Saturday, February 13, 2010

इतिहास की धरोहर बन गया। .....शाही स्नान



बारह फरवरी, 2010 का दिन 11 बजते ही इतिहास की धरोहर बन गया। क्षिप्रा नदी के किनारे संन्यासियों व वैरागियों के बीच हुए खूनी संघर्ष के वर्षो बाद यह खटास पूरी तरह दूर होती दिखी। आपसी प्यार इस कदर घुला कि संन्यासी अखाडों के साथ वैरागी अखाडों ने भी स्नान किया। हरकी पैडी व आसपास मौजूद लाखों श्रद्धालु इसके गवाह बने। संन्यासी अखाडे व वैरागी अखाडों का कुंभ में स्नान के क्रम को लेकर आपसी विवाद वर्षो से चल रहा था। इस विवाद के चलते क्षिप्रा नदी तो रक्तरंजित हुई थी। संन्यासी व वैरागियों में सन् 1738 में जमकर संघर्ष हुआ। यहीं से वैरागियों व संन्यासियों के बीच मतभेद और बढने लगे। दूरियां इस कदर बढ गई कि वे एक-दूसरे को पसंद तक नहीं करते थे। इसके बाद जितने भी कुंभ हुए सब में स्नान के क्रम को लेकर संन्यासियों से वैरागियों का विवाद होता रहा। ऐसे में वैरागियों ने वृंदावन में कुंभ करने का निर्णय लिया। हालांकि यह भी कहा जाता है कि वैरागियों ने अपनी तीन अणियों को लेकर यहीं पर रचनात्मक कार्य किया था। तब से वैरागी वृंदावन में कुंभ स्नान के बाद ही कुंभ के दूसरे शाही स्नान में डुबकी लगाते थे। लेकिन इस बार अखिल भारतीय अखाडा परिषद के पदाधिकारियों व साधु-संतों की सुलझी हुई सोच ने नई संस्कृति को जन्म दिया। वैर-भाव भूलकर सभी एक हुए। उनके बीच की कडवाहट महाकुंभ के पहले शाही स्नान में दूर हो गई। अखिल भारतीय अखाडा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानदास की तीस मार्च को भी शाही स्नान घोषित कराने की कोशिश में संन्यासी अखाडों ने पूरा समर्थन दिया। नतीजा यह हुआ कि शासन-प्रशासन को तीस मार्च को शाही स्नान घोषित करना पडा। इससे पूर्व तक तीन शाही स्नान होते रहे। 12 फरवरी की पूर्वाह्न 11 बजे यह महाकुंभ ऐतिहासिक हो गया। संन्यासी अखाडों के संतों के साथ वैरागी के श्री महंत व अखिल भारतीय अखाडा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानदास ने जयघोष करते हुए गंगा में डुबकी लगाई। उदासीन व निर्मल परंपरा के श्री महंत भी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ डुबकी लगाने हरकी पैडी पहुंचे। इस यादगार क्षण को सजोने के लिए लाखों श्रद्धालु हरकी पैडी व आसपास के क्षेत्र में मौजूद थे।

