद्योगों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। स्थिति यह है कि औद्योगिक पैकेज की सीमा के खत्म होने के केन्द्र सरकार के निर्णय के बाद दजर्नों कंपनियों ने फैक्ट्री निर्माण का कार्य भी बंद कर दिया है।
केन्द्र ने यदि औद्योगिक पैकेज को लेकर निर्णय नहीं बदला तो यह उद्योग यहां अपना काम समेटने के बारे में भी सोच सकते हैं। पंतनगर व सितारगंज में यदि निर्माणाधीन २०० उद्योगों का कार्य पूरा होने के बाद उत्पादन शुरू हो जाता है तो उससे क्षेत्र में २० हजार से अधिक लोगों को नया रोजगार मिलेगा।
इस प्रकार देखा जाए क्षेत्र में हो रहे औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए टाटा मोटर्स ने ७८४०, अशोक लेलैंड ने २२००, बजज आटो ने २५०, नेस्ले इंडिया ने ३४९, सिरडी इंडस्ट्रीज ने १५५, ग्रीन प्लाई इंडस्ट्रीज ने १३००, रिद्धीसिद्धी ग्लूको बायोल्यस लि. ने ३६५, बिटानिया इंडस्ट्रीज ने ७००, एक्मे लि. ने ४०२ व डाबर इंडिया लि. ने ५९६ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा था। साथ ही अन्य उद्योग भी हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार देने की बात कर रहे थे, लेकिन केन्द्र के औद्योगिक पैकेज की सीमा को नहीं बढाने के निर्णय के बाद यह सभी उद्योग असमंजस की स्थिति में आ गए हैं।
ऐसे में यदि केन्द्र ने उत्तराखंड के उद्योगों को फिर से औद्योगिक पैकेज दिए जाने के निर्णय को बहाल नहीं किया तो यहां के उद्योगों में लोगों को हजारों में संख्या में मिलने वाले रोजगार की संभावना भी समाप्त हो जाएगी। एसईडब्लूएस के अध्यक्ष दिनेश धीर कहते हैं कि केन्द्र सरकार को उत्तराखंड के लिए कम से कम २०१३ तक औद्योगिक पैकेज को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र अपने निर्णय पर पुर्नविचार नहीं किया तो उत्तराखंड में औद्योगिक विकास को बडा धक्का लगेगा।
ऊधमसिंह नगर जिले के पंतनगर स्थित सिडकुल में ३२६ व एडिल्गो सितारगंज में १०० उद्योग कार्य कर रहे हैं। इन दोनों औद्योगिक क्षतों में अबतक ३० हजार से अधिक युवकों को रोजगार मिल चुका है। इसके साथ ही दोनों औद्योगिक अस्थानों में वर्तमान में २०० से अधिक उद्योगों की स्थापना का कार्य चल रहा है। जिसमें से कई उद्योगों के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है।
उत्पादन शुरू करने से पहले इन उद्योगों को औद्योगिक पैकेज की सीमा बढने का इंतजार था, लेकिन केन्द्र ने मार्च २०१० में खत्म हो रही औद्योगिक पैकेज की सीमा को न बढाकर नए उद्योगों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। स्थिति यह है कि औद्योगिक पैकेज की सीमा के खत्म होने के केन्द्र सरकार के निर्णय के बाद दजर्नों कंपनियों ने फैक्ट्री निर्माण का कार्य भी बंद कर दिया है।
केन्द्र ने यदि औद्योगिक पैकेज को लेकर निर्णय नहीं बदला तो यह उद्योग यहां अपना काम समेटने के बारे में भी सोच सकते हैं। पंतनगर व सितारगंज में यदि निर्माणाधीन २०० उद्योगों का कार्य पूरा होने के बाद उत्पादन शुरू हो जाता है तो उससे क्षेत्र में २० हजार से अधिक लोगों को नया रोजगार मिलेगा।
इस प्रकार देखा जाए क्षेत्र में हो रहे औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए टाटा मोटर्स ने ७८४०, अशोक लेलैंड ने २२००, बजज आटो ने २५०, नेस्ले इंडिया ने ३४९, सिरडी इंडस्ट्रीज ने १५५, ग्रीन प्लाई इंडस्ट्रीज ने १३००, रिद्धीसिद्धी ग्लूको बायोल्यस लि. ने ३६५, बिटानिया इंडस्ट्रीज ने ७००, एक्मे लि. ने ४०२ व डाबर इंडिया लि. ने ५९६ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा था। साथ ही अन्य उद्योग भी हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार देने की बात कर रहे थे, लेकिन केन्द्र के औद्योगिक पैकेज की सीमा को नहीं बढाने के निर्णय के बाद यह सभी उद्योग असमंजस की स्थिति में आ गए हैं।
ऐसे में यदि केन्द्र ने उत्तराखंड के उद्योगों को फिर से औद्योगिक पैकेज दिए जाने के निर्णय को बहाल नहीं किया तो यहां के उद्योगों में लोगों को हजारों में संख्या में मिलने वाले रोजगार की संभावना भी समाप्त हो जाएगी। एसईडब्लूएस के अध्यक्ष दिनेश धीर कहते हैं कि केन्द्र सरकार को उत्तराखंड के लिए कम से कम २०१३ तक औद्योगिक पैकेज को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र अपने निर्णय पर पुर्नविचार नहीं किया तो उत्तराखंड में औद्योगिक विकास को बडा धक्का लगेगा।
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