मेला प्रशासन शाही स्नान के अनुरूप व्यवस्था नहीं कर पाया।

अव्यवस्था के बीच महाकुंभ के पहले शाही स्नान पर करीब 55 लाख श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। सात अखाडों के करीब पचास हजार संन्यासियों और विभिन्न अखाडों के लगभग चार हजार नागा अवधूतों ने भी स्नान किया। इस मर्तबा वैरागी अखाडों ने भी शाही स्नान में भाग लिया। पर मेला प्रशासन शाही स्नान के लिए अपने दावे के अनुरूप व्यवस्था नहीं कर पाया। कई बार भगदड मच गई। हरकी पैडी पर स्थिति विस्फोटक बनने से पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पडा। शाही स्नान के साथ महाशिवरात्रि का भी स्नान था। श्रद्धालु इसके लिए देर रात से ही हरकी पैडी एवं अन्य घाटों पर जुटने लगे थे। सुबह आठ बजे तक हरकी पैडी समेत सभी घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाते रहे। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए हरकी पैडी पर स्नान रोक दिया गया। आठ बजे के बाद संन्यासियों के शाही स्नान के लिए व्यवस्था की गई। पूर्वाह्न लगभग 11 बजे से सायं साढे छह बजे तक अखाडों का स्नान चलता रहा। पहले शाही स्नान से पूर्व जूना अखाडा, आह्वान व अग्नि अखाडे की छावनी में देवता के पूजन के बाद सुबह दस बजे तीनों अखाडे हरकी पैडी की ओर स्नान के लिए निकले। तीनों अखाडे में चालीस से अधिक महामंडलेश्वर व मंडलेश्वर शामिल रहे। गाजे-बाजे के साथ अखाडे का शाही जुलूस पूरे रंग में दिखा। नागा संन्यासी तलवार, भाला, बरछी, फरसा आदि लेकर शक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे। देवता के स्नान के उपरांत करीब डेढ हजार से अधिक नागाओं ने हर-हर महादेव का जयघोष कर गंगा में डुबकी लगाई। विदेशी भक्तों की भक्ति भी खूब नजर आई। साध्वी व नागा साध्वियों ने भी स्नान किया। इनकी वापसी के बाद शेष अखाडों के संन्यासियों ने अपने नियत क्रम में स्नान किया। हरकी पैडी पर शाही स्नान चल रहा था। वहीं, अन्य श्रद्धालु सुभाष घाट, बिडला घाट, प्रेम नगर आश्रम घाट, विष्णु घाट समेत लगभग एक दर्जन घाटों पर स्नान कर रहे थे। स्नान का क्रम देर रात तक बना रहा। उधर, प्रशासन के इंतजाम ने श्रद्धालुओं को खासी परेशानी में डाले रखा। शाही स्नान से ठीक पहले तुलसी चौक पर पुलिस की बैरिकेडिंग को तोडकर श्रद्धालु आगे बढ गए। उन्हें बमुश्किल नियंत्रित किया गया। पुलिस व लोगों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। नागा संन्यासियों के पवित्र स्नान की झलक पाने को धोबी घाट पर अचानक भीड उमड पडी। इससे भगदड की स्थिति बन गई। कुछ लोग गंगा नदी में गिरे, लेकिन लाइफ जैकेट पहने जवानों ने उन्हें बचा लिया। बिडला घाट पर तो श्रद्धालुओं की भीड इस कदर हुई कि स्थिति मेला पुलिस के नियंत्रण से बाहर होती दिखी। लिहाजा पुलिस ने श्रद्धालुओं पर हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस की सख्ती की स्थिति यह थी कि मेला अस्पताल व जिला अस्पताल तक मरीज नहीं पहुंच सके। लोग घरों में कैद रहे। शिवालयों तक जल चढाने भी नहीं पहुंच सके। रोडवेज की व्यवस्था फेल नजर आई तो सिटी बसें नहीं चलने से दिक्कतें लगातार बढती ही रहीं।

Thursday, February 11, 2010

अब पोर्न साइट बैन नहीं कर पाएगी सरकार

अब से पोर्नोग्राफिक वेबसाइट बैन करने का अधिकार सरकार को नहीं है! जी हां। आईटी एक्ट (2000)में हालिया सुधार के बाद सरकार के पास अब ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिसके जरिए वह सविता भाभी डॉट कॉम जैसी पोर्न साइट पर प्रतिबंध लगा सके। अब ऐसी किसी भी वेबसाइट कै बैन करने का अधिकार केवल कोर्ट के पास होगा। 27 अक्टूबर 2009 को सेक्शन 69A को आईटी एक्ट में इंट्रोड्यूस किया गया। इसके लागू करते ही सरकार के हाथ से किसी भी पोर्न साइट को बैन करने की कार्यकारी ताकत ले ली गई। हालांकि सरकार अब भी पोर्न साइट को बैन कर सकती है लेकिन केवल उन्हीं साइट्स को जो कानून के शासन (पब्लिक ऑर्डर) के लिए खतरा पैदा करें। हालांकि किसी पोर्न साइट से पब्लिक लॉ एंड ऑर्डर के प्रभावित होने की संभावना कम ही है। ऐसा लगता नहीं है कि सविता भाभी जनता के बीच कोई दंगा करवा सकती है।
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और स्टोरीज़ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंसेक्शन 69A से पहले वाले एक्ट सेक्शन 69 के तहत सरकार पोर्न साइट बैन करने के लिए कदम उठा सकती थी। नए प्रोविजन ने पिछले प्रोविजन में दिए गए उन पांच मुख्य आधारों को ध्यान में रखा है जिनके आधार पर किसी वेबसाइट को बैन किया जा सकता है। ये पांच आधार हैं- देश की संप्रभुता और एकता को खतरा, देश की सुरक्षा के लिए, किसी राज्य की सुरक्षा के लिए, दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंधों के मद्देनजर और आंतरिक कानून व्यवस्था के लिए। अब पोर्न साइट से ऐसी किसी भी समस्या के पैदा होने का खतरा बमुश्किल ही है। इस नए प्रोविजन के तहत कानून निर्माताओं ने सरकार को मोरल पुलिसिंग से रोक ही दिया है।

Monday, February 8, 2010

महिलाएं उन पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं, जिनका सीना सफाचट होता है।

अभी तक आम धारणा थी कि महिलाएं उन पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं, जिनके सीने पर बाल होते हैं। लेकिन एक नये शोध से यह बात साबित नहीं होती है। फिनलैंड में तुकरू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के ताजा अध्ययन से पता चला है कि महिलाएं उन पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं, जिनका सीना सफाचट होता है।
विशेषकर उन महीनों में उनकी यह पसंद बढ़ जाती है, जब उनके गर्भधारण का सबसे उपयुक्त समय होता है। सीने पर बालों वाले पुरुषों में महिला हार्मोन ओएस्ट्रोजेन की बहुत बड़ी मात्ना होने की संभावना होती है। जिससे उनकी मैथुन क्षमता प्रभावित होती है।
हालांकि यह हार्मोन इन पुरषों को ज्यादा सीधा-सादा और भरोसमंद बनाता है लेकिन सिद्धांतत: उनकी महिला साथी के गर्भवती होने की संभावना को कम कर सकता है। यही कारण है कि महिलाओं के लिए अचेतन रूप से ऐसे पुरुष कम आकर्षक हो सकते हैं। यह बात भी सही है कि जिन महिलाओं के लिए गर्भधारण करना कोई समस्या नहीं है।
वे सीने पर बाल वाले पुरुषों को ज्यादा पसंद करती हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के लिए सीने पर बालों वाले और सफाचट सीने वाले 20 पुरुषों के फोटो लिए और उन्हें 15 से 69 साल की उम्र की 550 महिलाओं को दिखाया।
इनमें 60 प्रतिशत बुजुर्ग महिलाओं की तुलना में सिर्फ तीस प्रतिशत युवतियों ने सीने पर बालों वाले पुरुषों को तरजीह दी। बिहेवियरल इकोलोजी पत्निका में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि इससे पता चलता है कि शरीर के बाल महिला साथी की पसंद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रूम मेट हमराज भी, दगाबाज भी

अच्छी शिक्षा व नौकरी की तलाश में हर दिन कई हजारों युवा गाँवों से महानगरों की ओर पलायन करते हैं। अपनी आँखों में भविष्य के सुनहरे सपने सजाने वाले इन युवाओं के लिए महानगर में रहने के स्थान को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ती है। महँगे किराए व असुविधा से बचने के लिए कई लड़के-लड़कियाँ या तो पेइंग गेस्ट बनकर रहते हैं या फिर 4-5 लोग एकसाथ किराए पर रूम लेकर रूम शेयर करते हैं। इसके कई फायदे भी होते हैं और कई बार नुकसानदायक अनुभव भी होते हैं।फायदा या नुकसान : रूम शेयर करना जहाँ खाने-पीने व रहने के अनावश्यक खर्चों से बचने के लिए एक फायदे का सौदा है, वहीं यह आपके लिए नुकसान का सौदा भी हो सकता है, अगर आपका रूम मेट समझदार व सामंजस्य वाला न हो। कई महीनों या सालों तक एक साथ रहते-रहते रूम मेट आपका एक सुख-दुःख का साथी बन जाता है, लेकिन उसका जरूरत से अधिक साथ आपके लिए घातक भी हो सकता है। आजकल आए दिन हमें यह सुनने को मिलता है कि फलाँ के रूममेट ने उसकी हत्या कर दी या उसके साथ दुष्कर्म किया... वगैरह, वगैरह। यह केवल सुनी-सुनाई बातें ही नहीं बल्कि हकीकत भी है। यदि आप भी चाहते हैं कि आपके साथ ऐसा कुछ न हो तथा रूम मेट के साथ आपका रिश्ता सदैव मधुर बना रहे तो आपको चाहिए कि अपने रूम मेट से कुछ बातें छुपाएँ और खुश रहें।प्रायवेसी मेंटेन करें : हर व्यक्ति की एक निजी लाइफ होती है, जिसमें हस्तक्षेप करना हर किसी का अधिकार नहीं होता। यदि आपके पेट में कोई बात नहीं टिकती है तो उसे अपने परिवारजनों से शेयर करें, रूम मेट से नहीं। रूम मेट और आपका साथ तो कुछ महीनों या सालों का है परंतु परिवारजनों का साथ तो आपके लिए जिंदगीभर का है। अपनी हर प्राइवेट बात में रूम मेट को शरीक करना आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। हो सकता है आपका रूम मेट कल इन्हीं बातों लेकर दोस्तों के सामने आपको बदनाम करे या फिर आपको ब्लैकमेल करे।बैंक अकाउंट्स में गोपनीयता जरूरी : किसी को अधिकार देना अच्छी बात है, परंतु इतना अधिकार देना कि सामने वाला आप पर ही हावी हो जाए। यह समझदारी नहीं बल्कि मूर्खता है। कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब आपको अपने रूम मेट के साथ भी शॉपिंग पर जाना पड़ता है। ऐसे में यदि आपको कुछ खरीदना है तो आप जरूर अपने क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन ऐसे में कई बार जल्दबाजी में यार, जरा तू पैमेंट निकाल ला, कहकर हम अपने बैंक अकाउंट नंबर व पासवर्ड तक रूम मेट को बता देते हैं, जो कि गलत है।आदतों का ढिंढोरा न पीटें : प्रत्येक मनुष्य में अच्छी-बुरी आदतें दोनों होती हैं। आपको चाहिए कि आप अपनी बुरी आदतों में सुधार करें न कि रूम मेट के सामने उनका ढिंढोरा पीटें। हो सकता है कल को आपका अपने रूम मेट से झगड़ा हो जाए, तब आपका वही रूम मेट जो आज आपका हमराज है, कल दगाबाज भी बन सकता है। ऐसे में अपनी बुरी आदतों के सार्वजनिक हो जाने के कारण आपको अपने मित्रों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है।कई बार रिश्तों में दूरियाँ प्यार का संकेत होती हैं। आपका रूम मेट आपका एक बेहतर दोस्त हो सकता है बशर्तें उससे केवल वही बातें शेयर की जाएँ, जो जरूरी है। यदि आप बोलने में सतर्कता व सावधानी रखेंगे तो आपके रूम मेट से आपके रिश्ते बेहतर व चिरायु होंगे।

संबल होते हैं मन के रिश्ते

जीवन की तेजी से बदलती परिभाषा और रिश्तों में बढ़ती दूरियाँ, कहीं न कहीं मनुष्य को मनुष्यता से ही दूर करने पर आमादा हैं। इसका खामियाजा सभी भुगत रहे हैं। कहीं टीनएजर्स शराब और सिगरेट जैसी लतों के गुलाम बन रहे हैं, कहीं पति-पत्नी के बीच की दूरियाँ बढ़ रही हैं और कहीं बच्चे मार्गदर्शन, स्वस्थ हँसी-मजाक और अच्छे घरेलू माहौल से दूर, केवल कृत्रिम दुनिया में कैद हैं।रिश्तों का 'हेल्दी बॉण्ड' तथा प्रसन्नता की ताजी हवा सबके लिए जरूरी है। यह आपके रिश्तेदारों, सहयोगियों, दोस्तों, किसी से भी मिल सकती है। जरूरत है आपके हाथ बढ़ाने की। पेशे से भवन निर्माता हीरेंद्र (48) पिछले दिनों एक बड़ी परेशानी से उबरे हैं। परेशानी की वजह थी उनके 18 वर्षीय पुत्र रौनक से जुड़ी। दरअसल घर से बाहर काम के सिलसिले में व्यस्त रहे हीरेंद्र इस ओर ध्यान नहीं दे पाए कि उनका बेटा बड़ा हो रहा है। उन्होंने केवल बेटे को महँगे तोहफे लाकर देना ही सबसे बड़ा काम समझ लिया। उनकी पत्नी भी बेटे का मन ठीक से पढ़ नहीं पाईं। उन्होंने अपने जीवन का टारगेट केवल बेटे को अच्छा भोजन करवाने तक सीमित कर लिया था। मिडिल क्लास तक आने पर तो रौनक के लिए भी पिता के दिए महँगे तोहफे खुश होने का सबब बनते रहे, लेकिन दसवीं कक्षा से अनेक सवाल उसके जेहन में उमड़ने लगे थे जिनका जवाब देने के लिए न पिता के पास फुर्सत थी, न माँ उसे समझ पा रही थीं। घर में कुल जमा वे तीन ही प्राणी थे... तमाम नाते-रिश्तेदारों से दूर। रौनक अकेलेपन और ऊब से बचने के लिए नशे का सहारा लेने लगा। सिगरेट से शुरू हुआ यह सफर ड्रग्स तक पहुँच गया और पिछले दिनों जब हीरेंद्र दौरे पर थे, तब उन्हें सूचना मिली कि सुबह जब काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी रौनक ने अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोला तो परेशान हो उसकी माँ ने हीरेंद्र के फैमेली फ्रेंड वर्माजी के घर फोन किया। वर्माजी ऑफिस के लिए निकल ही रहे थे... सो तुरंत आ गए और जब 2-3 लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर ड्रग्स के ओवरडोज के कारण बेहोश पड़ा रौनक मिला। आनन-फानन वर्माजी उसे हॉस्पिटल ले गए और समय रहते इलाज मिलने से रौनक बच गया। हीरेंद्र के वापस आने पर वर्माजी ने शांति से बैठकर उन्हें स्थितियों पर विचार करने को कहा। वर्माजी पूरे समय न केवल हीरेंद्र तथा उनकी पत्नी को मानसिक संबल देते रहे बल्कि रौनक को भी उन्होंने अवसाद से बाहर निकाल लिया। आज हीरेंद्र और उनकी पत्नी, रौनक को पूरा समय दे पा रहे हैं और वर्मा परिवार तो उनके लिए सबसे खास हो गया है। कहा जाता है कि दुनिया में रिश्ते केवल रक्त सिंचित हों, यह कतई जरूरी नहीं। मन से बने रिश्ते इससे भी कहीं गहरे हो सकते हैं और ऐसा एक रिश्ता आपके लिए जिंदगीभर सबसे बड़ी ताकत बनकर रहता है। चाहे वे सगे-संबंधी हों, मित्र हों, सहयोगी हों, पड़ोसी हों या फिर मात्र परिचित हों। केवल खुशियों को बाँटते समय ही नहीं, कठिनाइयों में साथ निभाते समय भी ये रिश्ते आपका संबल बनकर उभरते हैं। अब नीता की ही कहानी को लीजिए।27 वर्षीय नीता एक फर्म में अकाउंटेंट है। यूँ उसकी सभी सहयोगियों से बोलचाल है, लेकिन जब जिक्र श्रीमती मेहता का होता है तो उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। 54 वर्षीय श्रीमती मेहता इस कंपनी के पुराने कर्मचारियों में से हैं। जब नीता यहाँ नई आई थी तो उसने भी श्रीमती मेहता के साथ मित्रता करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।इस रिश्ते की शुरुआत तब हुई, जब 4 साल पहले नौकरी ज्वॉइन करने के एक साल बाद प्रेगनेंसी के दौरान नीता के सामने मुश्किलें आनी शुरू हुईं। उसके बाकी सहयोगी न तो उसकी मनःस्थिति को समझ पाए, न ही उसके शारीरिक कष्टों को। वहीं अनजान शहर में माता-पिता तथा सभी रिश्तेदारों से दूर नीता के लिए यह अनुभव नया और ढेर सारे प्रश्नों से भरा था। उसे कुछ समझ नहीं आता था और उसके पति राकेश के पास इतना समय नहीं था कि वे पूरे वक्त नीता के साथ रह सकें। नीता चिड़चिड़ी होती जा रही थी। ऐसे में उसकी मदद के लिए आगे आईं श्रीमती मेहता। उन्होंने बिलकुल माँ की तरह नीता की केयर की और दोस्त की तरह उसके साथ रहीं। उनके अनुभवों ने नीता की कई चिंताएँ दूर कर दीं। डिलेवरी के बाद भी वे हॉस्पिटल और घर के बीच नीता के लिए सेतु की तरह काम करती रहीं। आज नीता की दो वर्षीय बेटी नुपुर उसकी कम, श्रीमती मेहता की लाड़ली ज्यादा है। वह उन्हें नानी ही कहती है। नीता खुद कहती है- 'मन से बने इस रिश्ते ने मुझे काफी कुछ दे दिया। श्रीमती मेहता से मैं कब काकी के संबोधन पर आ गई, मुझे पता ही नहीं चला। अब राकेश मुझे छेड़ने के लिए कहते हैं कि तुम्हारी फ्रेंड उम्र में तुमसे कुछ बड़ी नहीं है?' असल में रिश्तों का ये हेल्दी बॉण्ड आपके अंदर भावनाओं को जिंदा रखने का महत्वपूर्ण काम करता है। जरा सोचिए... तेजी से यांत्रिक और भौतिक होते जीवन में अगर भावनाओं की जगह ही न बचे तो क्या आप इंसान भी बने रह पाएँगे? फिर परिवार और समाज जैसी संस्थाओं का क्या होगा? और इससे तो पूरी दुनिया में अराजकता ही फैल जाएगी। जरा सोचिए बिना अपनों के आपकी जिंदगी के उल्लासभरे पल कितने बेरंगे होंगे और दुखभरे पलों को बिताना भी कितना कठिन हो जाएगा? इसलिए रिश्तों के बंधन जोड़िए। कुछ सामान्य टिप्स भी आप याद रख सकते हैं।ऑफिस में या कॉलोनी में एक ग्रुप बनाइए जो महीने में एक बार कहीं मिलकर पिकनिक या आउटिंग पर जाए। अपने परिचितों और रिश्तेदारों में जिससे भी आपका मानसिक स्तर मेल खाता हो और जहाँ आपको लगता है कि सकारात्मक रिश्ते बन सकते हैं, वहाँ मेलजोल बनाए रखें।दोस्तों और परिचितों के साथ समय बिताएँ और समय-समय पर उनके सुख-दुख में शरीक हों।यदि आप एकल परिवार वाले माता-पिता हैं तो अपने परिवार, नाते-रिश्तेदारों के बारे में अपने बच्चों को जरूर बताएँ।बच्चों को अच्छे दोस्तों की कीमत समझाएँ और इस बारे में उन्हें पर्याप्त मार्गदर्शन दें। कोशिश करें कि वे सामाजिक आयोजनों में भी हिस्सा लें।अपने घर और बच्चों को समय दें और कम से कम हफ्ते में एक बार सबके साथ मिल-बैठकर, स्वस्थ मनोरंजन करने का कार्यक्रम जरूर बनाएँ। हमेशा याद रखिए यदि मुसीबत में कोई आपके काम आता है तो वह आपका सच्चा हितचिंतक है। ऐसे व्यक्ति से हेल्दी बॉण्ड तो डेवलप कीजिए ही, यथाक्षमता समय पड़ने पर उसकी मदद से भी चूकिए नहीं।आपकी जिंदगी में कोई व्यक्ति ऐसा जरूर हो जो विपरीत समय पर आपको सही मार्गदर्शन दे सके और उलझन सुलझाने में आपकी मदद कर सके।

लो आ गया प्यार का महीना

ठंड की हल्की नरमी, वसंत ऋतु में खिले फूलों की खुशबू, मौसम की रवानी और फाल्गुन में मदमस्त कर देने वाला फरवरी माह प्रकृति और सुंदरता के कद्रदानों के लिए व्यस्तता से भरा होगा। इस माह में प्यार का इजहार और प्रस्ताव देने के दिवस आएँगे, वहीं प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेम दिवस वैलेंटाइन डे भी बस सप्ताह भर ही दूर है। इसलिए फरवरी का यह पूरा महीना आशिकों के लिए व्यस्तता से भरा होगा। 7 फरवरी को गुलाब दिवस के रूप में मनाया गया। तो 8 फरवरी को यानी कि प्रपोज डे के दिन प्यार के कद्रदान अपने चाहने वालों के सामने अपने प्यार का इजहार कर रहे हैं। 9 फरवरी को चॉकलेट दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन प्यार से किसी को चॉकलेट देकर संबंधों में मिठास भरी जा सकती है। 10 फरवरी को टेडी डे होगा, जिसमें टेडी टॉयज देने के बहाने भी प्यार का इजहार हो सकता है। 11 फरवरी को सच्चे प्रेमी प्रोमिस डे पर एक-दूसरे से प्यार निभाने का वायदा करेंगे। 12 फरवरी को है किस डे। इस दिन प्यार करने वाले सच्चे प्रेमी-प्रेमिका किस के जरिए अपने प्यार की कसमें खातें हैं। 13 फरवरी हो आलिंगन दिवस यानी 'हग डे' होगा। इस दिन प्यार के राही एक-दूसरे के गले लगकर आलिंगनबद्ध हो सकते हैं। 14 फरवरी का दिन जैसा कि आप सभी जानते हैं कि संत वैलेंटाइन के नाम है। प्यार करने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। यह दिन प्यार करने वालों के नाम ही होता है।
NDNDप्यार का भरपूर मजा लेने के बाद 15 फरवरी को जरा संभल कर रहें। इस दिन आपको कोई प्यार से गाल पर थप्पड़ रसीद कर सकता है। जी हाँ, इस दिन है स्लैप डे। इसलिए अपने चाहने वालों को इस दिन प्यार का थप्पड़ जरूर रसीद करें। 16 फरवरी का दिन भी संभल कर रहने वाला दिन है। इस दिन को किक डे के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन आप किसी को प्यार से किक कर सकते हैं। वहीं 17 फरवरी को है परफ्यूम डे। इस दिन फूलों और इत्र के जरिए प्यार की सच्ची सुगंध का मजा लीजिए। इस दिन आप अपने चाहने वालों को परफ्यूम आदि भेंट कर सकते हैं। 18 फरवरी को है फ्लर्टिंग डे। इस दिवस पर आपअपने प्यार के साथ फ्लर्ट करने का मजा ले सकते हैं। 19 फरवरी को है कन्फेशन डे। यानी कि इस दिन आप अपने प्रियतम के प्रस्ताव या गलती को स्वीकार कर सकते हैं। आपसे अगर कोई गलती हुई है तो उसे आप अपने प्रेमी के सामने कन्फेस कर सकते हैं।20 फरवरी को है मिसिंग डे। प्यार करने वाले इस दिन अपनों की कमी महसूस करेंगे। वहीं 21 फरवरी को ब्रेकअप डे है। इस दिन समझो, हो गया प्यार पूरा। अगर आपको प्यार रास नहीं आ रहा तो इस दिन आप ब्रेकअप कर सकते हैं। तो इस 15 दिवसीय प्यार के लिए तैयारी बस शुरू कर दीजिए।दिवसों की लिस्ट : 8 फरवरी : प्रपोज डे 9 फरवरी : चॉकलेट डे 10 फरवरी : टेडी डे 11 फरवरी : प्रोमिस डे 12 फरवरी : किस डे 13 फरवरी : हग डे 14 फरवरी : वैलेंटाइन डे 15 फरवरी : स्लैप डे 16 फरवरी : किक डे 17 फरवरी : परफ्यूम डे 18 फरवरी : फ्लर्टिंग डे 19 फरवरी : कन्फेशन डे 20 फरवरी : मिसिंग डे 21 फरवरी : ब्रेक अप डे